Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



1 तीमुथियुस 6:4 — अभिमान, विवाद और शब्द-तर्क से दूर रहने का संदेश
यह verse ऐसे व्यक्ति की पहचान करता है जो न केवल सीधी सच्चाई से दूर हो जाता है, बल्कि अपने स्वार्थी तर्कों और घमंड से बुरे परिणामों को जन्म देता है। पाठक के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी समुदाय या चर्च में असली ज्ञान वही है जो प्रेम, नम्रता और एक दूसरे के एहसानों के आधार पर हो। जहां असत्य या अर्धसत्य कभी-कभी बुद्धि के पीछे छिपते हैं, वहां परमेश्वर का मार्ग स्पष्ट एवं उद्धारकर्ता है।
संक्षेप में मूल संदर्भ
यह पाठ 1 तीमुथियुस के पत्र का हिस्सा है, जहाँ पौलुस युवा उपदेशक तीमुथियुस को सच और नम्रता के साथ सेवकाई के मार्ग पर चलने की प्रोत्साहना देता है। यहाँ स्पष्ट संदेश है कि जो व्यक्ति शब्दों-तर्कों या दलीलों में ही मग्न रहता है, उसका ध्येय परमेश्वर की वास्तविक शिक्षा से बहक सकता है; ऐसी जन-शक्ति या महत्वाकांक्षा उसे श्रेष्ठ नहीं बनाती, बल्कि दायित्व से विमुख कर देती है।
मुख्य विचार और संदेश
इस verse में चार प्रमुख धारणाएं उभरती हैं:
पवित्र शास्त्रीय गूढ़ता और थीम
वचन यह स्मरण देता है कि ज्ञान-जीवन का सार तलाशने में humility सबसे बड़ा गुण है। अध्यात्मिक ज्ञान को अक्सर आंतरिक परिवर्तन, प्रेम और एक दूसरे की गरिमा के लिए उपयोग किया जाता है, न कि स्वयं को दिखाने के लिए। यह विचार पौलुस के अन्य उपदेशों से भी संगत है, जहाँ प्रतिस्पर्धा और जग-प्रचार के बजाय एक ईश्वर के सामने जीवन के सच को प्राथमिकता दी जाती है।
अन्य संदर्भों के क्रॉस-रेफरेंसे
1) सुधार के लिए प्रेरणा: याकूब 3:13-18 — ज्ञान की वास्तविकता वह है जो शांतिपूर्ण और निर्मल है; विवाद और कुटिल-तर्क नहीं।
2) नम्रता और प्रेम: फल 13:ullo — निष्ठावान प्रेम और दया से व्यवहार करना, तर्क-वितर्क से ऊपर है।
3) विश्वास-जीवन का ध्येय: यहोशू 1:8 — नियम-आर्तन और देव-चिन्तन से मार्ग मिलना; शास्त्र दैनंदिन जीवन के लिए है न कि केवल बहस के लिए।
पवित्र टिप्पणियाँ और ऐतिहासिक विचार
यहाँ के विचारों को समझाने के लिए प्रचलित सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों में से कुछ के संकेत एक-एक करके स्पष्ट हैं:
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि परम-प्रभु के मार्ग पर चलना उस ज्ञान की कुंजी है जो नम्रता, प्रेम और सत्य से मिलती है, न कि विवाद-तर्क से।
संक्षिप्त devotional reflection
प्रिय पाठक, जब भी आप किसी चर्चा में पड़ते हैं, याद रखें कि ज्ञान की परीक्षा就是 प्रेम का परिणाम है। यदि चर्चा ढूंढने के बजाय डाह, निंदा या संदेह से प्रेरित हो, तो वह वास्तविक ज्ञान नहीं, बल्कि मानव-तर्क की धुंध है। परमेश्वर का ढंग सरल है: सत्य को प्रेम के साथ बाँटिए, दूसरों को समझिए, और शांति का उद्देश्य बनाए रखें।
संक्षिप्त व्यावहारिक मार्गदर्शन
Cross-reference brief explanations: - याकूब 3:13-18: वास्तविक ज्ञान शांत, दयालु और दयाशील होता है; विवाद-तर्क उसकी पहचान नहीं। - रोम 12:17-21: दुष्ट के साथ बुरा न करें; विपरीत को सम्मान दें और शांति स्थापित करें। - कुल 3:12: अपने भीतर अच्छाई के फलों को देखें—जो तर्क-झूंझट से नहीं, बल्कि चरित्र-समझ से आता है।
छोटे उद्धरणों के बारे में: नीचे सिर्फ उल्लेखित स्रोतों के छोटे उद्धरण दिए गए हैं, पूर्ण पाठ नहीं।
उद्धृत स्रोत संकेत: मैथ्यू हेनरी, ALBERT BARNES, एडम क्लार्क के साथ-साथ एक अन्य सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकार से समेकित दृष्टिकोण का संक्षिप्त मिश्रण प्रस्तुत किया गया है। यदि आप विस्तृत उद्धरण देखना चाहें, तो उनके मूल-टिप्पणी विकास को संदर्भित करें।