Old Testament
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रोमियों 6:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएँगे।
रोमियों 6:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 6:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 3:10 (HINIRV) »
ताकि मैं उसको और उसके पुनरुत्थान की सामर्थ्य को, और उसके साथ दुःखों में सहभागी होने के मर्म को जानूँ, और उसकी मृत्यु की समानता को प्राप्त करुँ।

कुलुस्सियों 2:12 (HINIRV) »
और उसी के साथ बपतिस्मा में गाड़े गए, और उसी में परमेश्वर की शक्ति पर विश्वास करके, जिस ने उसको मरे हुओं में से जिलाया, उसके साथ जी भी उठे।

2 कुरिन्थियों 4:10 (HINIRV) »
हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं*; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
रोमियों 6:5 का अर्थ
सीधे शब्दों में समझें: यदि हम मसीह की मृत्यु के साथ उसकी समानता में जुड़ गए हैं, तो निश्चित ही हम उसकी जी उठने की समानता में भी जुड़ेंगे।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
पद रोमियों 6 में पौलुस विश्वासियों को बताता है कि बपतिस्मा के द्वारा वे क्रूस पर मसीह के साथ जुड़ जाते हैं और उसी के पुनरुत्थान के जीवन को साझा करते हैं। इसका अर्थ है कि पूर्व की पाप-जीवन अब परित्यागित है और नया जीवन ईश्वर की इच्छा के अनुसार बनाए रखना है। यह युक्ति बारम्बार स्मरण दिलाती है कि ईश्वर के राजा बनने का व्यवहार पूर्वाग्रह नहीं, बल्कि दिव्य परिवर्तन है।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
2–3 उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसे
यही विचार निम्न स्थानों में भी उभरे हैं:
हिंदी में संक्षेपित थीमैटिक बिंदु
सम्बद्ध टिप्पणीकारों से संकलित संकेत
एडम क्लार्क और ऐल्बर्ट बार्न्स के विचार एक साथ नीचे आते हैं: मसीह की मृत्यु के साथ जुड़ना न केवल स्मृति-सम्बन्ध है, बल्कि आध्यात्मिक परिवर्तन का आरम्भ है; यह जीवन-शैली का पूर्ण पुनर्निर्माण है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: - “जिन्होंने मसीह को पाया है, उनके लिए नया जीवन आरम्भ हो चुका है; पूर्व जीवन निर्थक हो गया है।” (समन्वयित सार) - ध्वनि तौर पर, पवित्रता के लिए नई दिशा आवश्यक है—पौलुस का उद्देश्य यही है कि विश्वासियों का जीवन पुनः बन सके।
निष्कर्षात्मक व्यावहारिक उपदेश
जो लोग ईश्वर के साथ जुड़ते हैं, वे न केवल अपने पापों से मुक्त होते हैं, बल्कि हर दिन नई शक्ति से जीते हैं। आज के दिन अपने जीवन के उन क्षेत्रों की पहचान करें जहाँ पुराने ढंग के विचार और व्यवहार चलते रहते हैं, और परमेश्वर की शक्ति से उन्हें नई दिशा दें।
याद रहे: रोमियों 6:5 हमें कह रहा है कि क्रूस पर मरना और जी उठना—ये एक समावेशी परिवर्तन है, जो विश्वास के यात्रा के हर चरण में दृष्टिगोचर होना चाहिए।