Old Testament
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सभोपदेशक 5:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तो भी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
सभोपदेशक 5:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 4:8 (HINIRV) »
मैं शान्ति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को निश्चिन्त रहने देता है।

भजन संहिता 127:2 (HINIRV) »
तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और कठोर परिश्रम की रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद प्रदान करता है।

सभोपदेशक 5:12 पर commentary — श्रम का संतोष बनाम धन की चिंता
यह व verse दर्शाता है कि परिश्रम करनेवाला चाहे कम खाए या अधिक, उसकी नींद सुखद होती है; परन्तु धन के बढ़ने से अक्सर आदमी को नींद नहीं आती. यह संदेश आधुनिक जीवन में भी अत्यंत प्रासंगिक है—धन और सफलता के पीछे दौड़ में मनुष्य अक्सर शांति, संतुष्टि और भरोसे की कमी अनुभव करता है। लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि वास्तविक शांति, भूख से नहीं, बल्कि भगवान के नीचे निर्भरता और अपने काम के परिणामों के स्वस्थ संतुलन से आती है.
पार्श्विक संदर्भ और मूल संदर्भ
सभोपदेशक (कुहालन) लेखक जीवन के विविध अनुभवों का अनुभव-सार प्रस्तुत करता है—कठिन परिश्रम, सफलता, प्रयोग और उसके अंत में मृत्यु। यह शास्त्र सतत परिश्रम और धन-संपदा के बीच के तनाव को दिखाता है। विशेष रूप से इस वचन में वे धन की बढ़ोतरी के कारण होनेवाली चिंता और बेचैनी की ओर इंगित करते हैं, जो अक्सर पर्याप्त भोजन या आराम के बावजूद बना रहता है।
मुख्य संदेश
प्रमुख थीम्स और धारणा
बाइबल में परिश्रम को प्रमुख रूप से अच्छी बात माना गया है, परंतु धन-उद्योग का सार उसकी आत्मा में शांति नहीं देता जब वह आत्मविश्वास और निर्भरता ईश्वर से नहीं जुड़ती। यह वचन मानव को स्मरण दिलाता है कि जीवन की वास्तविक सुरक्षा ईश्वर के हाथों में है, और काम के साथ एक संतुलित आचरण आवश्यक है—सोना-चाँदी का बढ़ना जीवन को खुशहाल नहीं बनाता जब मनुष्य भीतर से संतुष्ट नहीं है।
क्रॉस-रेफ़रेंसे (Cross-References) — संक्षिप्त व्याख्या
एलायन-हेरोसी उद्धरण नहीं; केवल संदर्भ
क्या कहता है प्रसिद्ध टिप्पणीकार — सार-संक्षेप
महत्वपूर्ण विचार: Matthew Henry और Albert Barnes तथा Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के अनुसार इस वचन में परिश्रम-आस्था के संतुलन की आवश्यकता है—परिश्रम से मिली सुविधा मन को नहीं गद्गद कर सकती; असली सुरक्षा ईश्वर की कृपा और दायित्वपूर्ण जीवन से आती है। Henry कहते हैं कि धन बढ़ना अक्सर निर्भरता को कम कर मानव-स्वामित्व की झलक देता है; Barnes और Clarke भी यह संकेत करते हैं कि धन जीवन की सुरक्षा नहीं देता, बल्कि आवश्यकता-निवारण में मदद करता है, और नींद में शांति बनाये रखना Eashwar की व्यवस्था पर निर्भर है। (उद्धरण संरक्षित रूप में संक्षेप में: Henry, Barnes, Clarke के विचारों से यह संवेदित commentary का सार है; पूर्ण पाठ के लिए उनके प्रचलित-commentaries देखें।)
देवotional reflection (आध्यात्मिक अभ्यास)
सोचिए: आज आपके जीवन में कौन-सी चीज़ आपको नींद से वंचित कर रही है—अत्यधिक पैसा, सफलता, या आर्थिक चिंताएं? जब आप ईश्वर की व्यवस्था में अपने काम को सौंपते हैं, तो परिश्रम की भी नींव स्थिर रहती है और धन चाहे कितना भी बढ़े, आपकी शांति बनी रहती है। इस वचन को अपनी दैनिक प्रार्थना में शामिल करें: “हे परमेश्वर, मुझे सच्चे आराम में रहने की चेष्टा दें—मेरी आवश्यकताओं के अनुसार काम करने की क्षमता और तटस्थ विश्वास।”
मुख्य शिक्षा: सरल जीवन, निष्ठा से किया गया परिश्रम और ईश्वर-निर्भरता—यही शांति का स्रोत है।