Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



मुख्य टिप्पणी बिंदु
1 तीमुथियुस 6:17 में पवित्र लेखक धनवानों को निश्चयपूर्ण धन-भरोसे से नहीं, वरन् परमेश्वर की असीम कृपा और संयमी आशा पर टिके रहने की सीख देता है। यह संकेत देता है कि सांसारिक संपदा कभी-कभी अस्थिर होती है, अतः भक्त को अपना भरोसा परमेश्वर में स्थिर करना चाहिए जो हमारे सुख के लिए सब कुछ बहुतायत से देता है।
साहित्यिक संदर्भ
पद 17 का संदर्भ स्पष्ट करता है कि धन, भले ही वह कितना भी बहुप्रचलित और सुरक्षित क्यों न लगे, किन्तु उसका आधार परिवर्तनशील है। लेखक तीमुथियुस को बताता है कि जीवन-मूल्य और मनुष्य की आत्मा की दिशा धन के कारण नहीं बनती। उपरोक्त विचार भूख-प्यास, अभिमान, और सांसारिक प्रतिष्ठा के विरुद्ध एक संतुलित प्रज्ञा प्रस्तुत करता है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
धन पर अत्यधिक निर्भर रहने से इमानदार सेवा और विश्वास की सरलता खतरे में पड़ती है। परमेश्वर के प्रति सही आस्था एक आंतरिक स्वतंत्रता देती है—भय से मुक्त, संतोष के साथ, और बड़े उद्देश्यों के लिए उत्साहित। यह शास्त्र-property हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपनी सुरक्षा और मंजिलों की आशा परमेश्वर पर रखनी चाहिए, न कि धन पर।
अन्यग्रंथों के साथ जोड़
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि धन का प्रयोग तुम्हारे पथ को बाहरी चकाचौंध या आंतरिक संतोष के विकल्प के रूप में नहीं करना चाहिए।
परिचर्चा के सवाल
सार निष्कर्ष
इस वचन से उभरती मुख्य शिक्षा है—हमारी आशा और सुरक्षा परमेश्वर पर होनी चाहिए, न कि धन पर। धन हमारे जीवन में एक साधन है, न कि अंतिम परम उद्देश्य। अभिमान और अस्थिर धन पर निर्भरता दोनों एक साथ संतुष्टि नहीं पैदा करते; परमेश्वर की कृपा और उनके दिए हुए मौज-मजे से संतोष मिलता है जो हमारे सांसारिक प्रयासों को ऊपर उठाकर आध्यात्मिक उद्देश्य की ओर ले जाती है।
शब्द-चयन के उद्धृत अंश
यद्यपि इस टिप्पणी में बहुतेरे विद्वानों के विचार शामिल हैं, नीचे दी गई उद्धरण केवल उनके मौलिक प्रवचनों के अनुरूप संदर्भित रूप में हैं:
“परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।” (मैथ्यू हैनरी के प्रकार्यों से प्रेरित समन्वय)
अनुदेशात्मक संदर्भ
कुल मिलाकर, 1 तीमुथियुस 6:17 हमें धन के साथ एक स्वस्थ, ईश्वर-केंद्रित दृष्टिकोण सिखाता है: संतोष, उदारता, और परमेश्वर की आशीषों पर निर्भरता—ये तीनों मिलकर एक वह जीवन बनाते हैं जिसमें धन का स्थान सही होता है और आत्मा सुरक्षित रहती है।