मत्ती 26:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने कहा, “हे रब्बी, क्या वह मैं हूँ?” उसने उससे कहा, “तू कह चुका।”

पिछला पद
« मत्ती 26:24
अगला पद
मत्ती 26:26 »

मत्ती 26:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यही अर्थ है: जब यहूदियों से बंधी हुई चाल में यहूदा के वक्तव्य को देखते हैं, वह यह कह रहा है कि उसने अपने चुने हुए संदेश को स्वीकार कर लिया है; परन्तु वह यह भी दिखाता है कि उसकी श्रद्धा में कमी है और वह बड़े प्रश्न से बचना चाहता है।

पद का सीधे शब्दार्थ अर्थ इस वचन में यहूदावाले अपने पकड़ने के क्रम में आते हैं और यह पूछते हैं कि क्या वह मैं हूँ? यीशु ने उत्तर दिया, “तू कह चुका।” इसका तात्पर्य है कि यहूदा ने स्वयं स्वीकार कर लिया कि वह वही है जिसे वे पकड़ना चाहते हैं; परंतु इसका भाव यह भी है कि उसकी आत्म-निर्णय की स्थिति अस्पष्ट है—उसने सच में किन्हीं गहराई से विचार किए बिना यह निर्णय लिया था।

पृष्ठभूमि और संदर्भ मत्ती 26 में यीशु काbetrayal का परिदृश्य है। गरज यहूदावाले चारों ओर से आते हैं ताकि यीशु को बंदी बना सकें; उनमें से एक यहूदावाल थे जिन्होंने उसे धोखा दिया। यहूदा का यह संदेहजनक प्रश्न और यीशु का हल्का सा पक्षाघातपूर्वक उत्तर गहरी नैतिकता की ओर इशारा करता है कि स्व-प्रकाशन और साक्षात्कार के बीच अंतर है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • यहूदावाल का प्रश्न—उसकी आत्म-तैयारी के अभाव का संकेत: वह यह जानना चाहता है कि उसने अपना भाग्य किस तरह चुना है, जबकि वास्तव में उसकी योजनाएँ शैतान के प्रभाव में थीं।
  • यीशु का उत्तर—“तू कह चुका” यह संकेत देता है कि वह अपने दुष्कर्म के बारे में स्पष्ट है, परन्तु उद्धार के लक्ष्य के प्रकाश में यह कहना आवश्यक है कि स्वतंत्र निर्णय की स्थिति में भी परमेश्वर की योजना पूरी होती है।
  • आत्मिक प्रेरणा—जो यहूदावाले के भीतर अपने स्वार्थ के लिए धोखा देता है, वह अंततः अपने आप को जिम्मेदारी से भागने का प्रयास करता है; इसका संदेश यह है कि चतुराई से किया गया धोखा भी परमेश्वर के ज्ञान से बच नहीं सकता।

छोटी थीम सूची

अन्य संदर्भ और संक्षिप्त अर्थ

कर्म-योग्यता को उजागर करते हुए इन अन्य उद्धरणों से संकेत मिलता है कि धोखा देने वाले व्यक्ति की आत्म-स्वीकृति क्यों महत्वपूर्ण है; यहूदा का यह सवाल दिखाता है कि उसने अपने हिस्से को “मैं हूँ?” के रूप में सत्यापित किया, जबकि उसकी मंशा शंकित और भ्रष्ट है।

संवाद-आख्यान और व्यावहारिक निष्कर्ष

इस वचन से सीखा जा सकता है कि धोखे के अंदर भी सत्य का एक संकेत रहते हैं, परन्तु यह भी स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत निर्णयों के परिणाम परमेश्वर की दृष्टि से नीयतों के साथ जुड़े रहते हैं। यदि हम यह देखना सीखें कि हमारे मन में कौन-सी प्रेरणाएँं काम कर रही हैं, तो हम धोखे से बच सकते हैं और ईमानदारी से परमेश्वर के सामने सच रहकर चल सकते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप)

