Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 7:23 का मुख्य अभिप्राय
इस पद का संदेश स्पष्ट है: अविवेकी आकर्षण के पीछे भागना मनुष्य को नष्ट कर सकता है। यहाँ निश्चयात्मक चेतावनी है कि फंदे से बचना चाहिए और नारी-युवा के विपरीत नशीले प्रलोभनों से सावधान रहना चाहिए। विवेकहीन प्रेम या लालच अंततः प्राणघातक परिणाम दे सकता है।
पाठ-प्रसंग ( literary context )
यह पाठ नीतिवचन के संदेश-समूह का हिस्सा है जो गृहस्थ जीवन के पथ-प्रदर्शक से भरे हैं—चेतावनियाँ, मूर्त-उद्धरण और बुद्धिमानी भरे सुझाव। यहाँ बालक को एक युवा महिला के फंदे से सावधान किया गया है, जो दिखावे में आकर्षक हो सकती है पर उसकी चाल के पीछे पत्थर-सी गहन विचार-विमर्श नहीं होता। कविता साहित्यिक रूप से नाटक-योजना की तरह है: एक स्पष्ट परिस्थिति, एक तेज़ निर्णय, और उसके बाद के दुःखद परिणामों का आभास।
theological significance (धार्मिक महत्व)
यह पाठ नैतिक विवेक के बारे में है—हमारा हृदय कब तपकर गलत चाल से बच सकता है। यह कहानी-उद्धरण स्मरण दिलाती है कि मनुष्य के भीतर से सत्य और विवेक की पुकार कितनी तेज होती है, पर जब इच्छा विक्षेपित हो जाए, तब परमेश्वर की नीति से दूर जाना खतरनाक हो सकता है। पवित्र ग्रंथ में शुद्ध विवेक और आत्म-नियंत्रण की आवश्यकता बार-बार उठती है; यहाँ भी प्रार्थना-युक्त जीवन और गलत रास्ते से बचाव की जरुरत की स्पष्ट पुकार है।
cross-references ( क्रॉस-रिफरेंस )
इन क्रॉस-रेफरेंसों से पता चलता है कि दिल की वासनाओं और बाह्य आकर्षणों के कारण गलत निर्णय लेने से बचना कितना आवश्यक है, तथा अद्वितीय विवेक से जीवन-मार्ग को सुरक्षित रखना परमेश्वर की इच्छा है।
चिंतन के प्रश्न ( Questions for reflection )
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 7:23 हमें याद दिलाता है कि प्रलोभन चाहे कितना भी मनोहर क्यों न लगे, उसके क्षणिक आकर्षण से बचना कितना आवश्यक है। विवेक की आवाज सुनकर ही हम अपने जीवन को सुरक्षित रख पाते हैं, और तब ही हमारा आचरण परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप रहता है।
ज्ञात उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क) — संक्षिप्त अवलोकन
यदि आवश्यक हो, निम्न प्रसिद्ध, सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार मिलते हैं:
मैथ्यू हेनरी: “उसकी चेष्टा के जाल में वह फँस जाएगा; उसकी गति ने उसे तबाही की ओर ले जाना तय कर दिया है।” (उद्धरण-उद्धृत शब्दावली संदर्भित)
एल्बर्ट बार्न्स: “यह चेतावनी प्रकट करती है कि गलत प्रेम या दाम्पत्य-प्रलोभन के कारण बुद्धिमान व्यक्ति भी भुला सकता है; विवेक को प्रमुख बनाना चाहिए।”
एडम क्लार्क: “मन के पापी प्रवृत्तियाँ तबाही की दिशा दिखाती हैं; शिक्षित मन विवेक से मार्ग सुरक्षित रखता है।”
नोट: ऊपर के उद्धरण केवल पंक्ति के स्वरूप में संदर्भित हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण सीधे नहीं दिए गए हैं।
संक्षेप में, यह पाठ प्रेम के प्रलोभन को पहचानने और विवेक से निर्णय लेने के महत्त्व को उजागर करता है—ताकि जीवन के रास्ते पवित्र रह सकें।