Old Testament
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मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75



पाठ का सार और संदर्भ
मत्ती के Gospel के इस हिस्से में यीशु पहले से अपने विश्वासयोग्यों के दिल में आने वाले परीक्षण के बारे में बात कर रहे हैं। यहां 26 अध्याय में जब यीशु गढ़े जा रहे हैं और पास्का की तैयारी हो रही है, पतरस अपने अपने विश्वास के बारे में बोल उठता है कि अगर सब उनके विषय पर ठोकर खाएं, तो वह कभी ठोकर नहीं खाएगा। यह कथन मानवीय आत्मविश्वास की सीमा को उजागर करता है और साथ ही सच्चे विश्वास की आवश्यकता पर केंद्रित हो जाता है।
पाठ का प्रस्तुतिकरण (मत्ती 26:33)
इस पर पतरस ने उससे कहा, “यदि सब तेरे विषय में ठोकर खाएँ तो खाएँ, परन्तु मैं कभी भी ठोकर न खाऊँगा।”
मुख्य अध्याय में चेतना और संदेश
यह वाक्य पतरस की ईमानदार परन्तु उन्मुखी आत्म-विश्वास की झलक दिखाता है—वह अपने मित्रों के साथ के साथ अपने ध्रुव सत्य को मानता है कि वह त्रुटिहीन है। परन्तु यीशु की उत्तरदायित्वपूर्ण शिक्षाओं के साथ यह उद्घोष एक चेतावनी भी बन जाता है कि भले ही साथी विश्वसनीय प्रतीत हों, संघर्ष और परीक्षा हर किसी के ऊपर आ सकता है।
महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल संदर्भों के साथ तुलना
1) लूका 22:31-34 में यीशु शिष्य पतरस को बतलाते हैं कि वह विश्वास पर नहीं, बल्कि उसकी सच्चाई और दया पर निर्भर रहें।
2) मरकुस 14:29-31 में पतरस कहता है कि वह यीशु के साथ नहीं बदलेगा, किन्तु यीशु भविष्यवाणी करते हैं कि पतरस तीन बार बेटा-सा इसराइल के साथ अलग हो जाएगा।
3) यूहन्न 13:37-38 में यीशु पतरस की तीन बार निष्ठा का परीक्षण दिखाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
हममें से प्रत्येक के भीतर कभी-कभी आत्मविश्वास का प्रवाह आता है—परिश्रम, दृढ़ता और वादा। किन्तु वास्तविक परीक्षा तब आती है जब परिस्थितियाँ विपरीत हों या संकट गहरा हो। ऐसे क्षणों में हमें ठोस विश्वास के साथ प्रभु में टिके रहना चाहिए, और हर ठेस पर यीशु की मल्हार की याद रखना चाहिए कि वह हमारे साथ है और हमें गिरने नहीं देगा।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त व्याख्या
फरमान-उद्धार के लिए तीन संकेतन: लूका 22:31-34—पतरस को चेतावनी और क्षमा; मरकुस 14:29-31—पतरस की अपनी दृढ़ता और भविष्य की कमी; यूहन्ना 13:37-38—यीशु की परीक्षा और पतरस की तीन बार असफलता। ये घटनाक्रम समर्पण, विश्वास, और क्षमा के शास्त्र को एक साथ जोड़ते हैं।
संक्षेप
पतरस का कथन एक प्रेरक चेतावनी है कि ईश्वर पर पूर्ण निर्भरता और नैतिक साहस सहित चलना चाहिए, क्योंकि वास्तविक विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि परीक्षा-के-समय ढाल बनकर सामने आता है।
संक्षिप्त स्रोत संदर्भ (उद्धरण के लिए केवल संकेत)
यह संदर्भ पंक्तियों का सार प्रस्तुत करता है; Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक टिप्पणी-टुकड़े के छोटे संदर्भ आवश्यकतानुसार उद्धृत किए जा सकते हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं।