Old Testament
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एज्रा 6:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर मैंने आज्ञा दी है, कि जो कोई यह आज्ञा टाले, उसके घर में से कड़ी निकाली जाए, और उस पर वह स्वयं चढ़ाकर जकड़ा जाए*, और उसका घर इस अपराध के कारण घूरा बनाया जाए।
एज्रा 6:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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दानिय्येल 3:29 (HINIRV) »
इसलिए अब मैं यह आज्ञा देता हूँ कि देश-देश और जाति-जाति के लोगों, और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवालों में से जो कोई शद्रक, मेशक और अबेदनगो के परमेश्वर की कुछ निन्दा करेगा, वह टुकड़े-टुकड़े किया जाएगा, और उसका घर घूरा बनाया जाएगा; क्योंकि ऐसा कोई और देवता नहीं जो इस रीति से बचा सके।”

दानिय्येल 2:5 (HINIRV) »
राजा ने कसदियों को उत्तर दिया, “मैं यह आज्ञा दे चुका हूँ कि यदि तुम अर्थ समेत स्वप्न को न बताओगे तो तुम टुकड़े-टुकड़े किए जाओगे, और तुम्हारे घर फुंकवा दिए जाएँगे।

एज्रा 7:26 (HINIRV) »
जो कोई तेरे परमेश्वर की व्यवस्था और राजा की व्यवस्था न माने, उसको फुर्ती से दण्ड दिया जाए, चाहे प्राणदण्ड, चाहे देश निकाला, चाहे माल जप्त किया जाना, चाहे कैद करना।”
अध्याय का सहज सार: उद्देश्य और निष्कर्ष
अजेय व्यवस्था में यह वचन स्पष्ट करता है कि एक अपराध-आचरण के उभरने पर समुदाय कैसे सुरक्षित रहता है। राजा के दमनकारी आदेश के स्थान पर, यह प्रेरित करता है कि खतरे के निशान को पहचानकर उसे रोकना अनिवार्य है; क्योंकि असामाजिक अवमानना समाज और धर्म-परिवार के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
एज्रा 6 में पाश्चात्य और ईश्वरीय दायित्वों के पुनर्निर्माण का समय है, जब यहूदियों को बंधन से मुक्त कराने के बाद यरुशलेम के मंदिर और राज-कायदे पुनर्स्थापित हो रहे हैं। यहाँ के आदेश एक सामाजिक-धार्मिक सुरक्षा-उपाय के रूप में दिखते हैं, ताकि अशुद्ध या अपराध-प्रेरित प्रभाव समुदाय में न बैठे।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
‑ और अब की आज्ञा: जो कोई भी यह आज्ञा टाले, उसका घर तोड़ा जाएगा और उस पर चढ़ाकर जकड़ा जाएगा। यह शब्द स्रोत-गंभीरता और समुदाय-उत्साह का प्रतीक है कि अनुशासन से भावी पीढ़ियाँ सुरक्षित रहें।
‑ घर का विध्वंस: यह व्यवस्था उपयुक्त आक्रामकता नहीं, बल्कि निवारक व्यवस्था है; कबूल-देह-शासन के भीतर स्थित कानून के अनुसार, गलतियों के परिणाम स्पष्ट और दृढ़ रहते हैं।
मैथ्यू हेनरी, अलेक्टर बार्न्स, एडम क्लार्क से संक्षिप्त बिन्दु
यहाँ उद्धरण सीमित रूप से उद्धृत हैं, ताकि मूल विचार स्पष्ट रहें:
3-4 प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंस और उनका छोटा सम्वाद
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि समुदाय की पवित्रता और कानून-आचरण का उल्लंघन समाज पर गहरा असर डालता है; अनुशासन स्थिरता और भविष्य के लिए आवश्यक है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
1) समुदाय में शुद्ध आचार और धार्मिक-नैतिकता बनाए रखने हेतु स्पष्ट नियमों की आवश्यकता है।
2) यदि किसी ने नियम का उल्लंघन किया, तो प्रबल, परन्तु उचित दण्ड की चाल से भय, पुनर्स्थापना और सुधार को प्रेरित किया जाना चाहिए।
3) यह शास्त्रीय आदेश धार्मिक-संहार के बजाय एक संरक्षित राष्ट्र-धर्म के लिए चेन-प्रेम का संकेत है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 6:11 का संदेश बताता है कि पवित्र समाज की रक्षा हेतु दोष-कारकों पर स्पष्ट और निर्णायक दण्ड देना आवश्यक है; इससे समुदाय के विश्वास-आधार और ईश्वरीय आदेश की प्रतिष्ठा बनी रहती है। यह एक साहसिक, परन्तु प्रेमपूर्ण अनुशासन का उदाहरण है जो परमेश्वर के लोगों के भविष्य को सुरक्षित बनाता है।