मत्ती 26:51 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यीशु के साथियों में से एक ने हाथ बढ़ाकर अपनी तलवार खींच ली और महायाजक के दास पर चलाकर उसका कान काट दिया।

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मत्ती 26:51 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 26:51—現स्थिति का संदर्भ और पाठ का संदेश

यह पद पहले शास्त्रों की गिरफ्त से पहले के गहन पल का चित्र देता है: यीशु को पकड़ने आए दूत-समूह के बीच उसका एक शिष्य तलवार लेकर उठ खड़ा होता है और महायाजक के दास पर हमला कर देता है। यह क्षण, जहाँ क्षणिक उन्मत्त प्रतिशोध और क्रोध का प्रदर्शन होता है, ईश्वर के शास्त्र में एक बड़ी शिक्षा को उभारता है—कि यीशु की योजना मानव-स्वार्थ के उन्माद के बावजूद परमेश्वर की योजना के अनुसार चलती है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या संकेत मिलते हैं

यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर के राज्य के लिए संघर्ष सुलह और विनम्रता की राह से ही आगे बढ़ता है, न कि हिंसा से। यीशु का निर्वात-आचरण और उसे गिरफ्तार करने वाले लोगों के बीच की दूरी, विश्वास की परख है कि प्रभु अपने उद्देश्य के अनुसार काम करते हैं और समर्थन देते हैं—परन्तु मानव प्रतिक्रिया कितनी भिन्न हो सकती है।

शब्दों और चित्री चित्रण की स्पष्टता

“तलवार खींच ली” और “कान काट दिया” जैसे दृश्य हिंसात्मक आवेग को दिखाते हैं जो उस क्षण के तनाव को व्यक्त करते हैं। किन्तु यह भी संकेत देता है कि यीशु के शत्रु कितने भद्दे कदम उठाते हैं, फिर भी वह अपने उद्देश्य से विचलित नहीं होता।

संबंधित बाइबल पाठ

  • यूहन्‍ना 18:10—पेत्रुस का तलवार उठाना: यह भी मानव तल्लीनता और गलत कल्पनाओं का परिणाम है, जो उस समय के पासे में आता है।
  • मत्ती 26:53—यीशु का शब्द: “यदि मैं प्रार्थना करूँ तो मेरे पिता मेरे लिए बारह सेना भेज देगा”—धैर्य और दया के महत्व को स्मरण दिलाता है।
  • याकूब 1:20—क्रोध की अधीनता परमेश्वर के न्याय के विरुद्ध होती है: निष्कर्ष पर विचार करते हुए इस घटना से सीख मिलती है कि विपत्ति और हिंसा के रास्ते से उद्धार नहीं होता।

आज के समय में क्या सीखें

1) हिंसा से नहीं, शक्तिबोध और सच को सच्चाई से पहचानना। 2) यीशु के उदाहरण पर चलना—धैर्य, नम्रता और परमेश्वर के उद्देश्य के प्रति समर्पण। 3) परिस्थिति चाहे कितनी भी तनावपूर्ण क्यों न हो, हमारे क्रोध के क्षणों में भी हम प्रभु की योजना पर भरोसा रखें।

यूद्ध-संदेश का एकीकृत समरी

यह घटना दिखाती है कि ईश्वर की योजना मानव क्षोभ के खिलाफ भी अग्रसर रहती है, और यीशु अपने मिशन के प्रति अडिग रहते हैं। एतिहासिक संघर्ष के बीच भी सत्य, दया और विनम्रता का प्रतिफल अधिक मूल्यवान है।

क्रॉस-रेफरेंस का छोटा सा स्पर्श

यूहन्‍ना 18:10; मत्ती 26:53; जेम्स 1:20 — इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि क्रोध और हिंसा ईश्वर के मार्ग से विपरीत हैं और विश्वासियों के लिए शिक्षण का आयाम खुलता है कि कैसे प्रभु के अनुसार जीना और कठिन परीक्षाओं में विनय बनाए रखना चाहिए।

टिप्पणी नोट: केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डॉमेन उद्धरणों से आवश्यक शब्द-उद्धरण उपलब्ध होने पर ही संकेतित उद्धरणों का उल्लेख किया गया है। इस पाठ में इन उल्लेखों के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, ताकि मूल पाठ्यक्रम के अनुरूप संपूर्ण पाठ समाहित रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:51 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मरकुस 14:47 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 14:47 (HINIRV) »
उनमें से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींचकर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया।

यूहन्ना 18:36 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यूहन्ना 18:36 (HINIRV) »
यीशु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहाँ का नहीं।”

2 कुरिन्थियों 10:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 कुरिन्थियों 10:4 (HINIRV) »
क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्‍वर के द्वारा सामर्थी हैं।

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