Old Testament
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रोमियों 6:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर नाश हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें।
रोमियों 6:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 6:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 2:20 (HINIRV) »
मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल उस विश्वास से जीवित हूँ, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझसे प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।

इफिसियों 4:22 (HINIRV) »
कि तुम अपने चाल-चलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो।

गलातियों 6:14 (HINIRV) »
पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूँ, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिसके द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ।
रोमियों 6:6 परिभाषा और विश्लेषण
पद रोमियों 6:6 में पवित्र शास्त्र हमें बताता है कि हमारा पुराना मनुष्यत्व क्रूस पर चढ़ाया गया है ताकि पाप का शरीर नाश हो जाए और हम पाप के दासत्व में न रहें। यह संदेश स्थिरता, परिवर्तन और नयजीवन की आशा देता है—कि ईश्वर की कृपा से हमारा पूर्व-अस्तित्व पाप के प्रत्यक्ष प्रभाव से मुक्त किया जा सकता है, ताकि हम जीवित परमेश्वर के दास बनें।
एक शब्द में अध्याय का संदर्भ
रोमियों के अध्याय 6 का केंद्र यह है कि ईसुस मसीह में विश्वास रखने वालों के लिए स्वाभाविक पापी प्रवृत्ति पर विजय संभव है क्योंकि क्रूस पर यीशु ने हमारे पुराने स्वभाव को एक निर्णायक क्षण में समाप्त कर दिया है। इस अध्याय का उद्देश्य मसीह में बपतिस्मा जैसी आत्म-प्रतिज्ञा से नई जिंदगी शुरू करना है, जहाँ पाप की सत्ता धीरे-धीरे घटती है और धार्मिक स्वतंत्रता मिलती है।
मुख्य पाठ: मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य विचार यह है: यदि हमारा पुराना मनुष्यत्व क्रूस पर चढ़ाया गया है, तो पाप के शरीर के लिए हमारी नियंत्रण रेखा समाप्त हो जाती है। इसके द्वारा यह संकेत मिलता है कि नया जीवन अब हमारे भीतर नेमत के रूप में पाया गया है, जिससे हम पाप के दास नहीं, बल्कि ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ बनते हैं। यह परिवर्तन சrista-विश्वास का परिणाम है, न कि सिर्फ नैतिक प्रयासों का।
पवित्रशास्त्रीयों के संकेत और संयुक्त सार
हासन के समान कई पुरालेख-टिप्पणों में यह स्पष्ट किया गया है कि क्रूस पर पुराना मनुष्यत्व नाश के लिए नहीं, बल्कि पाप के दासत्व से मुक्त होने के लिए किया गया था। यह तर्कशास्त्रीय विचार बताता है कि विश्वासियों को अब पाप के प्रभाव से मुक्त रहने की प्रेरणा और शक्ति प्राप्त होती है, ताकि वे नये जीवन के साथ ईश्वर की इच्छा पूरी करें।
मिथ्यूड-सीधा सार यह है कि: हमारे पुराने स्वभाव की क्रूस-पर चढ़ाई से पाप का शरीर निष्क्रिय हो जाता है; ताकि हम पाप के दासत्व में न रहें और एक नई जीवन-यात्रा में प्रवेश करें।
अनुवादित शब्द-भाष्य और क्रॉस-रेफरेंसेस
इस पद के साथ जुड़े कुछ संदर्भ: - रोमियों 6:11-14 (खुद को मसीह के साथ जीवन के लिए प्रस्तुत करना)। - गलातियों 2:20 (मैं खरा-जाग्रित नहीं, पर मसीह मुझमें जीवित है)। - रोम 8:13-14 (पाप के बदले आत्मा के अनुसार जीवन)।
इन क्रॉस-रेफरेंसेस का छोटा अनुमान यह है कि शरीर की मृत्य और आत्मा की जीवनशक्ति कैसे एक साथ काम करती है ताकि ईश्वर के अनुसार नया जीवन संभव हो सके।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप में सार
रोमियों 6:6 बताता है कि ईश्वर के द्वारा हमारे पुराने स्वभाव का क्रूस पर मुक्ति मिलना एक निर्णायक परिवर्तन है: पाप का शरीर नष्ट हो जाए ताकि हम पाप के दासत्व में न रहें और नई, ईश्वर-स्वीकृत जीवन जी सकें। यह परिवर्तन विश्वास और प्रेरणा से संभव है, न कि केवल नैतिक कोशिशों से।
सूक्ष्म उद्धरण पंक्ति (पश्चात्ताप-युक्त)
आर्काइव्ड टिप्पणीकारों में से एक-दो कथन जो चर्चित हैं, उन्हें संक्षेप में उद्धृत किया गया है: "हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया"—यह पाठ्यांश संघर्ष के बावजूद स्थिति स्पष्ट करता है कि परिवर्तन ईश्वर की कृपा से होता है।
सूत्र-गुणांक उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—इनमें से कुछ विचारों के मर्यादित-सार नीचे उद्धृत हैं: - "अपने पुराने स्वभाव के साथ क्रूस के साथ जुदाई पाई जाए, ताकि नया जीवन संपूर्णता से उभर सके।"
Cross-references के साथ उपलब्ध संक्षेप: रोमियों 6:11-14; गलातियों 2:20; रोम 8:13-14—इनमें नया जीवनचरित और आत्मा द्वारा जीवन की प्रेरणा स्पष्ट होती है।