एज्रा 6:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर जिस ने वहाँ अपने नाम का निवास ठहराया है, वह क्या राजा क्या प्रजा, उन सभी को जो यह आज्ञा टालने और परमेश्‍वर के भवन को जो यरूशलेम में है नाश करने के लिये हाथ बढ़ाएँ, नष्ट करे। मुझ दारा ने यह आज्ञा दी है फुर्ती से ऐसा ही करना।”

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एज्रा 6:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

एज्रा 6:12 — संदर्भ और पाठकीय उद्घाटन

एज्रा 6:12 में परमेश्वर के मंदिर के प्रति अवमानना करने वालों के विरुद्ध राजा के आदेश के सार को प्रस्तुत किया गया है। यह शाही आदेश यरूशलेम के पवित्र मंदिर को ध्वस्त करने के प्रयासों के विरुद्ध है और परमेश्वर के नाम के निवास के स्थान के प्रति व्यवहार के स्पष्ट नियमन को दर्शाता है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि प्रभु के भवन के सम्मान के प्रति समाज के हर वर्ग की जवाबदेही होती है और दुष्कर्म के क्षणों में भी परमेश्वर की सत्ता और उद्देश्य मुख्य रहते हैं।

ईश्वर की महिमा, नियंत्रण तथा विश्वास के संकेत

वाक्य यह बताता है कि परमेश्वर वही है जो यरूशलेम में अपने नाम के निवास के कारण राजधानी और मंदिर को प्रभावशाली तरीके से पवित्र बनाता है। यहाँ परमेश्वर की सत्ता, विधान और वफादारी स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है: वह राजा हो या प्रजा—सब के ऊपर उसका आदेश है और उसकी योजना में मंदिर का स्थान सर्वोपरि है। यह संदेश विश्वास के दायरे में है कि मंदिर की सुरक्षा और उसकी पवित्रता परमेश्वर के संरक्षण के अधीन है।

महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

“जहाँ अपने नाम का निवास ठहराया है” यह इशारा है कि परमेश्वर अपने नैतिक और धार्मिक मान्यताओं के केंद्र के रूप में मंदिर को मानते हैं। “यहों के भवन को नाश करना” जैसी भाषा खतरनाक दखल और अराजकता की कल्पना कराती है, परन्तु परमेश्वर की योजना के अनुसार यह नाश नहीं, बल्कि न्याय और निर्णय की प्रक्रिया है। यह पाठ शक्ति के प्रयोग के माध्यम से भक्ति के सम्मान को स्थापित करने की urgency दिखाता है।

अन्य प्रमुख संदर्भों से कड़ियाँ

  • यशायाह 37:35 — प्रभु का मंदिर और Yerushalem की सुरक्षा के प्रति His steadfast love का पुनरुद्गार।
  • हबाकूक 2:20 — प्रभु की महिमा पूरे नगर और בית के ऊपर पहुँची होगी; प्रत्यक्ष निर्णय Him पर निर्भर है।
  • नहीम 4:14 — संघर्ष के समय विश्वासियों का मंदिर के सम्मान के लिए एकजुट होना; दुष्कर्म के विरुद्ध साहसपूर्ण कदम।

इन संदर्भों में मंदिर का केन्द्रीय स्थान और परमेश्वर की न्याय-व्यवस्था का अनुपालन दिखता है; यह पुष्ट करता है कि प्रभु के कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए दृढ़ता और पवित्रता आवश्यक है।

पुरानी पुस्‍तक से जुड़े व्याख्यात्मक संकेत (संक्षिप्त, प्राकृतिक सार)

मैथ्यू हेनरी, अ‍ल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे प्रसिद्ध पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार जहाँ उपलब्ध होते हैं, वे इस प्रकार की पाठक-उन्मुख व्याख्या में एकीकृत रहते हैं: मंदिर के प्रति संवेदनशील व्यवहार, परमेश्वर की सत्ता के अधीन रहना, और समुदाय के समेकित नैतिक निर्णयों की आवश्यकता पर बल। यदि किसी कथन का संक्षिप्त सूत्र उद्धृत हो, तो नीचे उल्लेखित बिंदु पाठों के अनुरूप ही उपयोग किया गया है।

वर्तमान-जीवन तक पहुंच: आज का अनुप्रयोग

- समुदाय में आपसी सम्मान और परमेश्वर की महिमा के लिए मन्दिर-योजनाओं की सुरक्षा पर विचार करें; भले ही यह भौतिक मन्दिर न हो, हमारे मामलों में ईमानदारी, नैतिकता और पवित्रता को केंद्रित रखना परमेश्वर के नाम के निवास की रक्षा है।

- असुरक्षा या दमन के समय में भी विश्वासियों को एकजुट होकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए—जहाँ शासन-व्यवस्था का सम्मान हो, वहाँ परमेश्वर की योजना सफल होती है।

छोटी व्याख्यात्मक सूची

  • ईश्वर का नाम शौर्य और सुरक्षा का आधार है; उसके निवास का सम्मान समुदाय के倫理 को आकार देता है।
  • शासन की नीतियाँ जब गलत दिशा में जाती हैं, तो विश्वासी संकल्पित रूप से नैतिकता और भय के बिना सत्य पर टिके रहते हैं।

कुल मिलाकर यह पाठ बतलाता है कि परमेश्वर के भवन (स्थान) के प्रति सम्मान और उसके नाम के अनुरूप जीवन जीना धार्मिक समाज की स्थापना और संरक्षण के लिए अनिवार्य है।

नोट: नीचे के उद्धरण और टिप्पणी संकेतक केवल संदर्भ के लिए हैं और केवल संक्षेप में उद्धृत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

एज्रा 6:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यहोवा ने उससे कहा, “जो प्रार्थना गिड़गिड़ाहट के साथ तूने मुझसे की है, उसको मैंने सुना है, यह जो भवन तूने बनाया है, उसमें मैंने अपना नाम सदा के लिये रखकर* उसे पवित्र किया है; और मेरी आँखें और मेरा मन नित्य वहीं लगे रहेंगे।

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किन्तु जो स्थान तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा तुम्हारे सब गोत्रों में से चुन लेगा, कि वहाँ अपना नाम बनाए रखे*, उसके उसी निवास-स्थान के पास जाया करना;

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मेरे लिये मिट्टी की एक वेदी बनाना, और अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के होमबलि और मेलबलि को उस पर चढ़ाना; जहाँ-जहाँ मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँ वहाँ-वहाँ मैं आकर तुम्हें आशीष दूँगा।

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