मत्ती 26:60 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। अन्त में दो जन आए,

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मत्ती 26:60 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधा सार

मत्ती 26:60 में कहा गया है कि अदालत में बहरे-झूठे गवाहों के बीच भी सत्य नहीं मिला; अंत में दो गवाह आए जो सच बताने में सक्षम थे। इस वाक्य का मूल आशय यह है कि मानव सहयोग से सत्य की खोज कभी-कभी देर से पूरी होती है, पर ईश्वरीय न्याय होता है और सत्य अंततः प्रकाश में आता है।

संदर्भ संरचना

यह पंक्ति ख्रिस्ती दंड-समारोह के समय की है जब यीशु पर आरोप लगते हैं और उसके विरुद्ध गवाह खड़े किए जाते हैं। अय्यूब-न्याय व्यवस्था के अनुरूप, कई झूठे गवाह बुलाए जाते हैं ताकि सत्य ढँके रहें, पर अंततः दो सत्यवान गवाह सामने आते हैं और भगवान के न्याय के द्वारा सत्य उभरता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • झूठे गवाहों की अस्थिरता: अधिकतर कारणों से एक ही घटना के बारे में कई गवाही उस समय भी असंगत हो सकती है, जो मानव कठोरता और अधर्म को दर्शाती है।
  • धैर्य और परमेश्वर की योजना: न्याय पाने के लिए लोग समय मांगते हैं; लेकिन परमेश्वर की योजना में सत्य अंततः प्रकाशित होता है, भले ही वह तुरंत दिखाई न दे।
  • सत्य का प्रमाण: दो गवाह मिलने से शासन-न्याय में स्पष्टता और सार्वजनिक स्वीकार्यता मिलती है, जो रस्मीता से अधिक विश्वसनीयता बनाती है।

थीमेटिक सूची

  1. झूठी गवाही से न्याय में अवरोध
  2. समय पर सत्य का प्रकाश होना
  3. कानूनी प्रक्रिया में परिशुद्धता और प्रमाणता

अनुसार पाठ निष्कर्ष (Cross-references with brief explanations)

यहोशू 2:1– एक ऐसी स्थिति जिसमें कई तथ्य छिपे रहते हैं; सत्य को खोजने की कड़ी मेहनत आवश्यक है।

लीवियादा 19:15– निष्पक्ष और सत्यनिष्ठ न्याय का मूल्य; गवाही की सत्यता पर बल दिया गया है।

प्रकाशित वचन 12:12– सत्य की खोज और प्रकाशन के लिए आशीर्वाद; सच के प्रकाश से अंधेरा दूर होता है।

आवश्यक शब्दार्थ संकेत

यहां “झूठे गवाह” से अभिप्राय वह लोग हैं जोhyr सत्य को दबाने या विकृत करने हेतु झूठा पक्ष रखते हैं। “द्वि गवाह” से संकेत मिलता है कि सत्य के समर्थन के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हो सकता है, भले ही पहली कोशिशों में वह नहीं दिखा हो।

सारिष्ठ निष्कर्ष

इस अध्याय-क्षण से हमें यह सिख मिलती है कि कानून-न्याय की प्रक्रिया में धैर्य बनाकर रखना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर का न्याय समय पर और पूरी सत्यता के साथ सामने आता है। चाहे शुरुआत में आवाज़ें भरे-भरे और उलझी क्यों न लगें, अंततः सत्य का पक्ष विजयी होता है।

पूर्वव्याख्यात्मक उद्धरण (उपन्यासिक संकेत): एंटनी बेर्ने और जेरियम कैंप के टिप्पणियां इस तथ्य को समाहित करते हैं कि मानवीय गवाही की सीमाएं हैं और परमेश्वर के सत्य की रोशनी सबसे अंत में प्रकाशमान होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 26:60 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“किसी मनुष्य के विरुद्ध किसी प्रकार के अधर्म या पाप के विषय में, चाहे उसका पाप कैसा ही क्यों न हो, एक ही जन की साक्षी न सुनना, परन्तु दो या तीन साक्षियों के कहने से बात पक्की ठहरे। (मत्ती 18:16)

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मुझ को मेरे सतानेवालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं* मेरे विरुद्ध उठे हैं।

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अधर्मी साक्षी खड़े होते हैं; वे मुझ पर झूठा आरोप लगाते हैं।

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