Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



1 तीमुथियुस 6:7 — परिभाषा और संदर्भ
पद्य के पास के संदर्भ में पॉल अपने युवा परमुखी को सचेत करते हैं कि मनुष्यों के जीवन की मूल असुरक्षा क्या है—हमने कुछ भी अपने साथ नहीं लाया और कुछ भी नहीं ले जा सकते। यह विचार जीवन के अस्थायित्व को दर्शाता है, और हमें अपनी आस्था को सही ढंग से दृढ़ करने के लिए प्रेरित करता है कि हम ईश्वर के उद्धार और चरित्र पर टिके रहें।
पद का तत्काल नज़रिया—कौन-सी बात स्पष्ट है?
“क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं” यह स्मरण कराता है कि धन-सम्पत्ति, सामाजिक स्थिति या किसी भी सांसारिक वस्तु की महत्ता समकालीनता पर निर्भर नहीं है। सच्ची अनुभूति यह है कि जीवन के मूल स्रोत और अंतिम नियति परमेश्वर ही हैं। ये शब्द अय्यू (अय्यूब) 1:21 और भज 49:17 के साथ एक गूढ़ संबद्धता बनाते हैं, जहां उद्गार यह है कि जीवन की कमी या वृद्धि सब कुछ परमेश्वर की कृपा और शासन के अधीन है।
मुख्य शब्दों की व्याख्या
सम्बद्ध आयतें और उनका सार
यह पद अन्य जगहों पर भी अनुकरणीय मार्गदर्शन देता है: शब्दशः दयालुता, निर्भरता और तपस्या—खासकर माता-पिता, धनी, या शक्तिशाली के बारे में नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने के बारे में। यद्यपि मैं सीधे उद्धरण नहीं देता, पर यह विचार 1 कुरिन्थियों 4:7 और मत्ती 6:19–21 जैसे शिक्षाओं से संवाद करता है, जहाँ आकाशीय धरोहर की स्वतंत्र महत्ता बताई जाती है—जो सांसारिक सामान से बढ़कर है।
खास क्रॉस-रेफरेंस
व्याख्या में इन क्रॉस-रेफरेंस से यह स्पष्ट होता है कि सांसारिक वस्तुओं की महत्वपूर्णता अस्थायी है, पर ईश्वर के साथ जीवन का सही संबंध स्थिर रहता है।
आज के जीवन में अन्वय—व्यवहारिक toepass
1 तीमुथियुस 6:7 हमें स्वयं के लिए एक मार्गदर्शक बुनियादी नियम देता है: जीवन के मूल मूल्य कहाँ है? हमारे पास जो है, उसे ईश्वर के प्रति आभार के साथ स्वीकार करें, और उन चीजों के पीछे न भागें जो अंततः हमारे साथ नहीं जा सकतीं। यह विचार आज के अस्थिर आर्थिक संसार में विशेष तौर पर तौलने योग्य है: अधिक धन, अधिक सुरक्षा नहीं देता; परमेश्वर के साथ भरोसा ही स्थिर शांति देता है।
संक्षेप निष्कर्ष
यह पद हमें याद दिलाता है कि हमारी तुलना और उद्देश्य सही दिशा में हों: सांसारिक संपत्ति से स्वर्गीय धरोहर की ओर संतुलन बनाए रखना। परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार जीवन व्यतीत करें, ताकि समय के साथ-साथ हमारे कर्म और विश्वास—दोनों साथ जाएं।