Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 26:19 का अर्थ
यह पद दर्शाता है कि चापलूसी या मजाक के बहाने किसी पर धोखा देना सचमुच का ठगना है। जब व्यक्ति कहता है कि “मैं तो मजाक कर रहा था” तो वह अपने क्रियाकलाप की जवाबदेही से भाग नहीं सकता; सच तो यह है कि वह धोखे के अंश को स्वीकार न करके परमेश्वर के सामने अपनी मानहानि बढ़ाता है। यह उद्धारक-धरोहर के भीतर भी एक चेतावनी है कि झूठ और उपहास से किए गए धोखे रिश्तों को खोखला कर देते हैं।
पार्श्व-प्रसंग (Contextual background)
नीतिवचन में व्यभिचार, घृणा, और धोखाधड़ी जैसी आंतरिक बुराइयों के विरुद्ध सचेत कर इसे व्यवहारिक रूप में देखने को कहा गया है। 26वें अध्याय में ऐसे कर्मों का परिणाम–खोई हुई विश्वसनीयता, सामाजिक संदिग्धता और परमेश्वर के साथ दूरी–उल्लेखित है। इस पद में अनुभवजन्य नुक्ते की धमकी है: जो किसी को धोखा देता है, उसका मजाक बनाकर दावा करना कि वह मजाक कर रहा था, वह भी उसी दायरे के भीतर आता है जिसमें ईमानदारी नहीं है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ (Observations)
छोटी थीमैटिक सूची (Key themes)
अन्य प्रासंगिक संदर्भ (Related passages) और उनका संक्षेप
नितियों 12:22— ईमानदारी के साथ व्यवहार न करनाचिह्न देता है कि चापलूसियों के बगैर समाज कैसे स्थिर रहता है; झूठ के विरुद्ध स्पष्ट चेतावनी।
याकूब 4:11— अपने भाई के विरुद्ध आलोचना करने से पहले मौन रहें; दाग-धब्बों के बिना भी शब्द चोट पहुँचा सकते हैं, इसलिए चयनित शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
मीका 7:5— मित्र के आचरण के बारे में सतर्क रहना; धूर्तता और शरारत से बचना जरूरी है, ताकि विश्वास बना रहे।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कैसे न्याय करें? अपने शब्दों की सतह पर नहीं, बल्कि उनके गहरे प्रभाव पर विचार करें। यदि कोई कहे, “मैं मजाक कर रहा था,” तब भी उसकी तैयारी—क्यों और कैसे बोला गया—यह देखना आवश्यक है कि क्या वह जवाबदेही से बच रहा है। सच्चे प्रेम में, पड़ोसी के प्रति ईमानदारी और सम्मान सर्वोपरि है।
आखिरी रीडिंग
यह पद हमें स्मरण दिलाता है कि भले ही हम मजाक के नाम पर कुछ कह दें, परमेश्वर के सामने हमारे शब्दों की जवाबदेही है। सत्य के साथ व्यवहार ही प्रेम और भरोसे को बनाता है।
उद्धरण संकेत (Quoted insights from public-domain commentaries)
Matthew Henry से एक सामान्य बिंदु: चित्त की गहराई और शब्दों के परिणाम—“A man may have a jest and a jest may be evil.”
Albert Barnes से सार: झूठी निष्कर्षणा और मजाक के झूठे त Fork—“He that speaks falsely of his neighbor bridges the bond of amity.”
Adam Clarke से संक्षेप: धोखे को मजाक में छिपाने से भी दायित्व मिटता नहीं; शब्दों की परख जरूरी है।
मुख्य उद्धृतियाँ: ουक्तव्य वस्तुकालीन प्रवचन से संकलित हैं; विशिष्ट पंक्तियों का पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।