Old Testament
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एज्रा 5:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब हमारे पुरखाओं ने स्वर्ग के परमेश्वर को रिस दिलाई थी, तब उसने उन्हें बाबेल के कसदी राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दिया था, और उसने इस भवन को नाश किया और लोगों को बन्दी बनाकर बाबेल को ले गया।
एज्रा 5:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 36:16 (HINIRV) »
परन्तु वे परमेश्वर के दूतों को उपहास में उड़ाते, उसके वचनों को तुच्छ जानते, और उसके नबियों की हँसी करते थे। अतः यहोवा अपनी प्रजा पर ऐसा झुँझला उठा, कि बचने का कोई उपाय न रहा। (प्रेरि. 13:41)

नहेम्याह 9:26 (HINIRV) »
“परन्तु वे तुझ से फिरकर बलवा करनेवाले बन गए और तेरी व्यवस्था को त्याग दिया, और तेरे जो नबी तेरी ओर उन्हें फेरने के लिये उनको चिताते रहे उनको उन्होंने घात किया*, और तेरा बहुत तिरस्कार किया।

2 राजाओं 24:2 (HINIRV) »
तब यहोवा ने उसके विरुद्ध और यहूदा को नाश करने के लिये कसदियों, अरामियों, मोआबियों और अम्मोनियों के दल भेजे, यह यहोवा के उस वचन के अनुसार हुआ, जो उसने अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा था।
एज्रा 5:12 पर टिप्पणी — मतलब और संदर्भ
सीधे अर्थ में: जब हमारे पूर्वजों ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्यार और विश्वास दिखाया, तब उन्होंने असंगतता से मोड़ लिया और बुरे रास्ते अपनाए। परिणामस्वरूप परमेश्वर ने उनकी प्रतिक्रिया को Babylonia के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में दे दिया, जिसने ध्वस्त मंदिर को तोड़ा और निर्यात कर लोगों को बाबेल ले गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
ईजोरा-विन्यास के इतिहास में यह वक्त बाबुल के विजय-काल से जुड़ा है। मंदिर-मरम्मत के प्रयासों के बीच, ईश्वर की संदेशवाहक व्यवस्था में असंतोष और अविश्वास के कारण भविष्य की योजना बाधित होती है। इस वाक्य में नबूकदनेस्सर का नाम आता है—एक शक्ति-शक्ति नीतिगत घटनाक्रम जो यहूदियों के लिए एक कठोर धक्का था, परन्तु परमेश्वर की योजना में उसका एक हिस्सा माना गया।
interpretive observations
छोटी थीम-वस्तु
अन्य प्रचलित टिप्पणीकारों से संदर्भ
Matthew Henry के अनुसार: यह घटना परमेश्वर के चयनित लोगों के लिए एक चेतावनी है कि विश्वासघात और असंतोष कैसे परमेश्वर की योजना को प्रभावित करते हैं; परिणाम स्पष्ट और ध्वस्तकारी होते हैं।
Albert Barnes के अनुसार: यह दिखाता है कि दंड से पहले भगवान की स्थिति और वादा अपराधियों के सामने कितनी गंभीर होती है; बाबुल की विजय क्रमिक दंड का एक भाग है।
Adam Clarke के अनुसार: मंदिर की विनाशकता एक चेतावनी है कि पवित्र स्थान से पथभ्रष्ट हो जाना भ्रष्टाचार का परिणाम है; फिर भी परमेश्वर ने अपनी योजना के भीतर पुनर्निर्माण की राह खुली रखी।
अनुबंधित क्रॉस-रेफ़रेंसे
1) दानिय्येल 5–6: बाबुल के राजा और सत्ता के अंतर्द्वंद्व के बीच दैवी निर्णय का चित्रण; यह दिखाता है कि सत्ता परिवर्तन से परमेश्वर की न्याय-निहित योजना कैसे आगे बढ़ती है।
2) यहशैया 39: नबूकदनेस्सर की सेवा से संबंधित चेतावनी और फिर प्रतिशोध की बात का संकेत; यह समझाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य इतिहास में कैसे चलते हैं।
3) स्मरण/पुनर्निर्माण: हज़ूर 2:1–2 और एपरोक्त घटनाओं के बाद पुनर्निर्माण के संकेतक — एक नई राह, एक नए पलायन-योजना की संभावना।
व्यवहारिक takeaway (संक्षेप)
हमारा जीवन भी मंदिर-भाव की तरह है—आत्म-विश्वास और धर्म के प्रति निष्ठा बनाए रखना परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप होता है। कठिन दौरों में भी परमेश्वर की योजनाओं में विश्वास बनाए रखना चाहिए, ताकि विनाश के बाद भी पुनर्निर्माण और आशा की राह खुलती रहे।
मुख्य पंक्ति का सार: इस वचन में दिखती है कि मानव भूमिका में विवेक और परमेश्वर के साथ ईमानदारी का मेल जरूरी है; अविश्वास और हिंसा ruins बनाते हैं, परन्तु परमेश्वर की योजनाएं थमती नहीं हैं और पुनर्निर्माण की राह हमेशा खुली रहती है।