Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 26:19 का तत्कालीन संदर्भ और टिप्पणी
यूहना-यात्रा के अंतिम दिनों में यीशु ने अपने चेलों के साथ पवित्र प्रोत्साहन से यह पवित्र उत्सव निभाने की तैयारी की—फसह के समय ईश्वर के उद्धारकार्य के प्रतीक के अनुसार। “अतः चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी, और फसह तैयार किया” (मत्ती 26:19) कहे जाते ही उनके भीतर एक महत्वपूर्ण विश्वास-क्रिया उभरकर सामने आती है: परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार चलना, भले ही बात कुछ कठिन हो। इस छोटे वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि यीशु अपने आप के प्रति और उनके मार्ग के प्रति चेलाओं की अपार आस्था और संकल्प चाहते थे; वे जानते थे कि फसह का चिह्न शास्त्र के अनुसार एक नई व्यवस्था का प्रवेश है, जो उनकी मृत्यु और पुनर्जीवन के साथ पूर्ण होगा।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बताता है
यह वाक्य दर्शाता है कि ईश्वर की योजना न केवल अतीत के उद्धारक घटनाओं से जमी है, बल्कि वर्तमान में उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलना भी उतना ही महत्व रखता है। चेलों ने यीशु की बात मानकर एक समुदाय-आत्मा से फसह की तैयारी की, जो विश्वास की सामुदायिक एकता को दर्शाती है। यह एक ऐसी आस्था है जो निर्देश के सामने नतमस्तक होती है और दायित्वों को निभाने में साहस दिखाती है, भले ही बाद में परिस्थितियाँ विरोध कर रहीं हों।
शब्दों और प्रतीकों की स्पष्टता
फसह का त्योहार यहूदियों के लिए मिस्र से निकलने की याद है—बलिदान और उद्धार का प्रतीक। यहाँ यीशु के साथ होने वाला फसह-प्रयोग नई आत्मिक बचाव की राह का संकेत है, जहां उसने स्वयं को “अनुभव-घटना” के रूप में प्रस्तुत किया है। यह चेलों के लिए एक औचित्य-आधारित जवाब है: वे यीशु की आज्ञा मानकर, उनकी मृत्यु से पूर्व के भी संदेशों को सच मानते हैं और उसे वह कुरानिक-परंपरा के अनुरूप मानते हैं।
संबंधित पाठ
इन संदर्भों में फसह की तैयारी का उद्देश्य यह बताता है कि ईश्वर की योजना मानव इतिहास के अंत तक समान धारा में प्रवाहित है—आत्म-समर्पण से उद्धार की दिशा।
आज के जीवन में toepassing (अनुप्रयोग)
उद्धरण से मूल्यवान संकेत (मध्य-पूर्व पाठों के संयोग से)
डायरी-उद्धरणों के आधार पर, प्रति-विश्वास स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी, और फसह तैयार किया—यह उनके विश्वास की प्रतिज्ञा और समुदाय की भागीदारी को सशक्त बनाता है।