एज्रा 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु बाबेल के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने परमेश्‍वर के इस भवन को बनाने की आज्ञा दी।

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एज्रा 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

एज्रा 5:13 का संदर्भ और अर्थ

यह पद उन घटनाओं के बीच आता है जब यहूदियों ने बंधन से लौटकर मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू किया, परन्तु पड़ोसी-विरोध और सत्ता-परिवर्तन के कारण वे रुके रहे। अगले आकलन के विरुद्ध, कुस्रू (कुष्रू) के शासनकाल की पहली वर्षगांठ पर प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि परमेश्वर के भवन को फिर से बनवाने की आज्ञा जारी है। इसका मतलब है एक बार फिर से ईश्वर के घर के ध्वस्त ढांचे को उठाने की एक आधिकारिक, वैश्विक मान्यता और समर्थन।

मुख्य बिंदु और केंद्रीय अर्थ

इस Verse में दो पहलू एक साथ उभरते हैं: दोनों सत्ता-स्तर और धार्मिक-युग के बीच की संतुलन-स्थिति। एक ओर, बाबुली निर्गमन के बाद इजराइलियों ने अपनी भौतिक सभा-स्थली को पुनः स्थापित करने के लिए प्रयास किए, और दूसरी ओर, कुस्रू के शासन के पहली वर्ष में यह परियोजना मान्य और प्रेरित की जाती है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य और सत्ता की मान्यता के बीच एक स्थिरता है; जब ईश्वर की इच्छा स्पष्ट होती है, तब राजनीतिक कवच भी उसकी योजना के अनुकूल बनकर क्रियान्वित होता है।

तीन प्रमुख विषय

  1. ईश्वर की पूर्व-निर्णय और मान्यता: प्रशासनिक आदेश से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर ने अपने भवन पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक अवसर प्रदान किया।
  2. कसरूर और सत्ता के बीच सहयोग: शास्त्री इसे एक संकेत के रूप में देखते हैं कि राजा के नीति-निर्णय परमेश्वर के काम को समर्थ बनाते हैं, न कि उसे रोकते हैं।
  3. धार्मिक पुनर्निर्माण की प्रेरणा: मंदिर-निर्माण कार्य की अखंडता और समुदाय की आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह कदम महत्त्वपूर्ण था।

संबद्ध भागों के संदर्भ

एज्रा के इस भाग के साथ खजाने-जोर की स्मारक-छवियाँ, दान-समर्पण और पवित्र भवन के पुनः निर्माण की प्रेरणाएं मिलती हैं। साथ ही, यहूदी इतिहास के पुनर्निर्माण के साथ-साथ यह भी दिखाता है कि किस प्रकार परमेश्वर अपने लोगों के साथ सीधे संलग्न रहता है और प्रदत्त अवसरों के द्वारा उनकी प्रार्थनाओं को उत्तर देता है।

संयुक्त संदर्भ:

  • हगत 1–2: मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रेरणा और प्रतिरोध के बीच संतुलन—संकेत देता है कि ईश्वर का घर फिर से उठना चाहिए।
  • यिर्मयाह 29:11 के समान विचारधारा—ईश्वर की भविष्यवाणी और योजना से वर्तमान कर्मों की पुष्टि।
  • लैव्यवस्था 26:12-13 के समान परमेश्वर अपने लोगों के बीच सन्निकट रहता है

व्यावहारिक विचार

हमारी जीवन-यात्रा में भी परमेश्वर की योजना के अनुरूप कदम उठाने की प्रेरणा मिलती है—जब वह स्पष्ट आह्वान देता है, तब साहसपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए, चाहे बाधाएं कितनी भी क्यों न हों। नीति-निर्धारण और आध्यात्मिक पुनर्निर्माण एक साथ चलते हैं, ताकि समुदाय में विश्वास और समर्पण मजबूत बनें।

संक्षिप्त समापन

एज्रा 5:13 यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के पुनर्निर्माण के लिए समय के अनुसार अवसर खोलता है, और सत्ता-प्रभावों को भी उसके उद्देश्य के अनुरूप चलने देता है। मंदिर के इस पुनर्निर्माण के लिए कुस्रू के शासन ने जो अनुमति दी, वह उस समय के धार्मिक/सामाजिक पुनर्जन्म का एक मजबूत संकेत है।

उद्धरण चेतावनी

याद रहे कि इस प्रस्तुति में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट शब्दों के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; यदि आवश्यक हो तो उनके संक्षिप्त विचारों को समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

एज्रा 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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एज्रा 6:3 (HINIRV) »
“राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने यह आज्ञा दी, कि परमेश्‍वर के भवन के विषय जो यरूशलेम में है, अर्थात् वह भवन जिसमें बलिदान किए जाते थे, वह बनाया जाए और उसकी नींव दृढ़ता से डाली जाए, उसकी ऊँचाई और चौड़ाई साठ-साठ हाथ की हो;

एज्रा 1:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
एज्रा 1:1 (HINIRV) »
फारस के राजा कुस्रू के राज्य के पहले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:

यशायाह 44:28 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 44:28 (HINIRV) »
जो कुस्रू के विषय में कहता है, 'वह मेरा ठहराया हुआ चरवाहा है और मेरी इच्छा पूरी करेगा;' यरूशलेम के विषय कहता है, 'वह बसाई जाएगी,' और मन्दिर के विषय कि 'तेरी नींव डाली जाएगी।'” (एज्रा. 1:1-3)

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