Old Testament
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एज्रा 5:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने उससे कहा, “ये पात्र ले जाकर यरूशलेम के मन्दिर में रख, और परमेश्वर का वह भवन अपने स्थान पर बनाया जाए।”
एज्रा 5:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 1:2 (HINIRV) »
“फारस का राजा कुस्रू यह कहता है: स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसने मुझे आज्ञा दी, कि यहूदा के यरूशलेम में मेरा एक भवन बनवा*।

एज्रा 3:3 (HINIRV) »
तब उन्होंने वेदी को उसके स्थान पर खड़ा किया क्योंकि उन्हें उस ओर के देशों के लोगों का भय रहा, और वे उस पर यहोवा के लिये होमबलि अर्थात् प्रतिदिन सवेरे और सांझ के होमबलि चढ़ाने लगे।

एज्रा 6:3 (HINIRV) »
“राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने यह आज्ञा दी, कि परमेश्वर के भवन के विषय जो यरूशलेम में है, अर्थात् वह भवन जिसमें बलिदान किए जाते थे, वह बनाया जाए और उसकी नींव दृढ़ता से डाली जाए, उसकी ऊँचाई और चौड़ाई साठ-साठ हाथ की हो;
एज्रा 5:15 का पाठ-परिचय
यह पद दिखाता है कि यह्राइल के योद्धृत समय में कैसे परमेश्वर का मंदिर फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरणा और निर्देश मिले। यहाँ राजा दायीद या चढ़ाने वाले नहीं, बल्कि बाबेल के निर्वासन के बाद लौटे ये लोग अपने पूर्वजों की आध्यात्मिक धरोहर को फिर से बनाकर परमेश्वर के निवास के स्थान को पहचानते हैं। यह अध्याय 5 का हिस्सा है जहाँ यदायाहरो या ज़रूसबबल के नेतृत्व में लौटे यहुदी मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कठिनाईयों से गुजरते हैं, परन्तु ईश्वर की योजना पर उनकी आशा स्थिर रहती है।
पद का संदर्भ-विवेचन
पद में कहा गया है कि कोई पात्र उठाकर यरूशलेम के मंदिर के स्थान पर रखा जाए, ताकि परमेश्वर का भवन अपने स्थान पर बन सके। यह एक संकेत है कि लौटे हुए लोग मंदिर के संरचनात्मक काम के साथ-साथ आध्यात्मिक रिवाइवल की भी दिशा में अग्रसर हैं। यह एक आदेश नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है कि ईश्वर चाहते हैं कि उनके निवास का स्थान सही और सुव्यवस्थित रहे, ताकि पूजा और समर्पण का यह स्थल धर्म-सत्य को केंद्र में रखे।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस आयत में प्रमुख उद्धेश्य एक बार फिर से मंदिर-निर्माण के सुदृढ़ आरम्भ की पुष्टि है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के प्रति वफादारी और समुदाय की एकजुटता के द्वारा ही आत्मिक पुनर्निर्माण संभव है। यह संदेश हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, परमेश्वर के घर की महत्ता पहले स्थान पर रहती है और उसकी ठहरावपूर्ण योजना में संतुलन बनाए रखना हमारे लिए अनिवार्य है।
अन्य बाइबल अंशों से तुलना
- हजूरायव-1:8-9: लौटने वाले लोगों के लिए मंदिर बनवाना किस प्रकार से ईश्वर की सहायता—यही संदेश इसी क्रम में दोहराया गया है।
- एज्रा 4-5: भिन्न-भिन्न विरोधों के बावजूद ईश्वर की योजना के अनुरूप श्रम और नेतृत्व का संगम दिखाया गया है।
- हबाकूक 2:3: ईश्वर की बात समय पर पूरी होने की आशा का महत्व बताता है, जो इस समय मंदिर-निर्माण के ध्येय से मेल खाता है।
सीधी-सीधी प्रायोगिक शिक्षण
व्यावहारिक आवेदन
- संकट के समय भी परमेश्वर के घर और प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखना।
- एकता से काम करना—पिछले वर्षों की कठिनाइयों के बावजूद समुदाय एक साझा लक्ष्य की ओर बढ़े।
- ईश्वर की योजना पर भरोसा बनाए रखना, भले ही अस्थायी विरोध हों।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) एज्रा 4:5— विरोध के बावजूद परियोजना पीछे नहीं हटती; यह हमारी निर्भरताओं और धैर्य की परीक्षा है।
2) हबक्कूक 2:3— हरthing समय पर पूरा होता है; विश्वास की अपेक्षा और धैर्य का संदेश।
3) 2 क्रियाकाल 36:23— मंदिर-निर्माण और पुर्नस्थापना की महिमा, जो यहूदियों के इतिहास के प्रेरक क्षण हैं।
संक्षेप
एज्रा 5:15 में यह स्पष्ट होता है कि लौटे हुए यहूदियों के लिए मंदिर का पुनर्निर्माण केवल संरचनात्मक कार्य नहीं, बल्कि परमेश्वर के निवास को पुनः स्थापित करने की आध्यात्मिक बात है। यह हमारे लिए संदेश है कि समुदाय, नेतृत्व, और ईश्वर की योजना के अनुरूप कर्म करना ही सच्चे पारिवारिक और आध्यात्मिक पुनर्निर्माण का मार्ग है।
नोट: नीचे बताए गए कुछ शब्द-उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकलित विचारों में संक्षेपित रूप से नज़र आते हैं—यदि पात्र किसी समय सीधे उद्धृत होते हैं, तो केवल संक्षेप के रूप में ही उल्लेखित किया गया है.