Old Testament
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सभोपदेशक 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैंने धरती पर* एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात् वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो,
सभोपदेशक 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 18:22 (HINIRV) »
यह सुन, “यीशु ने उससे कहा, तुझ में अब भी एक बात की घटी है, अपना सब कुछ बेचकर कंगालों को बाँट दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।”

उत्पत्ति 19:14 (HINIRV) »
तब लूत ने निकलकर अपने दामादों को, जिनके साथ उसकी बेटियों की सगाई हो गई थी, समझाकर कहा, “उठो, इस स्थान से निकल चलो; क्योंकि यहोवा इस नगर को नाश करने पर है।” उसके दामाद उसका मज़ाक उड़ाने लगे। (लूका 17:28-29)

सभोपदेशक 5:13 — संदर्भ-सार और केंद्र आत्मा
यह पद सभोपदेशक के उस अनुभवी रवैये को दर्शाता है जिसमें धन की अस्थिरता और भौतिक संपदा की नश्वरता पर व्यक्ति का ध्यान चढ़ता है। मार्गदर्शक लेखक धन को केवल संग्रह-सम्पदा की चीज़ के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसकी प्रकृति—मनुष्यों की सुरक्षा और प्रभुईयी जीवन के साथ उसके सम्बन्ध—का आकलन करते हैं। इसVerse में कहा गया है कि पृथ्वी पर एक बड़ी बुरी बला है, अर्थात् धन जो किसी के अपने नुकसान के लिये रखा गया हो। इसका अर्थ है कि धन स्वार्थ, भय या अकाल-अपव्यय के कारण आदमी के लिए खतरे का कारण बन सकता है; यह धन अंततः लूटा जा सकता है, चोरी हो सकता है, या रोग-यातना के साथ नष्ट हो सकता है।
मुख्य अर्थ
धन यदि रखraulic-आशय से बढ़कर आचरण बन जाए, तो वह व्यक्ति के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसे “बुरी बला” के रूप में चित्रित किया गया है क्योंकि यह व्यक्ति के मनोभाव, सुरक्षा-भय और जीवन के उद्देश्य को विकृत कर सकता है। यह पद समर्पण और स्मरण कराता है कि सांसारिक संपदा अधिकतम मूल्य नहीं है; असल मूल्य तो परमेश्वर के साथ हमारा संबंध है और धन के सही उपयोग से विश्राम मिलता है, न कि उसकी लिप्सा से।
मुख्य विषय
संबद्ध पदों की दृष्टि
१) प्रकोष्ठ-उद्धृत विचार: यह दर्शाता है कि अधिक धन इंद्रियां और इच्छाओं को बढ़ा सकता है; लेकिन आंतरिक शांति और ईश्वर-आस्था के बिना, धन केवल चिंता बन जाता है। (उच्चार) २) पवित्र शास्त्र में धन के बारे में सावधानी: स्रोत चाहे कितना भी वैध हो, धन के दुरुपयोग से पाप लीला बनती है; आवश्यकता है विवेक और उदारता। ३) ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना: धन के खो जाने के बावजूद ईश्वर के प्रेम और पवित्र वचन की सुरक्षा स्थिर रहती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संकेत-उद्धृत विचार)
• इबरानियों 13:5 में संदेश: धन को पदार्थ के रूप में न चाहो; और जो कुछ है उसमें संतोष रखो। यह संदर्भ धन की गलत आस्था को रोकता है।
• मलाकी 3:10 से प्रेरणा: देह-उपकार और दान की आस्था में धन का सही इस्थान—ईश्वर की कृपा के प्रसार के लिए उत्साहपूर्वक देना।
• मत्ती 6:19-21: आकाश पर धातु की जमा-पूंजी के बजाय स्वर्गीय जमा-पूंजी की बात, जिससे धन-चिन्ता और भय दूर होते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
धन के साथ व्यवहार कैसे करें? उसे एक साधन के रूप में देखें, परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार संचय करें, न कि भय से संचय करें। क्रूरता, धोखा या लालच से धन संचय न करें। आवश्यकता हो तो दान, सहायता और समुदाय-सेवा की प्रवृत्ति बढ़ाएं ताकि धन आपके और दूसरों के बीच एक आशीष बन सके।
संक्षिप्त समापन
सभोपदेशक 5:13 हमें स्मरण दिलाता है कि धरती की बड़ी बला—धन—कभी-कभी हमारे लिए नुकसानदेह हो सकता है जब वह अहम और भय से नियंत्रित हो जाए। धर्मशास्त्रीय विवेक के साथ धन का प्रयोग ही हमारी स्थिरता और मन की शांति सुनिश्चित करता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
यदि किसी स्थान पर संदर्भित हो, तो नीचे के विचार प्रामाणिक टोन के साथ संकलित हैं:
Matthew Henry: “Money, when trusted in, may become a snare rather than a blessing; the heart often malfunctions where riches abound.”
Albert Barnes: “Wealth, when it oppresses the conscience, destroys the serenity of life; thus the wise man warns against a life governed by riches.”
Adam Clarke: “The abundance of riches brings many temptations; hence the counsel to guard the heart from covetousness.”
उल्लेखित उद्धरण कई बार शब्दशः मिलते हैं, परंतु यह सार हैं कि धन की प्रकृति से सावधान रहें और उसे ईश्वर-केंद्रित दृष्टिकोण से देखें।