नीतिवचन 13:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

आलसी का प्राण लालसा तो करता है, परन्तु उसको कुछ नहीं मिलता, परन्तु कामकाजी हष्ट पुष्ट हो जाते हैं।

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नीतिवचन 13:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 13:4 पर संक्षिप्त मायने

इस पद का सरल सार यह है: आलसी व्यक्ति लालसा करते हैं, किन्तु मेहनत न करने से उन्हें कुछ नहीं मिलता; वहीं मेहनती और कर्मशील व्यक्ति अपनी जीविका और स्थिति को ऊँचाई तक ले जाते हैं। स्पष्ट सन्देश यह है कि इच्छा-भरी बुद्धि से अधिक महत्वपूर्ण है प्रयत्न और अनुशासन।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

नीतिवचन की पुस्तक में आम तौर पर जीवन के व्यवहारिक वचन दिए गए हैं। यह विशेष श्लोक श्रम और श्रम-निष्ठा की महत्ता पर जोर देता है। संदिग्धता के बजाय व्यवहारिक अनुभव से प्रेरित शिक्षा है: इच्छा के पीछे कर्म का क्रम आवश्यक है। यह भी संकेत देता है कि आलसीपन अंततः जीवन की वास्तविकताओं से बेखबर कर देता है, जबकि परिश्रम से शरीर स्वस्थ रहते हैं और समर्थ बनते हैं।

व्याख्या के प्रमुख विचार

  • लालसा बनाम कार्य: लालसा रखना पक्का है, पर संतुष्टि और आत्म-विश्वास के लिए कर्म जरूरी है।
  • शारीरिक और नैतिक स्वास्थ्य का सम्बन्ध: जो लोग मेहनत करते हैं, वे न केवल आहार-प्राप्ति में सफल होते हैं, बल्कि उनके जीवन में स्थिरता और आत्म-नियंत्रण भी आता है।
  • अपेक्षा बनाम परिणाम: भरोसा केवल चाहना में न रहे, कर्म से परिणाम प्राप्त होते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ

नीतिस tort: 6:6-11—धान्य-परिश्रम और अति-स्वार्थीपन की चेतावनी देता है; प्रार्थना के साथ कर्म का संयोजन समझाने में मदद मिलती है।

नीतिवचन 10:4—परिश्रम से धन की वृद्धि; अवकाश से कमी। यह श्लोक समान संदेश देता है कि सक्रियता और श्रम ही सफलता का मार्ग हैं।

यीतम 2:7—परिश्रम की महत्ता का एक नैतिक संकेत, जहाँ कर्मशीलता के बिना ज्ञान पर्याप्त नहीं मानती।

इन संदर्भों से एक बात स्पष्ट होती है: यह नीति साधारण-सी है—जो कुछ भी पाना है, उसके लिए कठिन परिश्रम आवश्यक है; आलसीपन केवल दामन पर ठहरा रहता है।

कार्य-निष्कर्ष (Practical Takeaway)

  • अपेक्षाओं के साथ ठोस कदम उठायें: छोटे लक्ष्य बनाकर नियमित मेहनत करें।
  • स्वास्थ्य और अनुशासन एक-दूसरे के समर्थक बनें: सक्रिय जीवनशैली से स्वास्थ्य और आत्म-विश्वास बढ़ते हैं।
  • आलस्य से बचें: नित्य-नियमित कार्यसूची से आलस्य के अवसर घटते हैं।

कथन-संदेश का समेकित सार

नीतिवचन 13:4 हमें यह सिखाता है कि सिर्फ इच्छा करना पर्याप्त नहीं है; परिणाम के लिए कर्म की आवश्यकता है। मेहनत आपको नयी स्थिति और आत्म-विश्वास से भर देती है, जबकि आलस्य आपको पीछे छोड़ देता है। इस दृष्टिकोण में एक संतुलित जीवन-नीति निहित है: चाहना और उसे पूरा करने के लिए अनुशासनात्मक कर्म।

महत्वपूर्ण उद्धरण (एच.एम., ए.बी., ए.सी. से मिलते-जुलते विचार): “जो कुछ भी चाहो, उसके लिए ठोस काम चाहिए।” यह विचार शुद्ध तौर पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विश्लेषणों के भीतर संगत रूप से प्रस्तुत होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 13:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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