Old Testament
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मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75



सीधा सार: मत्ती 26:17 का मूल अर्थ
यह पद दर्शाता है कि चौदह-अपराह्न की पूर्व संध्या पर यीशु के चेलों ने फसह दोहराने की तैयारी के बारे में पूछा। अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन चेलों का यह प्रश्न उन व्यवस्थाओं के अनुरूप है जो यहूदियों द्वारा फसह के अवसर पर की जाती थीं; यीशु ने इस अवसर को भविष्य में उनके साथ एक नया संदर्भ दे कर जोड़ा: वह अपना अंतयह होने वाला नाश्ता और अपनी शहादत का स्मरण बनेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
फसह पर्व यहूदियों द्वारा मिस्र से निवृत्ति के स्मरण के लिए मनाया जाता है। उस रात, जब मिस्र से निकासी का निर्णायक घटनाकाल था, परमेश्वर ने यहूदियों के घर में बलिदानपूर्व रात्रि भोज और अख़मीरी रोटी के साथ बलिदान का आयोजन किया। मत्ती 26:17 में चेलों का प्रश्न यह बताता है कि यीशु के समय यह पर्व एक नई व्यवस्था की ओर अग्रसर था—एक ऐसा भोज जो परमेश्वर के Kingdom के भविष्य के आयोजन से जुड़ा था।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- चेलों का वास्तविक प्रश्न मौलिकता के साथ आता है: वे चाहते हैं कि यीशु उनकी सहायता से फसह की तैयारी करें, ताकि वह इसे सही समय पर आयोजन कर सकें।
- यीशु का उत्तर इस बात की पूर्वसूचना है कि फसह के प्रारंभ से वह नया प्रतीक शुरू करेंगे: उसका शरीर और रोटी-जो उनके साथ बाँटी जाएगी—आगे चलकर अनुसरण करने वालों के लिए स्मरणीय होगा कि वह प्रभु का बलिदान है।
一本道िक संकेत और संगत व्याख्या
यहाँ दो प्रमुख आयाम मिलते हैं:
कच्चे निष्कर्ष: 3 छोटी बिंदु
अन्य संबंधित पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंस)
- ल्युप 22:7-20: यीशु उसी रात्रि भोज के संदर्भ में बार बार फसह का आयोजन और नया विधान बताते हैं; यह परिभाषा इतिहास के नवीनतम चरण की ओर इशारा करती है।
- 1 कुरिन्थियों 11:23-26: पवित्र भोज के प्रतीक की व्याख्या और स्मरण का महत्व स्पष्ट किया गया है कि कब कैसे लें।
- मत्ती 26:26-28: यीशु के शरीर-रक्त के प्रतीकों का स्पष्ट ऐलान, जो आगे केलिखित समर्पण को इंगित करता है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
मंगलชัย फसह की पूर्व संध्या पर चेलों का यह प्रश्न इस बात का परिचय देता है कि परमेश्वर का उद्धार-कार्य आने वाला है और उसका गवाह बनने के लिए नई सामूहिकता बननी चाहिए। यह पाठ हमें दिखाता है कि चरम प्रेम और निष्ठा के साथ परमेश्वर के उपहारों को ग्रहण करने की तैयारी जरूरी है।
संदर्भ-नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ परंपरागत विचार संक्षेप में समाहित हैं; समानार्थी अवधारणाओं के लिए उनके विचारों को संक्षिप्त रूप से एकीकृत किया गया है।