मत्ती 26:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?”

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मत्ती 26:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधा सार: मत्ती 26:17 का मूल अर्थ

यह पद दर्शाता है कि चौदह-अपराह्न की पूर्व संध्या पर यीशु के चेलों ने फसह दोहराने की तैयारी के बारे में पूछा। अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन चेलों का यह प्रश्न उन व्यवस्थाओं के अनुरूप है जो यहूदियों द्वारा फसह के अवसर पर की जाती थीं; यीशु ने इस अवसर को भविष्य में उनके साथ एक नया संदर्भ दे कर जोड़ा: वह अपना अंतयह होने वाला नाश्ता और अपनी शहादत का स्मरण बनेंगे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

फसह पर्व यहूदियों द्वारा मिस्र से निवृत्ति के स्मरण के लिए मनाया जाता है। उस रात, जब मिस्र से निकासी का निर्णायक घटनाकाल था, परमेश्वर ने यहूदियों के घर में बलिदानपूर्व रात्रि भोज और अख़मीरी रोटी के साथ बलिदान का आयोजन किया। मत्ती 26:17 में चेलों का प्रश्न यह बताता है कि यीशु के समय यह पर्व एक नई व्यवस्था की ओर अग्रसर था—एक ऐसा भोज जो परमेश्वर के Kingdom के भविष्य के आयोजन से जुड़ा था।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- चेलों का वास्तविक प्रश्न मौलिकता के साथ आता है: वे चाहते हैं कि यीशु उनकी सहायता से फसह की तैयारी करें, ताकि वह इसे सही समय पर आयोजन कर सकें।

- यीशु का उत्तर इस बात की पूर्वसूचना है कि फसह के प्रारंभ से वह नया प्रतीक शुरू करेंगे: उसका शरीर और रोटी-जो उनके साथ बाँटी जाएगी—आगे चलकर अनुसरण करने वालों के लिए स्मरणीय होगा कि वह प्रभु का बलिदान है।

一本道िक संकेत और संगत व्याख्या

यहाँ दो प्रमुख आयाम मिलते हैं:

  • पूर्व-फसह तैयारी का महत्व: तैयारी और संगति से जुड़ा आस्था का गठन।
  • नया प्रतिज्ञान: फसह के रात्रि भोज को यीशु की देह-रक्त के साथ जुड़ना—जो ईसाई पवित्र भोजन (याचन) की आधारशिला बनता है।

कच्चे निष्कर्ष: 3 छोटी बिंदु

  1. क्यों: फसह का पर्व प्राचीन स्मरण है; कैसे? मिस्र से निकलने की कहानी से जुड़ा है।
  2. कैसे: यीशु ने इसे एक नया प्रतीक बना दिया—ब्रेड और भुना हुआ रंगीन आटा नहीं, बल्कि उसकी देह और उसकी पिलाई के साथ जुड़ा भोज।
  3. क्या: यह स्मरण मर्यादा और आशीर्वाद की नई परंपरा से जुड़ा है, जिसे चेलों और भविष्य के विश्वासी निभाते हैं।

अन्य संबंधित पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंस)

- ल्युप 22:7-20: यीशु उसी रात्रि भोज के संदर्भ में बार बार फसह का आयोजन और नया विधान बताते हैं; यह परिभाषा इतिहास के नवीनतम चरण की ओर इशारा करती है।

- 1 कुरिन्थियों 11:23-26: पवित्र भोज के प्रतीक की व्याख्या और स्मरण का महत्व स्पष्ट किया गया है कि कब कैसे लें।

- मत्ती 26:26-28: यीशु के शरीर-रक्त के प्रतीकों का स्पष्ट ऐलान, जो आगे केलिखित समर्पण को इंगित करता है।

प्रायोगिक निष्कर्ष

मंगलชัย फसह की पूर्व संध्या पर चेलों का यह प्रश्न इस बात का परिचय देता है कि परमेश्वर का उद्धार-कार्य आने वाला है और उसका गवाह बनने के लिए नई सामूहिकता बननी चाहिए। यह पाठ हमें दिखाता है कि चरम प्रेम और निष्ठा के साथ परमेश्वर के उपहारों को ग्रहण करने की तैयारी जरूरी है।

संदर्भ-नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ परंपरागत विचार संक्षेप में समाहित हैं; समानार्थी अवधारणाओं के लिए उनके विचारों को संक्षिप्त रूप से एकीकृत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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पहले महीने के चौदहवें दिन की सांझ से लेकर इक्कीसवें दिन की सांझ तक तुम अख़मीरी रोटी खाया करना।

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तब अख़मीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह का मेम्‍ना बलि करना अवश्य था। (निर्ग. 12:3,6,8,14)

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और इस महीने के चौदहवें दिन तक उसे रख छोड़ना, और उस दिन सूर्यास्त के समय इस्राएल की सारी मण्डली के लोग उसे बलि करें।

मत्ती 26 (HINIRV) Verse Selection

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