Old Testament
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मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75



सीधे अर्थ का उद्घोष
मत्ती 26:29 में यीशु बताते हैं कि वह उस दिन तक दाख का रस नहीं पिएँगे जब तक वह और उनके साथ उद्धार के राज्य में पिता के साथ नया रस न पीएँ। इसका सार यह है कि उनके क्रूस तक के कष्ट-यात्रा के बाद ही धार्मिक उत्सवों और विदानों का नया सत्यपूर्ण आनंद पूर्ण रूप से उपलब्ध होगा। यह वाक्य प्रभु की बुलाहट और सिद्धांत के संगति में आने का संकेत देता है कि पवित्र भोज और राज्य के बीच एक क्रमानुसार दूरी है, जो आगे के समय में पूरा होगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना जेमती के अंतिम भोज के समय की है, जब यीशु अपने चेलों के साथ पास्का उत्सव मना रहे थे। वह अपने शिष्यों से कह रहे हैं कि वे उनके साथ पिता के राज्य में नया रस पीएँगे, उन विश्राम और नई व्यवस्था को दर्शाते हैं जो मृत्यु और पुनर्जीवन के बाद शुरू होगी। यह बात भविष्य-प्रोयोजन की है: पृथ्वी पर वर्तमान दावतें अस्थायी हैं, पर आकाशीय राज्य की दावत स्थायी और पूर्ण होगी।
व्याक्य–व्याख्या के मुख्य बिंदु
कथन-निर्णय (Cross-References) और उनके तात्त्विक अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि मसीह का यह कथन एक चेतावनी नहीं, बल्कि आशा और दृढ़ विश्वास का आह्वान है: वर्तमान दावत एक यात्रा है, जो प्रभु के राज्य के आ जाने पर नई दावत में बदल जाएगी।
अनुवाद-नोट्स (महत्वपूर्ण उद्धरण और संदर्भ)
इस पंक्ति का केंद्र-उद्धरण: “नया न पीऊँगा जब तक तुम्हारे साथ अपने पिता के राज्य में नया न पीऊँ।” इस पाठ का भाव यह है कि पवित्र भोज की पूर्णता और उत्सव का गहरा आनंद उस समय शुरू होगा जब ईश्वर के राज्य का पूर्ण स्थापना हो जाएगी।
संक्षिप्त practically takeaway
महत्वपूर्ण उद्धरण (प्रमुख टिप्पणियाँ)
यदि आवश्यक हो, नीचे दी गई तीन सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचार संकलित हैं।
Matthew Henry से एक संक्षेप संकेत: यीशु का यह कहन एक भविष्य की प्रतिष्ठा है जो रक्त-तोड़कर नहीं, बल्कि राज्य की स्थायित्व में पूरी होगी।
Albert Barnes से एक संक्षेप संकेत: यह वचन विश्वास के लिए प्रेरणा है कि आस्था और भोज का एक नया-भविष्यिक अंग एक नए व्यवस्था में मिलेगा।
Adam Clarke से एक संक्षेप संकेत: उद्धार-कार्य के पूर्ण होने पर ही वास्तविक आशीर्वाद का आनंद मिलेगा; यह उम्रभर की प्रतीक्षा का भाग है।
नोट: ऊपर उद्धृत संक्षिप्त विचार सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के संगत सारों पर आधारित हैं; किसी भी पूर्ण टेक्स्ट के उद्धरण शामिल नहीं हैं।