मत्ती 26:63 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा “मैं तुझे जीविते परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ*, कि यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।”

पिछला पद
« मत्ती 26:62
अगला पद
मत्ती 26:64 »

मत्ती 26:63 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 26:63 पर हद तक चुप रहना और धार्मिक दबाव

इस पद के केंद्र में यीशु की चुप्पी है जब महायाजक की कड़वी आलोचना और शपथ लेने के दबाव दिखाई देते हैं। महायाजक पूछते हैं कि क्या तू परमेश्वर के पुत्र मसीह है, ताकि वह उसे दोषी ठहरा सके; परन्तु यीशु चुप रहते हैं ताकि न शब्दों से, न व्यवहार से वह अपनी मिशन को छोटा या अपमानित न करें, बल्कि समय आने तक चुप रहकर उद्धार के उद्देश्य की राह बनाते जाएं।

साहित्यिक-संदर्भ ( literary context )

यह मामला गात्ता-गहनों के बीच का है: यीशु का न्यायिक आडंबर और शत्रु-चक्र के बीच उसकी चुप्पी एक बड़ा धार्मिक नैतिक संदेश देती है। चुप्पी का यह क्षण शपथ के आग्रह के विरुद्ध नहीं, बल्कि उससे ऊपर उठकर सत्य की पराकाष्ठा को दर्शाता है: असली परमेश्वर पुत्रत्व का दावा मदद के लिए नहीं, बल्कि सच्चे दावे पर आधारित है।

धार्मिक-आउटलाइन (Theological significance)

1) पहचान पर अपेक्षित आत्म-प्रतिज्ञा नहीं: यीशु परमेश्वर के पुत्र होने के दावे को मनुष्यों के कहे सार्थक प्रमाणों के हवाले नहीं करते, क्योंकि उनका कार्य उद्देश्य से जुड़ा है—क़िलेबंद परीक्षणों के भीतर भी ईमानदारी और प्रभु-आज्ञा की पालन।

2) सच्चे सामना का ढंग: धार्मिक नेतृत्व के दबाव के बीच, यीशु की चुप्पी उनकी श्रेष्ठ सत्ता और शिक्षण-कार्य के ऊपर अधिकार को पुष्ट करती है; वह दिखाता है कि सत्य के लिए कभी-कभी मौन भी एक शक्तिशाली मौद है।

शब्दार्थ और देव-पत्र का दृष्टिकोण (Cross-cultural insights)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उन हिस्सों से जो सार्वजनिक न्याय और धार्मिक दबाव पर टिप्पणी करते हैं, वे यह संकेत देते हैं कि मृत्युदंड की ओर बढ़ते हुए यीशु की चुप्पी एक प्रेरक आत्म-नियंत्रण है, जो स्वयं के दावों को नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए झुकना है। (उद्धरण संदर्भ: इन टिप्पणियों के उच्चारण से जुड़ी सूचनाएं नीचे उद्धृत करने योग्य हो सकती हैं।)

क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • मरकुस 14:61-62 — यीशु की चुप्पी और परमेश्वर के पुत्रत्व के दावे पर उसका स्पष्ट उत्तर नहीं मिलेगा, क्योंकि वह पूर्व निर्धारित धर्म-न्यास के अनुसार कार्य करता है।
  • यूहन्ना 18:37 — यीशु खुद कहता है कि वह सच बताने के लिए आया है, और सत्ता के सम्हारे पर वह सब कुछ परमेश्वर के प्रबंध के अनुसार करता है।
  • नीतिवचन 26:4-5 — मूर्ख के साथ ऐसी प्रतिक्रिया न दें जो उसे और अधिक बढ़ावा दे, परन्तु विवेक से उत्तर दें; यहाँ भी चुप्पी और चयनित वक्तव्य का संतुलन देखा जा सकता है।

इन समकक्ष संदर्भों से स्पष्ट होता है कि उत्तर देने की रणनीति में शरीर-स्वीकृति नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप साहस और विवेक आवश्यक है।

प्रश्न-विचार (Reflection questions)

  • क्या आप संघर्ष के समय भी सत्य के दबाव में धैर्य और पराक्रम बनाए रखना सीख सकते हैं? क्यों?
  • अपने जीवन में कब चुप्पी सत्य जाने के लिए बेहतर_choice बन गई है?
  • क्या आप यीशु की चुप्पी से यह सीख लेते हैं कि परमेश्वर की योजना कभी-भी मानवीय संकल्प से ऊपर होती है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस वाक्य में यीशु ने दिखाया कि सच्चे दावेदारी के बावजूद भी भीतर की शक्ति ईश्वर की योजना के अनुरूप रहती है। महायाजक के दबाव के बावजूद उनकी चुप्पी एक गम्भीर चेतावनी भी है कि धर्मशास्त्र की कसौटी पर सत्य की पहचान और निष्ठा परमेश्वर के कार्य के लिए सर्वोपरि है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:63 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

लैव्यव्यवस्था 5:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 5:1 (HINIRV) »
“यदि कोई साक्षी होकर ऐसा पाप करे कि शपथ खिलाकर पूछने पर भी कि क्या तूने यह सुना अथवा जानता है, और वह बात प्रगट न करे, तो उसको अपने अधर्म का भार उठाना पड़ेगा।

मत्ती 16:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 16:16 (HINIRV) »
शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीविते परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है।”

यशायाह 53:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 53:7 (HINIRV) »
वह सताया गया, तो भी वह सहता रहा और अपना मुँह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय और भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला। (यूह. 1:29, मत्ती 27:12,14, मर. 15:4,5, 1 कुरि. 5:7, पत. 2:23, प्रका. 5:6,12)

मत्ती 26 (HINIRV) Verse Selection

मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें