Old Testament
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रोमियों 6:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
रोमियों 6:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 6:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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कुलुस्सियों 3:17 (HINIRV) »
वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो*, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

कुलुस्सियों 3:3 (HINIRV) »
क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।

रोमियों 6:11 का Immediate Setting
यह पद रोमियों के अंतर्गत पवित्र जीवन के सार को स्पष्ट करता है। पॉल इस बात को दोहराते हैं कि मसीह के अनुयायी के लिए पाप की सत्ता से बाहर निकलना व्यवहारिक लक्ष्य है: “ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।” यह कथन अहंकार-रहित, क्रिस्त-केन्द्रित आचरण की दिशा दिखाता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो इसे बताता है
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि नया जीवन परमेश्वर की कृपा का परिणाम है, जिसे विश्वास से प्राप्त किया गया है। मसीह यीशु में जीवित समझना तब संभव है जब हम अपने पुराने स्व को क्रूस के साथ मर चुके मान लेते हैं और ईश्वर के लिये जीने की नयी आयु ग्रहण करते हैं। यहाँ पाप को मरा मानना एक परिवर्तनशील हृदय की स्थितिति है, जो प्रकाशित कर देती है कि क्रूस पर मरण मात्र शरीर नहीं, चरित्र की मृत्यु भी है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अपने आप को पाप के लिये मरा — पाप के नियंत्रण से पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा; पुराने स्व के जन्म-खण्ड का अंत।
परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो — नया जीवन, ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप कार्य करना; यीशु-केन्द्रितता की वफादारी।
संबंधित उपदेश और क्रॉस-रेफरेंसेस
व्यावहारिक आज का आवेदन
- व्यक्तिगत नैतिक आचरण में पाप के प्रभाव से मुक्ति की आत्म-निरीक्षा करें: क्या मैं दिन-प्रतिदिन पुराने स्व के प्रवाह से मरकर, नया जीवन जी रहा हूँ?
- निर्णय करें कि जीवन का प्रमुख उद्देश्य क्या है: क्या मैं ईश्वर की महिमा के लिए जी रहा हूँ और मसीह के मानदंडों के अनुरूप कार्य कर रहा हूँ?
- नित्य क्रियात्मक उपाय: प्रार्थना, पवित्रशास्त्र अध्ययन, और समुदाय के साथ निर्भरता—ताकि पवित्र जीवन के लिए प्रेरणा बनी रहे।
संरचना-सार
यह पद दो बार प्रेरित करता है—पहले पाप के दायरे से बाहर निकलने की औपचारिक घोषित स्थिति, फिर उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य में बदले जाने की आह्वान: पाप के लिये मरना और ईश्वर के लिये जीवित होना। यह नयी पहचान, ईश्वर के साथ क्रिस्तीय जीवन की वास्तविकता और आचरण के परिवर्तन के लिए आधार बनाती है।
उद्धरण-संदर्भ (Public-domain टिप्पणीकारों के शाब्दिक संकेत)
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन विचारधारा से प्रेरित सूचनाओं का समन्वय है। नीचे उनके मौखिक संकेतों से सम्बंधित संक्षिप्त उल्लेख है:
— Matthew Henry: “The believer is dead to sin, and alive unto God in Christ Jesus.”
— Albert Barnes: “To reckon yourselves dead indeed unto sin, but alive unto God in Jesus Christ.”
— Adam Clarke: “Believers, by faith, regard themselves as crucified to sin, and thus free to live unto God.”
Note: उपरोक्त पंक्तियाँ प्रवचनों के सार-जैसी मानी जाती हैं, परन्तु यह पूरा पाठ उद्धृत नहीं हैं; विशिष्ट शब्द-योजनाओं का स्रोत-चयन संक्षेपित है.