Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीसभोपदेशक 10:5 बाइबल पद की व्याख्या
सभोपदेशक 10:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक बुराई है जो मैंने सूर्य के नीचे देखी, वह हाकिम की भूल से होती है:
सभोपदेशक 10:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 10:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

सभोपदेशक 5:13 (HINIRV) »
मैंने धरती पर* एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात् वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो,

सभोपदेशक 9:3 (HINIRV) »
जो कुछ सूर्य के नीचे किया जाता है उसमें यह एक दोष है कि सब लोगों की एक सी दशा होती है; और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है, और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।

सभोपदेशक 10:5 — मुख्य व्याख्या
इस पद में प्रयुक्त दृश्य एक निवारक चेतावनी है: जहां हाकिम की भूल से एक बुराई उत्पन्न होती है, वहाँ प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय कमज़ोरियाँ सामाजिक असंतुलन को जन्म देती हैं। सूचित करते हुए लेखक बताता है कि सत्ता और निर्णय लेने वाले अधिकारी जब सावधानी और विवेक से विमुख रहते हैं, तब सूर्य के नीचे बुराइयाँ पनप सकती हैं। यह एक सामान्य सत्य है जो हर युग में लागू होता है: गलत निर्णय और अकर्मण्यता सार्वजनिक कल्याण को नुकसान पहुँचाती है।
साहित्यिक संदर्भ (पृष्ठभूमि)
सभोपदेशक की किताब अनावश्यक महत्त्वाकांक्षा, हर्ष, और सांसारिक विरोधाभासों पर टिप्पणी करती है। इस विशेष पद में “हाकिम” से अभिप्राय सत्ता, शासन-प्रशासन और निर्णय-निर्माण में भागीदारी करने वालों से है। लेखक एक कठिन वास्तविकता उजागर करते हैं: शक्ति के व्यवहार में भ्रष्टाचार या भूल से उत्पन्न त्रुटियाँ समाज पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
केंद्रीय theological significance
इस छंद से दृष्टि मिलती है कि सत्ता में भी विवेक, न्याय और सावधानी आवश्यक हैं। परमेश्वर के सामने हर अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति जवाबदेह है, और भूल-चूक के परिणाम समाज पर पड़ते हैं। यह पाठ हमें अहंकार-रहित प्रशासन, स्पष्ट विद्वान-निर्णयों, एवं दयालु शासन की ओर प्रेरित करता है।
भिन्न स्रोतों के संयोग (Cross-references)
इन क्रॉस-रेफरेंसों से स्पष्ट होता है कि सत्ता के सदस्यों के भीतर नैतिक सावधानी और न्यायप्रियता सर्वोपरि है, ताकि सामाजिक संरचना स्थिर और सुरक्षित रह सके।
स्व-विचार के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
सभोपदेशक 10:5 बताता है कि सत्ता के सामने व्यक्तिगत भूलें भी एक सामाजिक संकट का कारण बन सकती हैं। पवित्र लेखन हमें याद दिलाता है कि शासन-व्यवस्था में विवेक, ईमानदारी और परिश्रम आवश्यक है ताकि एक शांत और न्यायपूर्ण समाज बनाए रखा जा सके।
संदर्भ-आधारक टिप्पणी (स्वरूप):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से संक्षेप सार लिया गया है ताकि मौलिक संदेश स्पष्ट रहे। उक्त टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण इस पंक्ति में संलग्न नहीं किये गए हैं, ताकि मूल भाव उजागर रहे।