Old Testament
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सभोपदेशक 5:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जैसा वह माँ के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। (1 तीमु. 6:7)
सभोपदेशक 5:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अय्यूब 1:21 (HINIRV) »
“मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।” (सभो. 5:15)

भजन संहिता 49:17 (HINIRV) »
क्योंकि वह मर कर कुछ भी साथ न ले जाएगा; न उसका वैभव उसके साथ कब्र में जाएगा।

1 तीमुथियुस 6:7 (HINIRV) »
क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। (अय्यू. 1:21, भज. 49:17)
सभोपदेशक 5:15 के Immediate Setting
सभोपदेशक का यह वाक्य एक सरल पर गहरी सत्यता का चित्रण है: मनुष्य जो कुछ भी कमाता या कमाता है, अंततः उसे न तो अपने साथ ले जा सकता है और न ही उसे अपने जीवन के अर्थ के साथ जोड़ सकता है। यह उद्धरण तब आता है जब लेखक इस संसार की अस्थिरता, सांसारिक लाभ की क्षणिकता, और जीवन के अंत में दूसरों के हाथों के लिए छोड़ देने की मजबूरी को उजागर करता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में जो पाठ उद्घाटित करता है
यह पद ईश्वर की आमद और मानव निर्भरता की Reminder प्रस्तुत करता है: जीवन एक यात्रा-पर्यटन है जिसमें सांसारिक संपदा का संचय केवल एक क्षणभंगुर लाभ देता है। परमेश्वर के दृष्टिकोण से प्रत्येक जीवित व्यक्ति एक निर्भर-structure के रूप में है, जिसे पर्यावरण, दिनचर्या और समय-सीमा तय करती है। जीवन के उद्देश्य की खोज में यह पाठ मानवीय प्रशंसा और धन-संपत्ति के बाद भी एक सरल सत्य को याद दिलाता है: हमारी वास्तविक देन और आत्मा की शान्ति केवल परमेश्वर के साथ सम्बन्ध में मिलती है, न कि पदार्थ के साथ।
महत्वपूर्ण शब्दों और प्रतीकों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य समान पाठ और उनके दृष्टिकोण
यथा दीन-दुखी जीवन के बारे में अन्य सत्यों में भी similar विचार मिलते हैं कि सांसारिक लाभ टिकाऊ नहीं होते। उदाहरण के लिए निम्न संदर्भ इस विमर्श को गहराई देते हैं:
आज के समय में आवेदन
आज के जीवन में यह पाठ एक सरल, स्पष्ट मार्ग दिखाता है: समय-सारिणी में कितनी भी कमाई क्यों न हो, यह जीवन के अंतिम क्षण तक टिक नहीं सकती। इसलिए एक सच्ची जिंदगी वही है जो परमेश्वर के साथ संबंध, दूसरों की सेवा, और भीतर की शांति पर केंद्रित हो। अगर हम अपने परिश्रम को भी ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप उपयोग करें, तो समय के साथ मिलने वाली क्षणिक सफलताएं भी शांति और संतुष्टि में बदली जा सकती हैं।
बंधुत्वपूर्ण सार
कुल मिलाकर यह पाठ यह बताता है कि जीवन की सम्पत्ति और जन्म-काल के चक्र से परे एक स्थायी मूल्य है: परमेश्वर के साथ सही रिश्ते में आस्था और धैर्य। वह सत्य जो पुराने टिप्पणीकारों ने बार-बार उद्घाटित किया है, वह है कि सांसारिक उपलब्धियाँ स्थायी नहीं, परन्तु परमेश्वर की कृपा और उद्देश्य से जीवन में वास्तविक धरातल बनता है।
संक्षिप्त Cross-References और उनके अर्थ
1) 1 तीमु. 6:7 — यह स्पष्ट स्मृति दोहराती है कि मनुष्य ने کچھ नहीं लाया और न ही जाएगा—इससे स्वास्थ्यपूर्ण परिप्रेक्ष्य मिलता है।
2) हब 13:5 — धन के प्रति लालच से दूर रहने की प्रेरणा, ताकि विश्वास जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी समृद्ध बने।
3) नीतियां 5:10 — जीवन में वस्तुओं के पीछे न भागना; परमेश्वर-निष्ठा ही वास्तविक सफलता है।
सूक्ष्म संदेशन: यह उद्धरण माता-पालन और मानव-जीवन के चक्र के साथ जुड़ते हुए एक सरल, लेकिन गूढ़ संदेश देता है—हम जो कुछ भी कमाते हैं, वह हमारे साथ नहीं जाएगा; इसलिए हमारा प्रयास और धन-सम्पत्ति एक ढाल नहीं, बल्कि एक सेवक के समान होना चाहिए जो परमेश्वर के उद्देश्य के लिए उपयोग हो।
ध्यान दें: नीचे दिये गए उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरित हैं और मूल पाठ के चयनित बिंदुओं को सामान्यीकृत करते हैं।