Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 6:8 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 6:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वरन् मैं आज्ञा देता हूँ कि तुम्हें यहूदियों के उन पुरनियों से ऐसा बर्ताव करना होगा, कि परमेश्वर का वह भवन बनाया जाए; अर्थात् राजा के धन में से, महानद के पार के कर में से, उन पुरुषों को फुर्ती के साथ खर्चा दिया जाए; ऐसा न हो कि उनको रुकना पड़े।
एज्रा 6:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 6:4 (HINIRV) »
उसमें तीन रद्दे भारी-भारी पत्थरों के हों, और एक परत नई लकड़ी की हो; और इनकी लागत राजभवन में से दी जाए*।

एज्रा 7:15 (HINIRV) »
और जो चाँदी-सोना, राजा और उसके मंत्रियों ने इस्राएल के परमेश्वर को जिसका निवास यरूशलेम में है, अपनी इच्छा से दिया है,

एज्रा 6:8 का संदर्भ और अर्थ
यह पद यहूदियों के पुनर्निर्माण के क्रम में हिन्दूमुखी निर्देश देता है। बस्ती के बीचों-बीच तक परमेश्वर का भवन (यहोवा का घर) फिर से बनना था। राजा के आदेश से, धन के स्रोत स्पष्ट किए गए—राजधानी के भीतर राजधन और नदी के पार के कर से—ताकि पुनर्निर्माण में देरी न हो और कार्य समय पर पूरा हो सके। यह आश्वासन है कि परमेश्वर के गृह की कल्पना और महत्ता सामाजिक-राजस्व व्यवस्था के भीतर भी संरक्षित रहे।
मुख्य व्याख्या
इस पंक्ति में फरमाइशी निर्देश इसलिए दिए गए क्योंकि यहूदियों को कठिन दशा में भी परमेश्वरीय भवन के लिए स्थिरता और गति प्रदान करनी थी। राजा द्वारा ऐसा निर्देश देना यह दर्शाता है कि धार्मिक प्रयत्न और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था एक साथ चले। यहूदी पुरनियाँ और समुदाय के अन्य सदस्य भी इस परियोजना के भागीदार थे, पर व्यवस्था के अनुसार धन का प्रवाह स्पष्ट बन जाता है ताकि निर्माण रुकने न पाए।
तकनीकी विषय और थीम
संबंधित बाइबिल पंक्तियाँ
1) इब्राहीम के मंदिर के निर्माण के समय लोगों की उदारता से समर्थित निर्देशन; 2) जेश्युल के पाठ में धार्मिक-निर्माण परियोजनाओं के लिए योजना और संसाधन की व्यवस्था; 3) नीतियों के अनुसार पुनर्निर्माण अवसरों पर समाज-राजस्व का उचित वितरण।
संदर्भों का संक्षेपपूर्वक लाभ: यह उदाहरण दिखाता है कि परमेश्वर के घर के निर्माण में नेतृत्व और समुदाय का संयुक्त प्रयास कैसे चलता है, और कैसे धन का संतुलित उपयोग उद्देश्य की पूर्ति करता है।
वाचन-योग्य विचार
व्यावहारिक दृष्टि से यह हमारे लिए प्रस्तुत करता है कि किसी महत्वपूर्ण ईश्वरीय परियोजना के लिए स्पष्ट दिशा, समय-सीमा और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था कितनी आवश्यक होती है। व्यक्तिगत विश्वास-जीवन में भी हम अपने संसाधनों को ईश्वरीय कार्यों के लिए व्यवस्थित ढंग से दे सकते हैं, ताकि स्थिर सफलता और जिम्मेदारी बनी रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 6:8 बताता है कि परमेश्वर के मंदिर के लिए कार्य-योजना में राज्य-सहायता और संसाधनों का स्पष्ट वितरण अनिवार्य है, ताकि निर्माण में रुकावट न हो और भव्य उद्देश्य की प्राप्ति संभव हो सके।
क्रॉस-रेफरेंसेस (3) और उनका संक्षेप
• देवदूत-निर्माण के लिए समुदाय की भागीदारी पर बल देने वाले उदाहरण: धार्मिक-निर्माण के समय सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता।
• धन का उद्देश्य निर्धारित रखना: धन के स्रोतों को सही उद्देश्य के लिए उपयोग करना कैसे परमेश्वर की दृष्टि में समर्थ है।
• समय-सीमा और तुरंत क्रिया: उद्धार-कार्य में तत्परता से आगे बढ़ना क्यों जरूरी है, ताकि लक्ष्य समय पर पूरा हो सके।