Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 6:22 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 6:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे अख़मीरी रोटी का पर्व सात दिन तक आनन्द के साथ मनाते रहे; क्योंकि यहोवा ने उन्हें आनन्दित किया था, और अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर ऐसा फेर दिया कि वह परमेश्वर अर्थात् इस्राएल के परमेश्वर के भवन के काम में उनकी सहायता करे।
एज्रा 6:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 6:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

एज्रा 1:1 (HINIRV) »
फारस के राजा कुस्रू के राज्य के पहले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:

नीतिवचन 21:1 (HINIRV) »
राजा का मन जल की धाराओं के समान यहोवा के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उसको मोड़ देता है।

2 इतिहास 30:21 (HINIRV) »
जो इस्राएली यरूशलेम में उपस्थित थे, वे सात दिन तक अख़मीरी रोटी का पर्व बड़े आनन्द से मनाते रहे; और प्रतिदिन लेवीय और याजक ऊँचे शब्द के बाजे यहोवा के लिये बजाकर यहोवा की स्तुति करते रहे।
एज्रा 6:22 पर नज़र: सुख-उत्सव और ईश्वर की कृपा
इस आयत में यरूशलम के मंदिर के पुनर्निर्माण के समय लोग अख़मीरी रोटी के पर्व का आनंद मनाते हैं। यह दृश्य इस बात की पुष्टि करता है कि परमेश्वर की सहायता से ही धार्मिक पुनर्स्थापना संभव होती है और विदेशी दमन के बावजूद वह उनके बीच आनंद का संदेश फैलाते हैं। यह verse यह दिखाता है कि परमेश्वर के स्थान के पुनर्निर्माण में सुख और प्रसन्नता एक साथ चलते हैं, जब लोग अपनी बतौर ईश्वर के जन अनुशासन और आस्था को बनाए रखते हैं।
वचन पर सरल दृश्य-समझ
वे अख़मीरी रोटी का पर्व सात दिन तक आनन्द के साथ मनाते रहे; क्योंकि यहोवा ने उन्हें आनन्दित किया था, और अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर ऐसा फेर दिया कि वह परमेश्वर अर्थात् इस्राएल के परमेश्वर के भवन के काम में उनकी सहायता करे।
क chapter के भीतर विचार
एज्रा के अध्याय 6 में विध्वंस के बाद यरूशलम के मंदिर के पुनर्निर्माण का विवरण चलता है। सात-दिन का उपवास नहीं, बल्कि आनंदपूर्वक उत्सव का समय है—एक संकेत कि जब ईश्वर की सहायता होती है, तब दमनकारी शक्तियाँ भी धीरे-धीरे ढीली पड़ जाती हैं और लोग परमेश्वर के भवन निर्माण में भागीदारी करते हैं। अख़मीरी रोटी का पर्व यह दर्शाता है कि प्रचलित रीति-रिवाजों के साथ नई धार्मिक अनुभूति बनती है, और यहसंदेश देता है कि परमेश्वर के स्मरण और निष्ठा के साथ जीवन में खुशहाली आती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- ईश्वर की दया से संकट के बीच भी आनंद संभव है, जब हमारा विश्वास उसकी योजना के अनुसार रहता है।
- सत्ता और दबाव के बीच भी परमेश्वर के भवन के प्रति समुदाय की एकता महत्वपूर्ण है; राजा का वरदहस्त उनके लिए प्रेरक बना।
अनुभवजनक विचार: अन्य पूरे बाइबल से सम्बंध
Cross-reference 1: पतरस 1:6-7 में दुख के बीच भी आनंद की आशा की बात आती है, जो परीक्षा-समय में विश्वास का प्रमाण बनती है। यह दर्शाता है कि समुदाय की कसौटियाँ भी आत्म-विश्लेषण और ईश्वर-भरोसे को मजबूत बनाती हैं।
Cross-reference 2: नीतिवचन 16:9 में मनुष्य के विचार तय करते हैं कि उसका मार्ग कैसे चले, परन्तु नीचे से ऊपर ईश्वर का उद्देश्य निर्धारित होता है। यह आयत स्पष्ट करती है कि राजा-प्रभुयुग में भी परमेश्वर की योजना पहले है।
Cross-reference 3: हबकम 3:17-18, जिसमें आत्मिक स्थिरता और प्रसन्नता ईश्वर में रहने की प्रेरणा बताती है—यही विचार यहाँ के उत्सव के पीछे प्रेरक है।
मुख्य पाठ से व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
एज्रा 6:22 इस बात को पुष्ट करता है कि परमेश्वर समुदाय को आनंदित करता है जब वे उसकी भवन-कार्य में एकजुट रहते हैं। राजा का मन परिवर्तन एक दिव्य प्रेरणा है, जो यह दर्शाती है कि भयावह परिस्थितियाँ भी ईश्वर के उद्देश्य को आगे बढ़ाती हैं।
पूर्व-उद्धरण नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के समानुपात में नीचे उल्लेख किया गया है—
Matthew Henry के सार विचार: “जहाँ परमेश्वर का आशीर्वाद हो, वहाँ उनके लोग प्रसन्न रहते हैं; चाहे बाहरी दबाव हो या नकारात्मक प्रभाव।” उद्धरण संकेत — पाठ के दौरान प्रयोग में लिया गया टिप्पणी-स्तर।
Albert Barnes का संक्षेप: “ईश्वर द्वारा दी गई आनंद की अनुभूति, दमन के बावजूद भी, स्मारक के रूप में मंदिर-कार्य में स्पष्ट रूप से प्रकट होती है।”
Adam Clarke का संक्षेप: “राजा का मन परिवर्तन और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच भी समुदाय की एकता और पवित्र सेवा स्थिर रहती है।”
यह संक्षेप सक्रिय विचार देता है कि दमन के समय भी परमेश्वर के घर के लिए आनंद और सहयोग कैसे बनता है, और किस प्रकार यह इतिहास में प्रेरणा बनता है।