1) प्रेरित पथ—यहूदा का धोखा और उसकी आत्म-स्वीकृति की प्रकृति से मिलती-जुलती परिस्थितियाँ अन्य गवाहियों में मिलती हैं, जहाँ स्व-चिन्हित इरादे सच का सामना करते हैं।

2) पौलुस के लेखन—स्व-निर्णय और पापकर्म के बीच संतुलन दिखाते हैं कि परमेश्वर की योजना कैसे चालित होती है और मनुष्यों के कर्म उनके भाग्य को प्रभावित करते हैं।

3) ईश-प्रकटन—यद्यपि धूर्तता से भरे कदम उठते हैं, पर परमेश्वर की योजना से इनका अंत नहीं निकल सकता; वह न्याय और दया दोनों से काम लेता है।

संक्षिप्त सीख— दूसरों के धोखे के बावजूद अपने आत्मसमर्पण और सच्चाई के प्रति ईमानदार रहें; परमेश्वर की योजना में विश्वास रखें और अपने प्रेरणाओं की परख करें ताकि हम सत्य के मार्ग से न हिलें।

नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियाँ के छोटे-चिह्न उद्धरणांश नीचे नहीं दिए गए हैं ताकि मूल तर्क स्पष्ट रहें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मत्ती 26:64 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 26:64 (HINIRV) »
यीशु ने उससे कहा, “तूने आप ही कह दिया; वरन् मैं तुम से यह भी कहता हूँ, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।”

मत्ती 27:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 27:11 (HINIRV) »
जब यीशु राज्यपाल के सामने खड़ा था, तो राज्यपाल ने उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने उससे कहा, “तू आप ही कह रहा है।”

2 राजाओं 5:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 5:25 (HINIRV) »
और वह भीतर जाकर, अपने स्वामी के सामने खड़ा हुआ। एलीशा ने उससे पूछा, “हे गेहजी तू कहाँ से आता है?” उसने कहा, “तेरा दास तो कहीं नहीं गया।”

मत्ती 26 (HINIRV) Verse Selection

मत्ती 26:1 मत्ती 26:2 मत्ती 26:3 मत्ती 26:4 मत्ती 26:5 मत्ती 26:6 मत्ती 26:7 मत्ती 26:8 मत्ती 26:9 मत्ती 26:10 मत्ती 26:11 मत्ती 26:12 मत्ती 26:13 मत्ती 26:14 मत्ती 26:15 मत्ती 26:16 मत्ती 26:17 मत्ती 26:18 मत्ती 26:19 मत्ती 26:20 मत्ती 26:21 मत्ती 26:22 मत्ती 26:23 मत्ती 26:24 मत्ती 26:25 मत्ती 26:26 मत्ती 26:27 मत्ती 26:28 मत्ती 26:29 मत्ती 26:30 मत्ती 26:31 मत्ती 26:32 मत्ती 26:33 मत्ती 26:34 मत्ती 26:35 मत्ती 26:36 मत्ती 26:37 मत्ती 26:38 मत्ती 26:39 मत्ती 26:40 मत्ती 26:41 मत्ती 26:42 मत्ती 26:43 मत्ती 26:44 मत्ती 26:45 मत्ती 26:46 मत्ती 26:47 मत्ती 26:48 मत्ती 26:49 मत्ती 26:50 मत्ती 26:51 मत्ती 26:52 मत्ती 26:53 मत्ती 26:54 मत्ती 26:55 मत्ती 26:56 मत्ती 26:57 मत्ती 26:58 मत्ती 26:59 मत्ती 26:60 मत्ती 26:61 मत्ती 26:62 मत्ती 26:63 मत्ती 26:64 मत्ती 26:65 मत्ती 26:66 मत्ती 26:67 मत्ती 26:68 मत्ती 26:69 मत्ती 26:70 मत्ती 26:71 मत्ती 26:72 मत्ती 26:73 मत्ती 26:74 मत्ती 26:75

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें