Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75



मत्ति 26:69 — पतरस से दासी का प्रहारित सवाल
इस पदकथन का मूलार्थ है: पतरस कई बार यीशु के प्रति अपने जीवंत परख और दबाव के बीच से निकल नहीं पाता; दासी के प्रहार ने उसे भीड़ में पड़ाव कर दिया और वह अपनी चुप्पी तोड़ देता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूहन्नी स्मारकों के अनुसार इस समय यीशु कोरियों में दोषारोपण के Await करते हैं; परन्तु पतरस बाहर आँगन में रहा—जहाँ कीर्तन, अपराध और डर का माहौल बना रहता है। दासी का सवाल उसके घूंघट के भीतर के भय को उजागर कर देता है: “तू भी यीशु गलीली के साथ था।” यह दासी न सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं, बल्कि समाज के दबाव और डर को दर्शाती है, जिसमें भोज-समाज के भीतर एक नायक-परिचय के गिरते हुए पलों को देखा जाता है। पतरस की प्रतिक्रिया भी समुदाय-मान–सम्मान के दर्जे के दबाव से प्रेरित होती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
कथन के साथ 2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस
- मरकुस 14:66–72: पतरस की बार-बार अस्वीकार की घटनाओं के साथ समानता दिखती है; यहाँ प्रदर्शन वह है कि विश्वास कैसे त्रुटियों से गुजरकर पुनः दृढ़ होता है।
- योहान 18:25–27: किरदार-चयन और पहचान की परीक्षा; पतरस के सामने पहली असफलता के बाद भी प्रभु के साथ पुनः जुड़ने की संभावना बनी रहती है।
- प्रकाशितवाक्य 3:19: प्रेम और सुधार का संदेश—कठोर परन्तु सशक्त तरीके से चेतावनी का उद्देश्य व्यक्ति को फिर से राह पर लाना है।
उद्धरणीय पंक्तियाँ (public-domain commentators के संकेत सहित)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों से संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो उनके विचार मानक व्याख्या में इस प्रकार मिलते हैं: Henry के अनुसार पतरस की असहाय स्थिति में विशेष रूप से प्रभु के प्रति सहानुभूति और क्रोध-नापसंद का सामंजस्य देखना चाहिए; Barnes यह दर्शाते हैं कि चुप्पी का टूटना उस पल का प्राकृतिक परिणाम था जिसमें व्यक्ति अपनी आत्म-रक्षा के लिए असफल होता है; Clarke कहते हैं कि यह घटनाक्रम पतरस के दृढ़ विश्वास के निर्माण की शुरुआत है और उसे पुनः सच्चाई की राह दिखाता है।
इनमें से केवल संक्षिप्त संकेतों का उद्धरणात्मक उल्लेख किया गया है, पूर्ण पंक्तियाँ यहाँ नहीं दी जा रहीं।
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
प्रयोगात्मक सार
पतरस का यह अनुभव आज भी हमें याद दिलाता है कि कठिन समय में भी हमारी आवाज और आचरण ईश्वर के कथन के अनुरूप रहने चाहिए। भय के समय में भी विश्वास को बनाए रखना, और गलती परतिपादन की दिशा में ईश्वर के साथ लौटना ही जीवन-जगत का मार्ग है। यह घटना केवल एक त्रुटि नहीं, बल्कि सुधार की ओर बढ़ने का आरम्भ है।