Old Testament
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सभोपदेशक 10:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसकी बात का आरम्भ मूर्खता का, और उनका अन्त दुःखदाई बावलापन होता है।
सभोपदेशक 10:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 10:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 29:9 (HINIRV) »
जब बुद्धिमान मूर्ख के साथ वाद-विवाद करता है, तब वह मूर्ख क्रोधित होता और ठट्ठा करता है, और वहाँ शान्ति नहीं रहती।

1 शमूएल 25:10 (HINIRV) »
नाबाल ने दाऊद के जनों को उत्तर देकर उनसे कहा, “दाऊद कौन है? यिशै का पुत्र कौन है? आजकल बहुत से दास अपने-अपने स्वामी के पास से भाग जाते हैं।

1 शमूएल 22:7 (HINIRV) »
तब शाऊल अपने कर्मचारियों से जो उसके आस-पास खड़े थे कहने लगा, “हे बिन्यामीनियों, सुनो; क्या यिशै का पुत्र तुम सभी को खेत और दाख की बारियाँ देगा? क्या वह तुम सभी को सहस्रपति और शतपति करेगा?
क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
सभोपदेशक 10:13 का यह संक्षिप्त वाक्य जीवन की व्यावहारिक बुद्धि पर तेज़ रोशनी डालता है: आवेगहीन, गैर-समझदार शुरुआत अक्सर बुरा परिणाम लाती है। यह वचन हमें किसी भी निर्णय या बोलचाल में सोच-समझ कर कार्य करने की आवश्यकता याद दिलाता है।
मूल संदर्भ
सभोपदेशक का लेखक कुछ अनुभवों और निरीक्षणों से भरपूर है; वह जीवन के विडंबनाओं, मानव व्यवहार और परिणामों पर विचार करता है। 10:13 में वह मूर्खता और बावलापन—दो तरह के पृथक, पर परस्पर जुड़े दोष—की तुलना करता है। यहाँ "बावलापन" से तात्पर्य है उस व्यवहार का जो पछतावे, संकट या सामाजिक अपमान के साथ समाप्त होता है। यह वाक्य उस सामान्य विषय में बैठता है कि हृदय और वचन का स्वभाव अति महत्वपूर्ण है और अचानक, असावधान आरम्भों के फल अक्सर कड़वे होते हैं।
मुख्य संदेश
संक्षेप में: यदि कोई कार्य या वचन मूर्खतापूर्ण रूप से प्रारम्भ होता है—बिना विवेक, परिपक्वता और परिश्रम के—तो उसके परिणाम दुःखद अथवा अपमानजनक होंगे। यह चेतावनी सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक आयाम रखती है। शुरुआत ग्रन्थि बन सकती है: अच्छी योजना, संयम और परामर्श आवश्यक हैं ताकि अंत फलदायी हो।
समर्थक बाइबिल विषय
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंस
निम्न शास्त्रियाँ इस वचन से सम्बन्ध रखती हैं और समझ को गहरा करती हैं:
विशेष उद्धरण (संदर्भ के लिए)
Matthew Henry की शैली में किए गए टिप्पणियों का सार प्रायः यही है कि आरम्भ का स्वभाव अन्त को प्रभावित करता है; Albert Barnes और Adam Clarke भी मूर्खता के सामाजिक और आध्यात्मिक परिणामों पर जोर देते हैं। (यहाँ सीधे उद्धरण आवश्यक न होने पर संक्षेप में विचार अनुकूलित रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।)
अनुप्रयोग और उपासना
व्यावहारिक रूप से यह पद हमें निम्न बातों के लिए प्रेरित करता है:
ध्यान में रखें कि छोटा सा आरम्भ भी जब बुद्धि और विनम्र परामर्श के साथ हो तो बड़ा भला ला सकता है। प्रभु से बुद्धि और धैर्य की प्रार्थना करें, ताकि हमारे आरम्भ संतुलित हों और उनका अंत प्रभु की शांति और फलदायीता बने।