Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 26:1 नीतिवचन 26:2 नीतिवचन 26:3 नीतिवचन 26:4 नीतिवचन 26:5 नीतिवचन 26:6 नीतिवचन 26:7 नीतिवचन 26:8 नीतिवचन 26:9 नीतिवचन 26:10 नीतिवचन 26:11 नीतिवचन 26:12 नीतिवचन 26:13 नीतिवचन 26:14 नीतिवचन 26:15 नीतिवचन 26:16 नीतिवचन 26:17 नीतिवचन 26:18 नीतिवचन 26:19 नीतिवचन 26:20 नीतिवचन 26:21 नीतिवचन 26:22 नीतिवचन 26:23 नीतिवचन 26:24 नीतिवचन 26:25 नीतिवचन 26:26 नीतिवचन 26:27 नीतिवचन 26:28



नीतिवचन 26:18 का सरल अर्थ
इस पद में कहा गया है कि बेमतलब नilled या ऊधम करने वाला व्यक्ति ऐसे शब्दों से भ्रम फैलाता है मानो जहरीला तीर चुभा दे। इसका सामान्य अर्थ है—कथन, तर्क या क्षोभपूर्ण आचरण से अनजाने में भी दूसरों को नुकसान पहुँचाने का खतरा रहता है; बिना ठोस कारण के अंर्तदृष्टि, उन्माद या छल से फैलाने वाले वचन लोगो को चोट पहुँचाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन के ये चमत्कारिक चौकस श्लोक जीवन के दैनिक व्यवहार में विचारों के प्रभाव को उजागर करते हैं। पहेली-सी बातें जो वातावरण में घुल सकती हैं, वे कितनी शत्रुतापूर्ण, भड़काऊ या आवेशपूर्ण हो सकती हैं—यह बताता है कि टकराव या चुगली से भीषण परिणाम निकल सकते हैं। यह मूल बात है कि मौन या फुसफुसाहट भी तीर की तरह चोट पहुँचा सकती है, खासकर जब यह बेबुनियादी प्रशंसा या दोषारोपण के रूप में हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- मूर्खता और उकसाने वाला बोली-चाल: अशांत मनोभाव रखने वाला व्यक्ति शब्दों से उद्देश्यपूर्ण भ्रम पैदा कर सकता है।
- जिम्मेदारी की कमी: बिना सोचे-समझे कहा गया हर शब्द किसी पर तीर की तरह लग सकता है; उद्धार या चेतावनी की जगह चोट का कारण बन सकता है।
- सामाजिक प्रभाव: ऐसी लोक-चाल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समूहों में भय, distrust, और दूरी बढ़ाती है।
छोटा थीमैटिक सूचि
अन्य सुसंगत ग्रंथानुसार संबंध (Cross-References)
नीतिसं 17:28 — मौन रहने से बुद्धिमानी भी प्रकट होती है; तर्क-वितर्क को अधिक गर्म न करके समय पर चुप रहना लाभदायक हो सकता है।
याकूब 3:5–6 — तंजों और अजीबो-गरीब वाणी प्रभावशाली हैं, क्योंकि जीवन की भाषा ही जीवन देता है या नष्ट कर देती है; दायित्वपूर्ण बोली से संपूर्ण समाज प्रभावित होता है।
सभोपदेशक 10:20 — कभी-कभी पागलपन भरे शब्द भी आहत कर देते हैं, इसलिए मौन का चयन बुद्धिमान विकल्प है जब स्थिति अस्पष्ट हो।
हिंदी हिनिर्व अनुवाद के साथ संकलन
यह श्लोक बताता है कि बिना सोचे-समझे, उकसावे से भरे शब्द किसी के मन को चुभाकर चोट पहुँचा सकते हैं—यही कारण है कि तर्कों को संयम से, सत्य की कसौटी पर परखकर कहना चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
कहानी के किसी पल में जब मन उग्र हो, तब शब्दों को रोकना बेहतर है। अगर बात सामने आ जाए, तो सत्य और प्रेम की भाषा अपनाएं: दयालुता से जवाब दें, न कि गुस्से या गप-शप से औरों को चोट पहुँचाने दें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संदर्भित प्रकाशनों से): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से—इनमें से कुछ विचार इस प्रकार मिलते हैं: तैरते हुए शब्द न चले, जिन्हें निशाने पर रखा गया है, वे किसी की शांति छीने नहीं।