Old Testament
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रोमियों 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हो।
रोमियों 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 8:2 (HINIRV) »
क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।

इब्रानियों 8:10 (HINIRV) »
फिर प्रभु कहता है, कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने के साथ बाँधूँगा, वह यह है, कि मैं अपनी व्यवस्था को उनके मनों में डालूँगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूँगा, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा, और वे मेरे लोग ठहरेंगे।

Romiyon 6:14 – अर्थ का सीधा संकेत
इस verse का मूल सन्देश है: पाप की सत्ता अब हमारे ऊपर प्रभाव नहीं डालती, क्योंकि क्रिस्तीय अनुग्रह के अधीन हैं। अर्थात आत्मिक शुद्धता और नई जीवन शक्ति के लिए हमारा दायित्व निष्कर्षित है—हम व्यवस्था के अधीन नहीं, वरन् अनुग्रह के अधीन हैं, जो पाप के जकड़ने को तोड़ देता है।
संदर्भ-प्रस्तावना
रोमियों की पत्री में पॉल ने मसीही जीवन की गहरी पहचान को उजागर किया है—पहचान कि पुराने मोह से स्वतंत्र होकर हम नया जीवन किस प्रकार अभ्यास करते हैं। अध्याय 6 में मूल बात यह है कि ईश्वर के पीछे गिरना नहीं, बल्कि मरकर पुनर्जीवन में जुड़ना है: मसीह के साथ क्रूस पर मरना और उसके साथ पुनर्जीवित होना ताकि पाप की शक्ति हमारे ऊपर शासन न करे।
व्याख्यात्मक बिंदु
संकेतार्थ निष्कर्ष (हिंडोला: Themes)
संदर्भ-सम्बन्ध
1) रोमियों 3:24–25 — अनुग्रह से उद्धार का प्रमाण; न किया गया कर्म नहीं, बल्कि मसीह के साथ विश्वास के प्रभाव से मिलना।
2) गलातियों 5:16–17 — आत्मा के प्रभाव से शरीर की इच्छाओं पर नियंत्रण; पवित्र आत्मा का मार्गदर्शक बनना।
3) रोमियों 8:2 — आत्मा के द्वारा स्वतंत्रता, जो पाप की कायरता को समाप्त करती है।
इन संदर्भों में एक जैसा संदेश है: अनुग्रह से, और आत्मा के संचालन से ही पाप की गिरफ्त से मुक्त रहा जा सकता है।
प्राकृतिक-व्यवहारिक निष्कर्ष
- प्रतिदिन की जिन्दगी में नियमों से नहीं, बल्कि नया जीवन जीने की इच्छा से चलें।
- पवित्र आत्मा की दिशा में प्रवृत्ति बनाएं: प्रार्थना, पवित्रशास्त्र के आध्यात्मिक अभ्यास और भाई-बहनों के साथ सहयोग से पाप के जाल कमजोर होते हैं।
यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से समाहित होकर एक संयुक्त विवेचना के रूप में प्रस्तुत है। उनके रूपरेखीय दृष्टिकोण से संकेत मिलता है कि अनुग्रह का अधिकार पाप की प्रभुता पर विजय देता है और नया जीवन संभव बनाता है (कृपया उनके संक्षिप्त विचार नीचे दिये गए छोटे उद्धरणों के भीतर देखें)।
छोटे उद्धरण (योग्य और उद्धृत स्रोतों के साथ):
“अनुग्रह मोक्ष की प्रथम स्थिति है; पर वही जीवन में परिवर्तन लाता है” (एंथनी Barnes/ Clarke प्रकार के सार)।