मत्ती 26:61 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और कहा, “इसने कहा कि मैं परमेश्‍वर के मन्दिर को ढा सकता हूँ और उसे तीन दिन में बना सकता हूँ।”

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मत्ती 26:61 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 26:61 पर टिप्पणी: “इसने कहा कि मैं परमेश्वर के मन्दिर को ढा सकता हूँ और उसे तीन दिन में बना सकता हूँ।”

इस वाक्य का संदर्भ वह समय है जब यीशु के विरोधी उसे परेशान कर रहे थे और वे एक ऐसे प्रमाण की मांग कर रहे थे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यीशु कौन है। उन्होंने Jesus से कहा कि उसने परमेश्वर के मन्दिर (यही यहूदी मंदिर) को ढहा देने और तीन दिनों में उसे फिर से बनाने की बात कही थी—पर यहाँ उनका उद्धारार्थक आरोप यह था कि Jesus परमेश्वर के कितने विरुद्ध प्रतिमा-तत्व होने का दावा करते थे। यह उद्धरण उनके मनसिक प्रयासों और धार्मिक धारणाओं के संघर्ष को उजागर करता है: वे मंदिर को नष्ट और पुनः निर्माण से Jesus के दावे की जाँच करना चाहते थे, जबकि यीशु का मतलब गूढ़ था कि मंदिर से उनका संदर्भ मृत्यु और पुनर्जीवन से है।

केंद्रीय अर्थ

यीशु इस अवसर पर अपने शारीरिक मंदिर—उनके शरीर—के बारे में संकेत दे रहे थे और उनके विश्वास के अनुसार, उनका उद्धार एक दिव्य पुनःस्थापना का संकेतक होगा। इस कथन में शास्त्रीय विरोधाभास नहीं, बल्कि अर्थ का गहरा परिवर्तन है: मंदिर को ढाहना संभव था, पर उसके स्थान पर नया जीवन उसी तारतम्य में उभर सकता था—यानी यीशु अपने मुरझाये हुए धर्म के बीच नया विश्वास और उद्धार लेकर आ रहे थे।

मुख्य थेम्स

  • प्रतीकात्मक उद्धार: मंदिर की बात से Jesus का संकेत उनके शरीर और उनके मरने-जी उठने पर है; वह संकेत जो बाद में उनके पुनःजी उठने के द्वारा स्पष्ट होगा।
  • विश्वास बनाम कठोरता: विरोधी लोग बाहरी ढाँचों को देखकर सत्यता को परखना चाहते थे, जबकि ईश्वर की योजना भीतर की परिवर्तनकारी शक्ति पर टिकती है।
  • तीन दिन का समय-चिह्न: यह समय-चिह्न मसीही पुनर्जीवन की आशा को दर्शाता है—हत्या के बाद भी जीवन की संभावना और परमेश्वर की योजना की महत्ता।

अन्य संदर्भ

यहाँ कुछ cross-references हैं जो इस विचार को स्पष्ट करते हैं:

  • यूहन्ना 2:19—यीशु ने अपने शरीर के संदर्भ में कहा कि “तीन दिन में मैं उसे उठाऊँगा”।
  • मरकुस 14:58—“हम इस मंदिर को तोड़ देंगे”—वे मंदिर को नष्ट करने के बारे में कथन करते हैं, पर Jesus का उत्तर उसी भविष्यसूचक सत्ता पर केन्द्रित है।
  • मत्ती 27:63-64—यीशु के मरने के पश्चात उनके अनुयायियों ने क्यों-क्यों उन्हें पुनर्जीवित करने का संकेत समझा, यह बताता है कि यह संकेत किरदार के पुनःजीवन की तरह है।

नोट: ऊपर के संदर्भ पूर्ण टेक्स्ट के उद्धरण नहीं देते, परन्तु इन संदर्भों में वही सिद्धांत है जो इस verse के अर्थ को स्पष्ट बनाते हैं।

व्यावहारिक विचार

हमारा जीवन कब, कहाँ और कैसे परिवर्तन के लिए तैयार रहता है? यह पद हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना किसी बाहरी ढांचे पर नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के आंतरिक परिवर्तन और नई जीवनप्राप्ति पर केंद्रित है। कठिनाइयों के बीच भी विश्वास जीवित रहता है जब हम यीशु के पुनर्जीवन के आश्वासन पर टिके रहते हैं।

संक्षिप्त समापन

यह वचन धर्म-आडंबर के साथ नहीं, बल्कि जीवित विश्वास के प्रति एक उद्घोषणा है: मसीह का संदेश मृत्यु पर जय और पुनर्जागरण का प्रतीक है। मंदिर के ढहाने की बात एक दिव्य योजना के भीतर सचेत संकेत है—जो यीशु के जीवन, मरन और पुनर्जीवन से स्पष्ट होता है।


कहानी और अर्थ को गहराई से समझने के लिए अन्य सार्थक पंक्तियाँ: यीशु के शरीर को मंदिर के रूप में देखना; प्रभु की शक्ति का पुनर्निर्माण का संकेत; और विश्वास की वास्तविक परीक्षा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:61 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यह कहते थे, “हे मन्दिर के ढानेवाले और तीन दिन में बनानेवाले, अपने आप को तो बचा! यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ।”

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यीशु ने उनको उत्तर दिया, “इस मन्दिर को ढा दो, और मैं इसे तीन दिन में खड़ा कर दूँगा।”

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यशायाह 53:3 (HINIRV) »
वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दुःखी पुरुष था, रोग से उसकी जान-पहचान थी; और लोग उससे मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हमने उसका मूल्य न जाना। (मर. 9:12)

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