Old Testament
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एज्रा 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए हमने उन पुरनियों से यह पूछा, 'यह भवन बनवाने, और यह शहरपनाह खड़ी करने की आज्ञा किस ने तुम्हें दी?'
एज्रा 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 5:3 (HINIRV) »
उसी समय महानद के इस पार का तत्तनै नामक अधिपति और शतर्बोजनै अपने सहयोगियों समेत उनके पास जाकर यह पूछने लगे, “इस भवन के बनाने और इस शहरपनाह को खड़ा करने की किस ने तुम को आज्ञा दी है?”
एज्रा 5:9 — पाठ का तात्कालिक संदर्भ और अभिप्राय
यह पाठ उन घटनाओं के बीच का भाग दर्शाता है जब यहूदियों ने बैबिलॉन से लौटकर यरुशलेम और मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए अवसर पाया। पुरनिए (वृद्धजन) से पूछा गया कि भवन बनवाने और शहर को स्थिर करने की आज्ञा किसने दी? यह सवाल सीधे मौलिक अधिकार और राज्य-योजना के स्रोत को चुनौती देता है, ताकि समुदाय तुरंत यह जान सके कि उनके कार्यों के पीछे किनकी अनुमति है और किस मंच से वे आगे बढ़ते हैं।
ईश्वर और विश्वास पर यह पाठ क्या बताता है
यह दृश्य यह दर्शाता है कि विश्वास-यात्रा में मान्यता कौन देता है—न केवल मानव शासन से, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुसार। इतिहास में सेना और मजबूत संस्था के बजाय परमेश्वर के आग्रह और उसकी योजना की दिशा-निर्देशी भूमिका प्रबल रहती है। वहां के पुरनिए यह दिखाते हैं कि ईश्वर के लोग एक ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जिसमें बाहरी विश्वासयोग्यता और समुदायिक निर्देश मिलकर एक ठोस निर्माण की नींव बनाते हैं।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबंधित आयतें और उनके संक्षिप्त संबंध
• हबक्कुक-नज़रिया: परमेश्वर की योजना के अनुरूप संघर्षों में भी विश्वास बनाए रखना—नए निर्माण का उद्देश्य उसकी महिमा है।
• नीतियों/कायदे के स्थान पर ईमानदार आस्था: लोग एक साथ काम करें और परमेश्वर की अनुमति से आगे बढ़ें।
• प्रतिज्ञान और पुनर्निर्माण: इतिहास में ईश्वर का कार्य पुनःस्थापना के साथ जुड़ा है; भागीदारी और आस्था को संजोना आवश्यक है।
आज के लिए लागू प्रयोजन
हमारे दैनिक जीवन में भी यह प्रमाण मिलता है: कठिन कार्यों में आगे बढ़ने से पहले यह देखना कि कौन सी पहली चेतावनी और निर्देश स्रोत हैं—क्या परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट है, क्या समुदाय का समर्थन है, और क्या सत्यापन योग्य नेतृत्व है? यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि वस्तुतः निर्माण और पुनर्निर्माण के लिए आत्म-नियमन, संघर्ष के समय धैर्य, और परमेश्वर के मार्ग के अनुरोध का सम्मान आवश्यक है।
धार्मिक विद्वानों के संक्षेप विचार
मार्थ्यू हेन्री के अनुसार, ईश्वर के उद्देश्य के अनुरोध के बिना कोई भी निर्माण स्थिर नहीं रहता; भरोसा और कर्तव्य दोनों मिलकर कार्य को संचालित करते हैं। अॅल्बर्ट बॉर्न्स इसे अनुदेश के स्रोत के रूप में देखते हैं—मानव अधिकारों से परे, परमेश्वर की इच्छा पहले आती है। एडम क्लार्क इसे स्पष्ट करते हैं कि लौटकर पुनर्निर्माण एक आस्तिक समुदाय की पहचान और समर्पण का परीक्षण है।
उद्धरण दर्ज: अगर इन विद्वानों के विशिष्ट शब्द मिलते हैं तो नीचे उद्धृत हैं, अन्यथा समुच्चय विचार से संदर्भित होते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस
• काबील-प्रतिबिम्ब: परमेश्वर की योजना के अनुसार पुनर्निर्माण; उद्धार के संकेत।
• विश्वास और कार्य: आस्था के साथ कार्य का संगम—समुदायिक पुनर्स्थापन का मार्ग प्रशस्त करता है।
• नेतृत्व और मार्गदर्शन: सही मार्गदर्शक के बिना निर्माण का उद्देश्य अधूरा रहता है।
इस प्रकार, एज्रा 5:9 हमें यह सिखाता है कि हर बड़ा कार्य परमेश्वर के अनुमति और मार्गदर्शन से ही संभव होता है, और समुदाय के अनुभवी वर्षों का अनुभव इस मार्ग में मार्गदर्शक बनता है।