Old Testament
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रोमियों 6:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि पाप की मजदूरी* तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।
रोमियों 6:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 6:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 3:36 (HINIRV) »
जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है।”

रोमियों 5:12 (HINIRV) »
इसलिए जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। (1 कुरि. 15:21-22)

याकूब 1:15 (HINIRV) »
फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।
रोमियों 6:23 — पाप की मजदूरी से मृत्यु; परमेश्वर का वरदान है अनन्त जीवन
यह वाक्य हमें यह बताता है कि जीवन के मूल कारण क्या है और उद्धार कैसे आता है। पाप की मांग हमारे जीवन में मृत्यु की मजदूरी के रूप में दर्ज है—यानी पाप अपने परिणामस्वरूप मौत दे देता है। पर परमेश्वर का वरदान, जो कि यीशु मसीह में उपलब्ध है, अनंत जीवन है। यह एक स्पष्ट द्वैत है: जुर्म के भुगतान के बदले मृत्यु, और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन की अनंत खारीदा। यह संदेश न केवल मानव की नैतिक गिरावट को उजागर करता है, बल्कि ईश्वर की करुणा और स्मरणीय उद्धार को भी उजागर करता है।
1) मूल संदर्भ और संदेश
रोमियों के पत्र में पौलुस ने प्राचीन रोमी चर्च को यह समझाने की कोशिश की कि ईश्वर के धर्म में कानूनी नियमों के भीतर जीवन ढूंढना भ्रम है। पाप की शक्ति और दंड प्रभु यीशु मसीह के क्रूस तक जाते हैं, जहाँ विश्वास के साथ लिया गया वरदान मृत्यु के बजाय जीवन देता है। 6:23 इसी द्वंद्व का सार प्रस्तुत करता है: एक मजदूरी का परिणाम—मृत्यु—और परमेश्वर का मुक्तिदायक वरदान—अनंत जीवन—जो मसीह यीशु में है।
2) प्रधान विचार
मुख्य संदेश है कि उद्धार और जीवन केवल परमेश्वर के वरदान के द्वारा आता है, न तो मानव की परिश्रम से। पाप की मजदूरी स्वाभाविक परिणाम है; परन्तु विश्वासघात नहीं, वरदान है। यह वरदान अनंत जीवन है—यही एक सक्रिय, निरंतर संबंध बनाता है यीशु के साथ।
3) प्रेरित प्रकृति के/themes
4) क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में)
— याकूब 1:15 के अनुसार पाप धीरे-धीरे उभरकर मृत्यु की ओर ले जाता है, फिर प्रेरित करता है। संक्षिप्त संदर्भ}
— गलातियों 6:8—9 में आत्मा से जीवन मिलता है और आराम से जीवन बढ़ता है; पाप के परिणाम 뒤 से विनाश।
— 1 जॉन 5:11–12 में कहा गया है कि जिसने पुत्र में ζωή है, उस में जीवन है; जिसने पुत्र को नहीं पाया, उसमें जीवन नहीं।
5) पुराने पते के प्रभावी उद्धरण (मूल विचाराधार से)
इस पाठ पर प्रकाश डालते हुए ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक डोमिनेशन टिप्पणीकारों के विचारों से सहायता मिलती है—परन्तु नीचे केवल आवश्यक संदर्भ उद्धरण ही दिए जा रहे हैं:
“पाप की मजदूरी मौत है”—यह मूल विचार है जो बार्न्स के commentary में भी बार बार आता है।
“परमेश्वर का वरदान अनंत जीवन है”—क्लार्क भी इस वरदान के आत्मविश्वासपूर्ण आश्वासन पर बल देते हैं।
6) एक संक्षिप्त आध्यात्मिक विचार
हम जो पाप के दायरे में रहते हैं, वह हमें मौत की ओर ले जाता है, पर ईश्वर की कृपा ने यीशु में जीवन का मार्ग खोल दिया है। जीवन का असल अर्थ यह है कि हम अब नयी दिशा में चलते हैं—विश्वास के पथ पर, जो हमें परमेश्वर के साथ जोड़े रखता है और अनंत जीवन की आशा देता है।
7) संबंधित पवित्रशास्त्री विचार (संक्षेप)
यह संदेश Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रचलित विचारों के साथ संगत है: पाप की मजदूरी परिणामस्वरूप मृत्यु है, पर उद्धार ईश्वर के वरदान के रूप में मिला है। उनके विचारों में स्पष्ट है कि विश्वास से प्राप्त जीवन किसी प्रकार के कर्म-प्रदत्त लाभ से अधिक है—यह परमेश्वर के कृपापूर्ण निवास का परिणाम है।
8) अंतर्दृष्टिपूर्ण धारण
रोमियों 6:23 हमें स्पष्ट रूप से कहता है कि जीवन और मृत्यु के बीच एक निर्णायक विभाजक है—पाप की मजदूरी मृत्यु है; परन्तु परमेश्वर का वरदान जीवन है। यह विचार हमें विश्वस के साथ यीशु मसीह के साथ अपने सम्बन्ध की गहराई दिखाता है।
नोट/Cross-reference पंक्तियाँ
1) याकूब 1:15 (पाप की क्रमबद्ध प्रक्रिया के बारे में) — पाप कैसे जन्म लेता है और मृत्यु को जन्म देता है।
2) गलातियों 6:8–9 (आत्मा के जीवन के बनाए जाते हैं) — आत्मा से जीवन का स्थायित्व।
3) 1 जॉन 5:11–12 (जीवन का स्रोत) — जिसमें जीवन है वही पिता का पुत्र है।