मत्ती 26:74 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब वह कोसने और शपथ खाने लगा, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” और तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी।

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मत्ती 26:74 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे शब्दों में अर्थ

मत्ती 26:74 कहता है कि पतरह ने अपने पीछे पड़े एक अत्यंत भयावह घड़ी मेंदम कहा, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता,” और इसके साथ ही तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी। इसका आशय है कि उसने अपने भीतर अपनी अकड़ और भय की मानसिकता को उजागर किया, जबकि यीशु के विरुद्ध उसकी विश्वसनीयता और सच्चाई की कमी सामने आई।

पश्चाताप-पूर्व संदर्भ

यहVerse प्रेरित-घटना का हिस्सा है जब यीशु गिरफ्तारी के बाद पतरह से आत्म-घोषणा का प्रमाण मांगता है। पतरह ने अपनी चेतना में अनेक बार दृढ़ता से यीशु के साथ रहने का दावा किया था, परन्तु इस पल उसकी भयानक परीक्षा उसे डिगा देती है। मुर्गे की बाँग एक धार्मिक-चेतावनी बनकर आती है, जो यह संकेत देती है कि प्रभु की भविष्यवाणी सच थी और पतरह की मान्यता के भय ने उसे चौंका दिया।

मुख्य interpretive observations

  • टकराव और नास्तिकता के डर में मिथ्या आत्म-विश्वास का उजागर होना: पतरह ने स्वयं को पक्का समर्थक दिखाने का आग्रह किया परन्तु वास्तविक स्थिति के सामने उसकी गवाही ढीली पड़ गई।
  • यीशु के प्रति निष्ठा की परीक्षा: यह घटना यह दिखाती है कि शांति-काल में भी मैदान पर विश्वास-आस्था की गहराई कैसे परखी जाती है।
  • कथन की तीव्रता और उसके परिणाम: “मैं उसे नहीं जानता” कहकर पतरह ने अपने शब्दों से अपनी कड़ी विफलता स्थिर कर दी; परन्तु क्रूस मार्ग के आगमन के साथ भगवान की योजना चलता रहता है।

थीमात्मक सारांश

घबराहट के Moment में व्यक्ति अपने पूर्व-आत्मविश्वास को खो देता है; परन्तु परमेश्वर की योजना मानव त्रुटियों के बावजूद पूरी होती है और उद्धार का मार्ग खुला रहता है।

संलग्न क्रॉस-रेफरेंसेस

लूका 22:60-62— पतरह के सचेतनापन के पल: थामने की कोशिश और मुर्मुखी प्रत्याशा के बीच उसका निश्ते निर्णय।

मरकुस 14:71-72— पतरह के शब्द और मुर्गे की बाँग के साथ उसका पछतावा विस्तृत होता है, जो उद्धार की परंपरा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

यशायाह 53:3— उद्धारकर्ता के संघर्ष का अनुमान: लोगों के चेहरों पर दुःख और अस्वीकृति की अनुभूति, जो व्यक्तिगत स्वार्थपरकता से परे है।

प्रयुक्त दर्शनक निष्कर्ष

इस verse से सीख मिलती है कि कितनी भी बड़ी चिंता और भय हो, सत्य और निर्भीकता के लिए हमेशा आंतरिक सच की झलक चाहिए। यीशु के पास विश्वास और भविष्यवाणी पूरी होने की निश्चितता है, और पतरह की कमी के बावजूद ईश्वर की योजना आगे बढ़ती है।

संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष

  • यथार्थ में विश्वास की परीक्षा से भय उभर सकता है; पर प्रभु पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
  • कठिन समय में भी सच बोलना और आत्म-सम्मान बनाए रखना सीखना चाहिए, फिर भी हम इंसान हैं और कमजोर पड़ जाते हैं।

मैथ्यू हेनरी, अलेबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रसिद्ध विचारों से यह दृश्य प्रेरणा देता है कि दर्द–परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना के अनुरूप अनुभव होता है, और हमारी अस्थिरता के बावजूद प्रभु हमारे साथ हैं। (याद रहे: उनके संकलनों में इस प्रकार के क्षणों के लिए स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हैं।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:74 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं जिन जिनसे प्रेम रखता हूँ, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूँ, इसलिए उत्साही हो, और मन फिरा। (नीति. 3:12)

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हमारा प्रभु आनेवाला है।

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जो शरीर को मार सकते है, पर आत्मा को मार नहीं सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।

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