Old Testament
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एज्रा 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो चिट्ठी महानद के इस पार के अधिपति तत्तनै और शतर्बोजनै और महानद के इस पार के उनके सहयोगियों फारसियों ने राजा दारा के पास भेजी उसकी नकल यह है;
एज्रा 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 4:9 (HINIRV) »
उस समय रहूम राजमंत्री और शिमशै मंत्री और उनके अन्य सहयोगियों ने, अर्थात् दीनी, अपर्सतकी, तर्पली, अफ़ारसी, एरेकी, बाबेली, शूशनी, देहवी, एलामी,

एज्रा 5:3 (HINIRV) »
उसी समय महानद के इस पार का तत्तनै नामक अधिपति और शतर्बोजनै अपने सहयोगियों समेत उनके पास जाकर यह पूछने लगे, “इस भवन के बनाने और इस शहरपनाह को खड़ा करने की किस ने तुम को आज्ञा दी है?”

एज्रा 4:11 (HINIRV) »
जो चिट्ठी उन्होंने अर्तक्षत्र राजा को लिखी, उसकी यह नकल है- “राजा अर्तक्षत्र की सेवा में तेरे दास जो महानद के पार के मनुष्य हैं, तुझे शुभकामनाएँ भेजते हैं।
एज्रा 5:6 पर हिंदी टिप्पणी — सरल आध्यात्मिक तात्पर्य
सीधी परिकल्पना: एज्रा 5:6 में दिखाया गया है कि बाबुल के निर्वासन के बाद यहूदियों के वृहत पत्र (चिट्ठी) और उनके साथियों के द्वारा राजा दारा के पास भेजी गई सूचना एक अंतरिम चेकपॉइंट है—यह दर्शाता है कि ईश्वर की योजना के विरुद्ध कोई भी बाधा, भले ही वह विदेशी आचरण या विपक्ष क्यों न हो, उसे ईमानदार प्रयत्न से सामना किया गया है और परमेश्वर के काम के आगे टिकना कठिन रहा पर संभव है।
पृष्ठभूमि
इस अध्याय में यह स्पष्ट है कि री-निर्माण के प्रयासों को रोकने के लिए कुछ अधिकारी सपत्निक गुप्त चिट्ठियाँ भेजते हैं; परंतु दारा के आदेशों के अनुसार यहूदियों के पथ को रोका नहीं गया। इसके पीछे राजनीतिक-धार्मिक तनाव और शासन के भीतर के विरोध शामिल हैं।
व्याख्यात्मक बिंदु
टेक्निकल अर्थ-सार
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर के लोगों के लिए बाहरी दबाव चाहे कितने भी मजबूत क्यों न हों, उनके विश्वास-योजना को टिकाए रखना आवश्यक है। जिनके पास सत्ता है, वे भी अंततः उसकी योजना को अगर वह परमेश्वर की इच्छा से मेल खाती है, तो उसे मानेंगे।
अनुभागों से सम्बद्ध विचार
कई प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संकेत शुद्ध शब्दों की जगह, नीति और प्रभु-उद्धार के सम्बन्ध को उजागर करते हैं। नीचे कुछ त्वरित निष्कर्ष दिए गए हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित तर्क)
1) नीतिपरक दृष्टिकोण से; यह चिट्ठियाँ और प्रतिरोध धर्म-निर्माण के संघर्ष को दिखाते हैं।
2) पुनर्निर्माण के अवसरों पर; बंधनों के पीछे भी ईश्वर की कृपा और मार्गदर्शन पर भरोसा मजबूत होता है।
3) शासन-व्यवस्था बनाम परमेश्वर की योजना—यही संघर्ष कभी-कभी राजा की नीतियों को भी नियंत्रित कर देता है।
संक्षिप्त praktical takeaway
परमेश्वर के लोग द्वंद्व के समय भी आस्था बनाए रखें, तथ्य-सत्य और दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करें, ताकि धार्मिक कर्तव्य और समाजिक व्यवस्थाएं एक दूसरे के साथ संगत हों।
नोट: नीचे के उद्धरण केवल संदर्भ हेतु संक्षिप्त हैं—पूर्ण पाठ नहीं दिए गए हैं ताकि पाठ-ग्रहण में स्पष्टता बनी रहे।