Old Testament
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रोमियों 6:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और न अपने अंगों को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आपको मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगों को धार्मिकता के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।
रोमियों 6:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 6:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 12:1 (HINIRV) »
इसलिए हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर विनती करता हूँ, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ; यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।

रोमियों 6:16 (HINIRV) »
क्या तुम नहीं जानते कि जिसकी आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों के समान सौंप देते हो उसी के दास हो: चाहे पाप के, जिसका अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिसका अन्त धार्मिकता है?

1 पतरस 2:24 (HINIRV) »
वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए* क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मर करके धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ। उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। (यशा. 53:4-5,12, गला. 3:13)
रोमियों 6:13 का व्याख्या-संदेश: अपने अंगों को धर्म के हथियार होने दें
मुख्य interpretive point: पाप के अधीन रहने के बजाय अपने पूरे अस्तित्व को परमेश्वर के सेवा के लिए समर्पित करना ही ईसाई जीवन का वास्तविक परम उद्देश्य है। पाप के हथियार बनना हमारी प्राकृतिक प्रवृत्ति है; पर यीशु मसीह में जी उठने की नई जिंदगी द्वारा हमें अपने अंगों को धार्मिकता के हथियार बनने के लिए सौंपना चाहिए।
साहित्यिक (संदर्भ-संदर्भ) संदर्भ
पद का मूल भाव दो पक्षों में चलता है: एक नकारात्मक—पाप के हथियार बनना; दूसरा सकारात्मक—परमेश्वर को सौंपना। रोमियों के आरम्भिक अध्यायों में पाप की servitude का चित्रण है, और अध्याय 6 में नया जीवन—कब्र से उठकर जी उठना—इस परिवर्तन का आधार बनता है। अंगों से आशय हमारे सक्रिय कर्म, सोच, बोलचाल, और हर प्रकार की क्रियाओं से है जिनसे हम पाप के अदृश्य और दृश्य दोनों मामलों में बंधे रहते हैं।
धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंसेस
यही सिद्धांत अन्य कृत्यों में भी आता है:
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
रोमियों 6:13 हमें स्पष्ट चेतावनी देता है कि हमारी सृष्टि के अंग यदि पाप की तलवार बन जाएं, तो परिणाम पछतावे के सिवा कुछ नहीं देता। परन्तु यदि हम अपने सारे अस्तित्व को परमेश्वर को सौंप दें—जी उठे हुए जीवन से प्रेरित होकर—तो हमारे कर्म, शब्द और इच्छाएं धार्मिकता के हथियार बन जाते हैं। यह परिवर्तन ईसाई जीवन का वास्तविक लक्ष्य है: पाप के अधीन रहने से मुक्त, और ईश्वर के साथ जागृत जीवन के पक्ष में स्थाई रूप से खड़े होना।
नोट: कथनात्मक उद्धरण के लिए कुछ पंक्तियाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट commentary से उद्धृत किए जा सकते हैं, यदि उपलब्ध हों, किन्तु यहाँ हमने मूल सार को स्वभावानुसार नया रूप देकर प्रस्तुत किया है।