Old Testament
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2 राजाओं 24:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने उसके विरुद्ध और यहूदा को नाश करने के लिये कसदियों, अरामियों, मोआबियों और अम्मोनियों के दल भेजे, यह यहोवा के उस वचन के अनुसार हुआ, जो उसने अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा था।
2 राजाओं 24:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 24:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 35:11 (HINIRV) »
परन्तु जब बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने इस देश पर चढ़ाई की, तब हमने कहा, 'चलो, कसदियों और अरामियों के दलों के डर के मारे यरूशलेम में जाएँ।' इस कारण हम अब यरूशलेम में रहते हैं।”

2 राजाओं 23:27 (HINIRV) »
यहोवा ने कहा था, “जैसे मैंने इस्राएल को अपने सामने से दूर किया, वैसे ही यहूदा को भी दूर करूँगा; और इस यरूशलेम नगर, जिसे मैंने चुना और इस भवन जिसके विषय मैंने कहा, कि यह मेरे नाम का निवास होगा, के विरुद्ध मैं हाथ उठाऊँगा।

2 राजाओं 6:23 (HINIRV) »
तब उसने उनके लिये बड़ा भोज किया, और जब वे खा पी चुके, तब उसने उन्हें विदा किया, और वे अपने स्वामी के पास चले गए। इसके बाद अराम के दल इस्राएल के देश में फिर न आए।
सीधे सार का कथन
यहोवा ने यहोदा के विरुद्ध कई देशों के सैनिक भेजकर उसकी सेना और देश की सीमा-नाश करने की योजना को पूरा कराया। यह उनकी कथा-पूर्व चेतावनियों के अनुसार हुआ, जिन्हें दास भविष्यद्वक्ताओं ने कहा था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
2 राजाओं 24 अध्याय वह समय बताता है जब हुआ था कि यहूदा पर आक्रमण बढ़ता गया। परमेश्वर ने यहूदा के नेताओं के अविश्वास, पूजा-निष्ठा में कमी और नीतियों के कारण उद्धार की राह को अवरुद्ध कर दिया। यहाँ कहा गया है कि कसदियों, अरामियों, मोआबियों और अम्मोनियों के साथ मिलकर एक बहु-देशीय आक्रमण हुआ—यानी बाहरी शक्तियाँ एक साथ बढ़कर यहुदा के विरुद्ध उठीं। यह वही क्रम है जिसे परमेश्वर ने पूर्व-चेतावनी के रूप में अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के मार्फ़त कहा था।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
धार्मिक विचारधारणा के संकेत
यह Passage चेतावनी देता है कि समृद्ध राजनीतिक योजनाओं के पीछे आत्म-निष्ठा और परमेश्वर की दिशा की कमी से बड़े संकट उभरते हैं। परमेश्वर अपने वचनों के अनुसार कार्य करते हैं, और भविष्यद्वक्ताओं के संदेशों को स्मरण रखना जरूरी है।
रूपरेखा और क्रॉस रेफरेंस
संस्थागत पाठ पर कुछ तात्पर्यपूर्ण cross-references का संक्षिप्त संकेत:
इन संदर्भों से समझ आता है कि परमेश्वर की योजना में देश की रीति-नीति और विश्वास की स्थिरता कितनी अहम है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण से संकलित व्याख्या
मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सामान्य विचार यह संकेत देते हैं कि यह घटनाक्रम परमेश्वर की ओर से एक चेतावनी-प्रतिक्रिया है: जब लोग अपने परमेश्वर से विमुख होते हैं, तब वे बाहरी शक्तियों के दबाव के अधीन होते हैं। उनके अनुवर्ती बिंदु सरल हैं—आत्म-निष्ठा और ईश्वर-केन्द्रित मार्ग को फिर से अपनाने से ही उद्धार संभव है। नीचे उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं:
“The Lord stirred up against him the spirit of the king of Assyria” (अर्थात यहोवा ने अभी-भी देश के साथ मन में जागरूकता डालकर निर्णय लिया) — हेनरी का सार यह है कि नतीजे परमेश्वर के इरादों के अनुसार होते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य यह सिखाता है कि परमेश्वर के वचन के अनुसार बर्ताव न करने पर आक्रमण और दुष्कराई घटती है। विश्वास में स्थिरता बनाए रखना, और अपने दायित्वों को ईश्वर की दृष्टि से देखना आवश्यक है। धार्मिक प्रथाओं में संतुलन और निष्ठा बनी रहे तो परमेश्वर की सहायता मिलती है।