Old Testament
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सभोपदेशक 5:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से यह भी व्यर्थ है।
सभोपदेशक 5:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 6:10 (HINIRV) »
क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है*, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटककर अपने आपको विभिन्न प्रकार के दुःखों से छलनी बना लिया है।

मत्ती 6:24 (HINIRV) »
“कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से निष्ठावान रहेगा और दूसरे का तिरस्कार करेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।

लूका 12:15 (HINIRV) »
और उसने उनसे कहा, “सावधान रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो; क्योंकि किसी का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता।”
सभोपदेशक 5:10 का सार भाव
जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से यह भी व्यर्थ है।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
नीति-कथा संसार के धन-लोभ को चेतावनी देती है। यहाँ हम देखते हैं कि धन की चाह कितनी बार आत्मिक संतुष्टि को प्रभावित करती है—धन तो 싶은 है परन्तु उसकी प्राप्ति से आत्म-शांति और वास्तविक तृप्ति नहीं मिलती। नम्रता के साथ कहा गया है कि धन-लिप्सा से मिलने वाली खुशी fleeting है; जो अत्यधिक धन की चाह के पीछे भागता है, उसे अंतिमतः शांति नहीं मिलती।
व्याख्यात्मक विचार
- धन से प्रीति रखना एक आंतरिक भूख है जो प्रायः संतुष्टि नहीं देते। यह उसी प्रकार है जैसे चित्त को कभी-न खत्म होने वाली चाह ने घेर लिया हो।
- वास्तव में तृप्ति बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि हृदय की स्थिरता और परमात्मा के साथ समीपता में होती है।
- यह वचन वस्तुनिष्ठ सत्य बताता है: धन के साथ आनंद की गति बढ़ती नहीं; यदि धन के पीछे भागना है, तो लाभ भी फिर क्षणभंगुर है और आध्यात्मिक लाभ घटते जाते हैं।
सूक्ष्म दृष्टिकोण (संकेतित विचार)
संबद्ध पाद्रव्य उद्धरण (Cross-References)
- अन्यालोकन: कुछ पाठ धन के भंडार से नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण नियत से तृप्ति की ओर इशारा करते हैं; यह भिन्न-भिन्न संदर्भों में दिखता है, जैसे कि गरीबी और धन-दौलत की समीक्षा पर विस्तार।
- आत्म-तृप्ति और विश्वासी जीवन के साथ संतोष: धन-लिप्सा से मुक्त होकर परमेश्वर की प्रदान की गई शांति में टिके रहने की आवश्यकता।
नोट: ऊपर के संकेत बाइबल के समान्तर पाठ से प्राप्त सामान्य निष्कर्ष हैं; ये विशिष्ट वाक्यों के पूर्ण टेक्स्ट नहीं दे रहे हैं।
पंक्ति-दृष्टिकोण का संक्षेप (Thematic Snapshot)
व्यावहारिक निष्कर्ष
यथार्थ संतोष वह है जो परमेश्वर के साथ संबंध में मिला है—धन केवल साधनों के रूप में उपयोग करें, उसकी चाह को भगवान की सेवा से पहले न रखें। धन-लोभ से बचने के लिए संयम और इमानदारी को अपना जीवन-चरित बनायें; इससे अंतःकरण में शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
उद्धृत सूत्र: यदि उपलब्ध हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शुद्ध पाठ उद्धरणों की जगह पर हमने संक्षेप रूप में सन्नद्ध टिप्पणी को जोड़ा है; जहाँ उनके शब्द सीधे उद्धृत हैं, वहां आवश्यकत अनुसार संकेत दिए गए हैं।