Old Testament
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सभोपदेशक 10:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मरी हुई मक्खियों के कारण गंधी का तेल सड़ने और दुर्गन्ध आने लगता है; और थोड़ी सी मूर्खता बुद्धि और प्रतिष्ठा को घटा देती है।
सभोपदेशक 10:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 10:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 2:12 (HINIRV) »
इसलिए कि याकूब की ओर से कुछ लोगों के आने से पहले वह अन्यजातियों के साथ खाया करता था, परन्तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उनसे हट गया और किनारा करने लगा। (प्रेरि. 10:28, प्रेरि. 11:2-3)

मत्ती 5:13 (HINIRV) »
“तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इसके कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए।

नहेम्याह 13:26 (HINIRV) »
क्या इस्राएल का राजा सुलैमान इसी प्रकार के पाप में न फँसा था? बहुतेरी जातियों में उसके तुल्य कोई राजा नहीं हुआ, और वह अपने परमेश्वर का प्रिय भी था, और परमेश्वर ने उसे सारे इस्राएल के ऊपर राजा नियुक्त किया; परन्तु उसको भी अन्यजाति स्त्रियों ने पाप में फँसाया।
मुख्य बिंदु
सभोपदेशक 10:1 का संदेश साधारण शब्दों में है: कुछ छोटी-सी मूर्खता भी प्रतिष्ठा और बुद्धि के मूल्य को घटा देती है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ सामान्य हों। मरते हुए मक्खियों की बदबू जैसी यह बात एक तिक्त, पर साफ़ सच बयान करती है कि असमय ग़लत कदमों से भी सूझ-बूझ और सम्मान खिसक सकता है।
कथानक-संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
प्रकरण 10 में नीतिवाक्य और वास्तविक जीवन की हलचल एक साथ आते हैं। यहाँ मक्खियाँ—जो सामान्यतः नापसंद और असामयिक अराजकता का प्रतीक बनती हैं—वहें भी एक उक्ति देती हैं: छोटी-छोटी चीज़ें, जब अनदेखी और लापरवाही से मिल जाएँ, बड़े परिणाम दे जाती हैं। इस संदेश में भी मूर्खतापूर्ण व्यवहार का असर कलात्मक रूप से द्योतक है: एक क्षण की चूक, एक शब्द का गलत उपयोग, या निर्णय-प्रक्रिया में सूझ-बूझ की कमी, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती है।
धर्म-तत्व और थ्योलॉजिकल महत्व
कुशाग्र बुद्धि और सम्मान सामान्यतः एक साथ चलते हैं, परन्तु यहाँ पूर्वकथित “थोड़ी-सी मूर्खता” प्रतिष्ठा को गिराती है—यह दर्शाता है कि नैतिक जीवन और सामाजिक सम्मान एक सुविचारित, संयमित जीवन से ही समर्थित होते हैं। यह संदेष, पुराने नियम के नैतिक ढांचे के अनुरूप है: चरित्र की स्थिरता और निर्णय-प्रक्रिया में विवेक दोनों जीवन के वास्तविक मूल्य हैं।
ग्रंथ-परिचय और cross-references
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि बुद्धिमत्ता, संयम और प्रतिष्ठा तीनों एक दूसरे पर निर्भर हैं: दृष्टि स्पष्ट हो तो कार्य प्रभावी रहते हैं; अन्यथा छोटा-सा त्रुटि-चिह्न भी बड़े परिणाम दे सकता है।
प्रतिबिंब प्रश्न (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वाक्य का पाठ सिखाता है कि बुद्धिमत्ता और प्रतिष्ठा एक साथ स्थिर रहते हैं जब विवेकपूर्ण आचरण सक्रिय रहता है। छोटी मूर्खता भी बड़े परिणाम दे सकती है—इसलिए हर क्रिया में समझदारी, संयम और सावधानी अनिवार्य है।
उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षेप पंक्तियाँ
यह शाब्दिक अनुदेशन सभा-टिप्पणियों में संकलित विचारधारा के अनुसार है। (नोट: नीचे दिए शब्द-चिह्न केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण-पत्र नहीं हैं।)
मैथ्यू हेनरी से सटीक उद्धरण: उपलब्ध नहीं।
एल्बर्ट बर्न्स से सटीक उद्धरण: उपलब्ध नहीं।
ऐडम क्लार्क से सटीक उद्धरण: उपलब्ध नहीं।