Old Testament
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एज्रा 5:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
राजा को विदित हो, कि हम लोग यहूदा नामक प्रान्त में महान परमेश्वर के भवन के पास गए थे, वह बड़े-बड़े पत्थरों से* बन रहा है, और उसकी दीवारों में कड़ियाँ जुड़ रही हैं; और यह काम उन लोगों के द्वारा फुर्ती के साथ हो रहा है, और सफल भी होता जाता है।
एज्रा 5:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:31 (HINIRV) »
क्योंकि जैसी हमारी चट्टान है वैसी उनकी चट्टान नहीं है, चाहे हमारे शत्रु ही क्यों न न्यायी हों।

व्यवस्थाविवरण 10:17 (HINIRV) »
क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य परमेश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। (प्रेरि. 10:34, रोम. 2:11, गला. 2:6, इफि. 6:9, कुलु. 3:25, 1 तीमु. 6:15, प्रका. 17:14, प्रका. 19:16)

एज्रा 7:23 (HINIRV) »
जो-जो आज्ञा स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से मिले, ठीक उसी के अनुसार स्वर्ग के परमेश्वर के भवन के लिये किया जाए, राजा और राजकुमारों के राज्य पर परमेश्वर का क्रोध क्यों भड़कने पाए।
एज्रा 5:8 का व्याख्यात्मक अवलोकन
यह वर्णन हमें लौटे हुए यहूदियों के पुनर्निर्माण कार्य और राज्य-नियोजन के बीच संतुलन दिखाता है। राजा को सूचित किया गया कि यह देश के स्थापत्य कार्य, जो परमेश्वर के भवन के साथ जुड़ा है, चलता आ रहा है, और यह प्रक्रिया सफलता की ओर बढ़ रही है। शासक की पूछताछ के बजाय, नीति-संयोजन के भीतर यहूदियों की मेहनत और परमেশ्वर के साथ उनके भागीदारी का प्रदर्शन सामने आता है।
पाद का अध्याय-संदर्भ में स्थान
एज्रा के पहले भाग में बंधुआपन से लौटे यहूदियों द्वारा टीका-चिन्हित परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया लगभग एक क्रमिक कथा के रूप में सामने आती है। 5:8 में प्रशासनिक चेतावनी से पहले, यहूदियों की तत्परता और मंदिर-निर्माण का जोश स्पष्ट होता है—जो बताता है कि वे न सिर्फ नीतिगत समर्थन चाहते हैं बल्कि परमेश्वर के इच्छा-कार्य को मान्यता देकर जी रहे हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन का मूल पाठ यह सन्देश देता है कि: परमेश्वर के घर के पुनर्निर्माण में भागीदारी लेने वाले लोग दृढ़ हैं और सफलता की ओर अग्रसर हैं। यहूदियों की तीव्रता, कड़ी मेहनत और क्रमबद्ध योजना यह बताती है कि परमेश्वर के उद्देश्य के लिए किया गया हर छोटा-मोठा कदम भी आशीष बन सकता है। साथ ही यह भी याद दिलाता है कि नीति-नियोजन और सामंजस्य के साथ प्रार्थना और विश्वास एक साथ चलती है।
पुस्तक-तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य
आध्यात्मिक अनुप्रयोग
- अपने जीवन के उद्देश्यों को परमेश्वर के भवन-योजनाओं से जोड़कर देखें; छोटे-छोटे कार्यों में भी महत्त्व भरा होता है जब वे विश्वासी समुदाय के उद्देश्य से होते हैं।
- व्यवस्थित योजना और परिश्रम, साथ ही ईश्वर की सत्ता की प्रतीक्षा—इनके संतुलन से सफलता मिलती है।
- तनाव या अवरोध के समय भी विश्वासग्रंथ यह करुणा देता है कि परमेश्वर की योजना की गति में मनुष्य का योगदान मान्य और आवश्यक है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) नीतिपरक नेतृत्व और मंदिर-निर्माण के प्रति एकजुटता—याकूब 1:6 के समान, जिसमें विश्वास के साथ कार्य का मेल होना चाहिए।
2) हजे के समय का पुनर्निर्माण—नीतियों के साथ ईश्वर के पक्ष में तत्परता, যেমন हबाकुक 2:3 में समय पर दृष्टीकरण संबन्धित है।
3) दाऊदीय उदाहरण—समुदाय की भागीदारी से युग-परिवर्तन, जहाँ नेतृत्व और सहयोग से लक्ष्य पाया गया।
पृथक उद्धरण-संदर्भ (सीधे शब्द नहीं बोलना)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक उद्धरणों को देखते हैं, तो वे मंदिर-निर्माण, शासन-प्रशासन और समुदायिक सहभागिता के महत्व पर जोर देते हैं। नीचे केवल संक्षिप्त संदर्भ प्रस्तुत किए जा रहे हैं—पूरे उद्धरण शब्दशः पंक्तियाँ नहीं दी जा रहीं:
- Henry के दृष्टिकोण में धार्मिक नयित्व और सार्वजनिक कार्य के संयोजन की व्याख्या मिलती है।
- Barnes यह दर्शाते हैं कि पुनर्निर्माण के क्रम में लोगों की प्रेरणा और परमेश्वर की सहायता दोनों आवश्यक हैं।
- Clarke मंदिर-निर्माण के प्रतीकात्मक अर्थों पर टिप्पणी करते हैं कि यह समुदाय की एकता और पवित्र उद्देश्य की पुष्टि है।
संक्षेप सार
एज्रा 5:8 ने यह दिखाया कि लौटे हुए यहूदियों का मंदिर-निर्माण कार्य प्रशासनिक तेज़ी से चला और परमेश्वर की योजनाओं के साथ उनका संलग्न होना महत्त्वपूर्ण था। यह प्रेरणा देता है कि विश्वासयोग्य समुदाय में योजना बनाकर और ईश्वर के कार्य को अग्रसर करके सफलता पाई जा सकती है।