Old Testament
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रोमियों 6:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।
रोमियों 6:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 6:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 5:21 (HINIRV) »
जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।

1 पतरस 4:6 (HINIRV) »
क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उनका न्याय हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें।

1 पतरस 3:18 (HINIRV) »
इसलिए कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो मारा गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
रोमियों 6:10 — परिवर्तनशील जीवन का तथ्य
पद के प्रारम्भिक संदर्भ में प्रेरित पौलुस बतलाते हैं कि मसीही जीवन का केंद्र ‘‘क्रूस–सम्पन्नता’’ से है। जिस घटना ने हमारी सशक्त पहचान बनाई, वह है यीशु मसीह का मरना एक बार पाप के लिए, और फिर जीवित होना परमेश्वर के लिए। यह दोहराव नहीं, बल्कि एक ही बार की घटना का परिणाम है जो आज हमारे अस्तित्व को संचालित करता है: पाप की शासन से मुक्ति और ईश्वर के लिए नया जीवन।
ईश्वर और विश्वास के बारे में उद्घाटन तथ्य
इस वाक्य में प्रभु यीशु के क्रूस पर मरने की एक बार की क्रिया और उसकी पुनःजीवित होने की शक्ति स्पष्ट है। यहाँ परमेश्वर की योजना पक्का और स्थिर है: पाप के दंड से छुटकारा केवल एक बार के बलिदान से संभव है और इस बलिदान के प्रभाव से नये जीवन की राह खुलती है। पवित्रता और जीवित faith का यथार्थ इसी तथ्य पर टिकता है कि क्रूस पर मरने के साथ पाप का शासन समाप्त हो गया है, ताकि हम अब परमेश्वर के लिए जीवित रहें।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित अंश
यह पाठ अन्य स्मरणों से गहराई से जुड़ता है:
हिंदी पाठ के अनुसार छोटा-साCross-reference स्पर्श
ऐसे संदर्भ जिनसे पाठ की समझ मजबूत होती है: पाप की तलवार अब हृदय पर है जो कि मरे हुए पाप को प्रचलित मानता है; परन्तु जीवित रहने के लिए नया जीवन आवश्यक है। (रोमियों 6:11-12 के आस-पास के विचार) इत्यादि।
आज के समय में अनुप्रयोग
यह verse यह सिखाता है कि हर दिन एक जुड़ाव है—हम पाप के प्रभाव से मुक्त हो कर नया जीवन जीते हैं। अपनी पहचान पुराने नियम के अनुरोधों से नहीं, बल्कि मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान से बनाते हैं। नयी जिंदगी परमेश्वर के लिए है: दिन प्रतिदिन उसकी इच्छा को मानना, उसके मार्ग पर चलना, और अपने स्वार्थ को त्यागना। इसलिए हर पल उनके साथ जीवित संबंध बनाए रखना हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
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