Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 7:25 का मुख्य interpretive बिंदु
इस पद का मूल संदेश है: इनखानेपन और मोहक चालों से सावधान रहें, विशेषकर उन मार्गों से जो आप को विनाश की ओर ले जा सकते हैं। हृदय को ऐसी स्त्री के आकर्षण से बचाने की बुद्धि अपनाइए, ताकि मन और अधर्म के मार्ग पर नहीं बढ़े। यह चेतावनी जीवनपथ को ठहरने और पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है ताकि सत्यान्वेषी विवेक बना रहे।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
विधाते वाक्यों में “उस स्त्री के मार्ग” और “उसकी डगर” एक आत्मीय प्रतीक के रूप में उपयोग हुए हैं। यह केवल एक प्रेम-जोखिम की बात नहीं, बल्कि हर ऐसी स्थिति को सूचित करता है जो मोह, धन, प्रतिष्ठा या अन्य आकर्षणों द्वारा ईमानदारी और विवेक से विचलन कराती है। नीतिवचन में यह प्रकार-परख की शिक्षा है—शब्दों के चयन, चालाकी, और खतरों की पहचान—ताकि युवा मन प्रभु की निष्कपट राह से न डगमगाए।
theological significance (धार्मिक महत्त्व)
यह वचन व्यक्तिगत आचरण की परीक्षा है। बाइबल में स्त्री-पुरुष के संबंधों के नैतिक दिशा-निर्देशों के साथ-साथ आत्मा के मार्गदर्शन का आग्रह मिलता है। सच्ची बुद्धि वह है जो ज्यादातर आकर्षण के क्षणों में भी विवेक बनाए रखे, और परमेश्वर के शब्दों के अनुसार निर्णय ले। इस चेतावनी में ईमानदार आत्मा के लिए सुरक्षा-रेखा है ताकि दुष्कर मार्गों पर अटकने से बचा जा सके।
cross-references (पवित्रशास्त्र के अन्य संदर्भ)
स्पष्ट संकेत यह है कि आकर्षण के मौके पर आत्म-संयम और ईश्वर की राह की दिशा में लौटना ही सूचित बुद्धिमत्ता है, न कि चालाकी से स्थिति से निकलना।
स्थिति-चिंतन के लिए प्रश्न (questions for reflection)
दृष्टिकोण और निष्कर्ष
नीतिवचन 7:25 हमें बताता है कि हृदय की दिशा और निर्णय की स्थिरता परमेश्वर के भय से जुड़ी है। हर मोहक या झकझोर देने वाले आकर्षण से दूर रहने का मार्ग आत्म-नियमन और आत्म-केन्द्रित विवेक पर है—ताकि जीवन की बहुमूल्यता और पवित्रता बनी रहे। कठिनाइयों के समय जिस विवेक की आवश्यकता है, वह प्रार्थना, पवित्र शास्त्र के मार्गदर्शन, और समुदाय के अच्छे साथी की सहायता से पाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: टिप्पणीकारों से मिलते खुले निष्कर्षों के भीतर एक-एक पंक्ति का संक्षेप उद्धरण नीचे दिए गए नहीं हैं, पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रमुख विचार उनके लिए संकेतित हैं: Henry की चिंता—हृदय की गड़बड़ी से बचना; Barnes का नैतिक निर्देश; Clarke की व्याख्या में मोह-वश कहीं भी फँसना नहीं।
समेकित निष्कर्ष: मन को सजग रखें, हर आकर्षण को परखें, और परमेश्वर के मार्ग पर स्थिर रहें—तभी जीवन में सुरक्षा और दिशा मिलती है।