Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 13:19 का मुख्य विचार
लालसा का पूर्ण होना भीतर की संतुष्टि देता है, परन्तु बुराई से हटना मूर्खों के प्राण को चुभ देता है। यह पद सचेत करता है कि वास्तविक सुख वह है जो नैतिक दिशा में चलकर मिलता है, न कि छल-बल या दुराचार से। अंतिम सुख और शांति सत्य और पवित्रता के मार्ग पर रहती है, जबकि लालच और गलत रास्ता अंततः व्यक्ति को ही चोट पहुँचाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यह एक नैतिक व्यंग्य है जो मानवीय आकर्षणों को दर्शाता है: लालसा कितनी भी मीठी क्यों न लगे, उसका परिणाम जीवन के नैतिक ढांचे के विरुद्ध हो सकता है। इस श्रेणी में तुलनात्मक रूप से, पंक्ति कहती है कि शुद्ध अंत नहीं बल्कि आचरण की अच्छाई भी एक प्रकार का मूल्य है जो अंततः मूर्खता को उजागर कर देता है।
theological significance
कवच के रूप में यह बताता है कि परमेश्वर के साथ जीवन जीने की राह पर संतोष और धारण शक्ति आती है, जबकि अविचारपूर्ण लालच अंतःस्थ पर हानिकारक हो सकता है। बुराई से दूर होना न केवल बाहरी नैतिक आदेश का पालन है, बल्कि आंतरिक शांतिपूर्ण विवेक को बनाए रखना है।
Cross-references (संक्षेप में)
व्याख्यात्मक सम्बद्धता: इन संदर्भों में यह दिखता है कि आंतरिक चाहतें और बाहरी संदिग्ध व्यवहार दूसरे लोगों के साथ और परमेश्वर के साथ हमारे संबंधों को प्रभावित करते हैं।
आत्मिक प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 13:19 हमें बताता है कि सच संतोष वह है जो दुष्कर्म से दूर रहकर मिलता है। लालसा पूरी हो या न हो, उसका वास्तविक मूल्य तब ठहरता है जब हम ईमानदारी और नैतिकता के मार्ग पर चलें। परमेश्वर की दृष्टि में वही सुख अमूल्य है जो स्वच्छ विवेक और प्रेमपूर्ण व्यवहार से उपजता है।
प्रसंगिक उद्धरण (quotes from public-domain commentators)
इस पद के विचार पर मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के पारंपरिक विवेचनाएं ने निम्न बिंदुओं को प्रस्तुत किया है:
“A wise man does not indulge in every rash longing; he restrains himself and seeks true felicity in righteousness.”
इन प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचारों का सार यह है कि आंतरिक शांति और ईमानदार आचरण ही वास्तविक लाभ देते हैं, जबकि लालच या निन्दनीय इच्छाएं मानवीय जीवन को बिखेर देती हैं।