Old Testament
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एज्रा 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहूदी पुरनिये, हाग्गै नबी और इद्दो के पोते जकर्याह के नबूवत करने से मन्दिर को बनाते रहे, और सफल भी हुए और उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार और फारस के राजा कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र* की आज्ञाओं के अनुसार बनाते-बनाते उसे पूरा कर लिया।
एज्रा 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 7:1 (HINIRV) »
इन बातों के बाद अर्थात् फारस के राजा अर्तक्षत्र के दिनों में, एज्रा बाबेल से यरूशलेम को गया। वह सरायाह का पुत्र था। सरायाह अजर्याह का पुत्र था, अजर्याह हिल्किय्याह का,

एज्रा 4:24 (HINIRV) »
तब परमेश्वर के भवन का काम जो यरूशलेम में है, रुक गया; और फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।

एज्रा 5:13 (HINIRV) »
परन्तु बाबेल के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने परमेश्वर के इस भवन को बनाने की आज्ञा दी।
जकर्याह-हाग्गै के नबूवत के साथ मन्दिर का पूरक निर्माण
मुख्य अभिधेय (interpretive point): यह passage दर्शाता है कि परमेश्वर के लोगों ने नबियों की चेतावनी और प्रेरणा के अनुसार मन्दिर का निर्माण जारी रखा, और परमेश्वर की योजना में उनका सहयोग सफलता से संपन्न हुआ। यह दिखाता है कि दाऊदीय शासन और बंधनों के बावजूद परमेश्वर के निर्देशों की पुष्टि और आज्ञा-पालन में लोगों की ठोस जवाबदेही से ही रीत-रिवाज और उपासना का शुद्धिकरण संभव होता है।
साहित्यिक संदर्भ (Literary context)
एजरा पुस्तक के काल-चक्र में, यहूदियों ने बाबुल से लौटकर मंदिर पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी ली। यहाँ ज़रूरत थी पुरनिये पंरम्परा, नबियों की प्रेरणा, और फारसी सम्राटों की नीति-निर्देशन के बीच संतुलन बनाकर कार्य करने की। इद्धो के पोते जकर्याह के नबूवत-उपदेश और हाग्गै की वितरित बातें एक साथ सञ्चालन को बल देती हैं, जिससे पूजा-स्थल की पवित्रता और देश-निर्माण एक साथ गतिशील रहते हैं।
धार्मिक महत्त्व (Theological significance)
इस वाक्य के अनुसार मन्दिर का निर्माण “परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार” हुआ। यहूदी लोक के लिए यह यह दर्शाता है कि ईश्वर के कारण और सामर्थ्य से किया गया कार्य व्यक्तिगत प्रयासों से अधिक व्यापक स्वीकृति पाता है। फारस के राजा—कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र—की आज्ञाओं के अनुसार कार्य करना यह भी संकेत देता है कि राष्ट्रीय शासन और धार्मिक पुनर्निर्माण एकीकृत रूप से चल सकते हैं, जब धार्मिक नीतियाँ और लोक-नियम एक दूसरे के सम्मुख उत्तरदायित्वपूर्ण हों।
उद्धृत विचार और मार्गदर्शन (Cross-references with brief explanations)
संक्षेप में, पुरानी नबूती चेतावनियाँ और आज्ञाएं मन्दिर-निर्माण के लिए एक पक्की बुनियाद बनाती हैं, और सत्ता–सहयोग के साथ वह बस्ता पूर्ण होता है।
परीक्षा के प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह passage यही सिखाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में भागीदारी तब सफल होती है जब धार्मिक निर्देश और राज्यीय सत्ता एकजुट होकर चलते हैं। पुरनियों, नबियों की ओर से मिली प्रेरणा और शासन-नीतियों की मान्यता द्वारा मन्दिर-निर्माण पूरा हुआ; यही एकता का पुरा संकेत है कि वह कार्य ईश्वर की महिमा के लिए मान्य और स्थायी है।
सूक्ष्म उद्धरण-उद्धृत टिप्पणियाँ
Matthew Henry,Albert Barnes,Adam Clarke के उपयुक्त और सार्वजनिक-डायरेक्टेड टिप्पणी-पात्रों से मिलते-जुलते बिंदु नीचे आवश्यक हैं (यदि उपलब्ध हों):
“यहूदियों की सफलता ईश्वर की सहायता और उनके विश्वास-जीवन का प्रमाण है।”
“मंदिर निर्माण में नबियों की प्रेरणा और राजाओं की अनुमति का संयोजन, धार्मिक-राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए अनिवार्य है।”