Old Testament
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1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



1 तीमुथियुस 6:10 — पाठ के निकट प्रभाव और संदेश
यह पाठ पौलुस के पत्र का वह भाग है where प्रेरितशास्त्र एक नीतिगत चेतावनी देता है कि ईमानदारी भरे जीवन में धन-लोभ किस प्रकार बुराइयों का जड़ बन सकता है। परमेश्वर के उद्धारकारी क्रम में विश्वास की दृढ़ता और पवित्र जीवन का आह्वान है, परन्तु धन का मोह इसे खोने की राह खोल देता है।
ग्रंथ का तत्काल संदर्भ
पौलुस इस पत्र के प्रारम्भिक प्रायः प्रेरितों के लिए चेतावनी देते हैं कि धार्मिक नेताओं और विश्वासियों के बीच धन-लालच विषयी कारण हो सकता है। 1 तीमुथियुस 6:10 बताता है कि लोभ “सब प्रकार की बुराइयों की जड़” बन सकता है और जो इसे पाले, वे विश्वास से भटककर दुःखों में फँस जाते हैं।
ईश्वर की ओर से प्रस्तुत समझ
यह शिक्षा ठोस है—धन अपने आप पाप नहीं, पर लोभ उसे पाप की और बढ़ावा देता है। वास्तविक विश्वास वही है जो परमेश्वर के राजा-स्वामित्व को मानता है और धन को सेवक नहीं बनाता। जब धन के लिए दवद्वे बढ़ती है तो लोगों के आचरण, रिश्ते और अंत में उनके प्राण-यात्रा पर प्रभाव पड़ता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अनुसंगिक पाठ पर संक्षिप्त दृष्टिपात
- हिब्रियों 13:5-6 बताता है कि धन के साथ सतर्क रहें और उसे प्रेम न करें; भगवान आपके साथ हैं, कहकर संतुष्टि सीखने को प्रेरित करता है।
- मति 6:24 में यीशु स्पष्ट करते हैं कि अगर आप एक साथ पैसा और ईश्वर से प्रेम करते हैं, तो आप दोनों की सेवा नहीं कर पाएंगे—एक आध्यात्मिक विकल्प प्रस्तुत होता है।
- सभोपदेशक 5:10 धन का प्रेम न केवल आत्म-विश्वास को खोखला करता है, बल्कि जीवन के अर्थ की खोज में भी विंधन डालता है।
पवित्र और दैनिक जीवन के लिए अनुप्रयोग
संयुक्त सारांश
1 तीमुथियुस 6:10 हमें सिखाता है कि धन-लोभ किस प्रकार विश्वास के रास्ते को ध्वस्त कर सकता है, जब वह जीवन का उद्देश्य बन जाए। सही ढंग से धन एक साधन है, न कि स्व-समर्थन का स्रोत। प्रभु के साथ एक निष्ठा-पूर्ण जीवन में धन का स्थान सही रूप से तय किया जाना चाहिए।
संक्षिप्त उद्धरण (पुस्तक-स्तर कोर)
यदि आप चाहें, तो नीचे कुछ प्रमुख उद्धरणों के सार को देख सकते हैं, परन्तु पूरे पाठ की वैधानिकता बनी रहेगी:
“लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है।” यह कथन यह दिखाता है कि धन के प्रेम का हृदय पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है और कैसे इसे उचित सीमा में रखना आवश्यक है।
क्रॉस-रेफरेंस
- हिब्रियों 13:5-6: धन के प्रति संतुलन और परमेश्वर के संयोग पर बल; आत्म-सम्पन्नता की भावना से भरा जीवन।
- मत्ती 6:24: एक ही समय में दो मालिकों की सेवा संभव नहीं; धन और परमेश्वर के बीच चयन की दिशा दिखाता।
- कुलाय 3:5: धन के प्रेम के कारण बुराइयों के जड़ बनना; उद्धार के लिए नैतिक-आचार की आवश्यकता को पुष्ट करता है。