Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 7:1 नीतिवचन 7:2 नीतिवचन 7:3 नीतिवचन 7:4 नीतिवचन 7:5 नीतिवचन 7:6 नीतिवचन 7:7 नीतिवचन 7:8 नीतिवचन 7:9 नीतिवचन 7:10 नीतिवचन 7:11 नीतिवचन 7:12 नीतिवचन 7:13 नीतिवचन 7:14 नीतिवचन 7:15 नीतिवचन 7:16 नीतिवचन 7:17 नीतिवचन 7:18 नीतिवचन 7:19 नीतिवचन 7:20 नीतिवचन 7:21 नीतिवचन 7:22 नीतिवचन 7:23 नीतिवचन 7:24 नीतिवचन 7:25 नीतिवचन 7:26 नीतिवचन 7:27

नीतिवचन 7:20 के संदर्भ में पाठ की व्याख्या
यह पद इस बात को उजागर करता है कि पथभ्रष्टता के लिए आकर्षक झूठ से दूर रहना कितना कठिन है—और फिर भी हर कदम पर प्रलोभन का परिणाम एक समय-सीमा में खुलकर सामने आता है। यहाँ बालक के रिश्तेदार या चालाक प्रेमिका के उद्देश्य से कहे गए आचरण के चित्रण से एक चेतावनी मिलती है: तुरंत लाभ दिखकर भी परम सत्य की राह कितनी बार भटक जाती है। अपार्थिव, यह आगे की कड़ी चेतावनी है कि यद्यपि दुर्लभ लाभ दिखता है, पर उसका परिणाम स्थायी शर्म और दंड का हो सकता है।
साहित्यिक संदर्भ और पंक्ति-आख्यान
नीतिवचन 7 अध्याय में एक चेतावनीपूर्ण कथा-चित्रण है जिसमें एक युवक के लिए एक समय-सारिणी बनती है—यद्यपि वह शत्रुनी आकर्षण है, उसे छोड़ना बुद्धिमानी है। 7:20 में कहा गया वाक्य एक ऐसा क्षण है जब निंदा-व्यवहार के प्रतिफल का पूर्वानुमान स्पष्ट हो उठता है: “वह चाँदी की थैली ले गया है; और पूर्णमासी को लौट आएगा।” यह एक तात्पर्य है कि आचरण के परिणाम समय के साथ खुलते हैं, और यहां प्रस्तुत किया गया लक्षण यह है कि फुसलावे वाले मार्ग में तात्कालिक लाभ दिखे तो भी यह पूर्ण-नुकसान की ओर जाता है।
चर्चित विचार—तरतीबित प्रोवेनेंस और नैतिक हिदायत
कोर theological संकेत
क्या यह कहन केवल नैतिक उपदेश है, या एक बड़े चित्र का हिस्सा है? नीतिवचन में ऐसे संकेत मिलते हैं कि जीवन के निर्णय व निर्णय-जनित परिणाम परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन होते हैं। यहाँ प्रेम-झूठ और क्षणिक लाभ से परे, एक सुविचारित निर्णय की अहमियत उभरती है—जो सत्य पर टिके रहने और विपरीत परिस्थिति में भी सत्यान्वेषी रहने की प्रेरणा देता है।
ग्रंथ-आरोह (Cross-references) और उनके स्पष्टीकरण
1) zषेख संदर्भ: प्रस्थान 20:14—प्रमुख नैतिक आदेशों के अनुरूप निष्क्रियता न मानना, परन्तु पाप से दूर रहने की हिदायत।
2) प्रेरितों के काम 26:29—कठिन परिस्थितियों में भी सच बोलना और ईमानदारी बनाए रखना कैसे तत्काल लाभ के दबाव को मात देता है।
3) मत्ती 6:19-21—धन का भण्डार कभी-भी अनंत शांति नहीं दे सकता; महत्त्वपूर्ण यह है कि हमारा भण्डार कहाँ है, दिल कहाँ है।
इन संदर्भों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि तत्काल लाभ के लिए विवेक छोड़ना समग्र सिद्धान्तों के विरुद्ध है और जीवनभर की राह पर नुकसान दे सकता है।
Reflection के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 7:20 यह स्मरण कराता है कि फुसलाने वाले पथ कभी-भी निष्कामी नहीं होते; वे दिखते तो सरल हैं, पर उनके परिणाम समय के साथ स्पष्ट होते हैं। बुद्धिमानी वह है जो तुरंत लाभ के झांसे में फँसने से बचकर सत्य के मार्ग पर टिके, इसलिए कि पूर्ण-न्याय और शांति अंततः आपके जीवन में पुष्ट हों।
पूर्व-आधार उद्धरण और असलीहरकत
यदि आवश्यक हो, पाठ के विश्लेषण में भगवान के मार्ग के अनुरोध पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों का संक्षेप संदर्भ लिया जा सकता है। (स्थितिानुसार विशिष्ट उद्धरण नीचे नहीं दिखाए जाते, परन्तु उनके वे विचार जो इस पाठ की नैतिकता के अनुरूप हों, सारगर्भित रूप से सम्मिलित किए गए हैं।)