1 तीमुथियुस 6:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और आनेवाले जीवन के लिये एक अच्छी नींव डाल रखें, कि सत्य जीवन को वश में कर लें।

1 तीमुथियुस 6:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 तीमुथियुस 6:19 पर टिप्पणी

पद में典, प्रेरित पौ्लुस तीमुथियुस को चेतावनी देते हैं कि उनके विश्वासयोग्य जीवन के आधार को मजबूत बनाएं ताकि वे आनेवाले जीवन के लिये एक मजबूत नींव डाल सकें। यह आश्वासन चाहता है कि भक्ति-जीवन संसार के मतभेदों में स्थिर रहे, और परमेश्वर के रहस्य से संचालित होकर सत्य जीवन को प्राप्त करे। यहाँ “जीवन” से आशय उस आनेवाले अनंत जीवन से है जो यीशु मसीह में भरोसे से मिलता है, न कि केवल वर्तमान सांसारिक जीवन से।

मुख्य अर्थ

पद कहता है कि विश्वासियों को एक ऐसी नींव बनानी चाहिए जो आनेवाले जीवन के लिये हो—यानी आस्था, धीरता, और काम-धर्म से परिपूर्ण एक व्यवहार जो ईमानदारी और पवित्रता से प्रेरित हो। “वश में कर लें” का भाव यहाँ आध्यात्मिक सशक्तिकरण को दर्शाता है: सत्य जीवन के प्रभाव से हमारी प्रकृति, इरादा और कर्म ढलते हैं, न कि गलत मार्ग से।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • नींव बनाना: किस प्रकार हमारा विश्वास, आशा, और प्रेम माता-पिता बनकर आनेवाले जीवन को धारण करते हैं; यह एक सतत अनुशासन और प्रार्थना-जीवन माँगता है।
  • आनेवाला जीवन: अभी का जीवन केवल क्षणिक नहीं है; परमेश्वर की महिमा में प्रकाशित होने वाला वास्तविक जीवन जो पाप से मुक्त है।
  • सत्य जीवन का प्रभाव: सत्यपूर्ण आचरण, विनम्रता, और विवेक से हमारा दिन-चर्या और समाज-सम्बन्ध गढ़े जाते हैं।

सम्बद्ध या संदर्भित स्थल

यही संदेश न देखें तो नीचे के पाठ दृष्टांत रूप में सहायक हो सकते हैं:

  • याकूब 2:26 — आत्मा के बिना शरीर मरे जैसा विश्वास बिना कर्मों के निष्क्रिय रहता है; सत्य आचरण जीवन को आकार देता है।
  • इब्रानियों 11:10 — आस्था के कारण वह नगर के लिये नींव को स्थापित करता है; अंततः यह आनेवाले राष्ट्र पर प्रभाव डालता है।
  • रोम 8:18-21 — आनेवाले कल के महिमाहीनता बनाम नई सृष्टि का उद्घोष; जीवित आशा के कारण वर्तमान पीड़ाओं में भी धैर्य।

व्यावहारिक चिंतन

अपने दैनिक जीवन में आप किस प्रकार एक “अच्छी नींव” डाल रहे हैं? प्रार्थना, पवित्र लिखित मंथन, और समुदाय-सहयोग से गहराई आती है। यह पद हमें याद दिलाता है कि आज का आचरण और आस्था, आनेवाले जीवन के लिये तैयार करता है—भरोसा और नैतिकता की सतह पर। प्रेरित पतरस की उक्ति भी स्मरण दिलाती है कि "अपनी आस्था को दृढ़ बनाए रखें" ताकि आप वास्तविक जीवन की प्राप्ति से विमुख न हों।

पूर्ववर्ती विचार— फौलदारता और नम्रता एक साथ: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों के हिस्से से समेकित रूप में यह संदेश संकेत देता है कि आस्था-जीवन एक परख और प्रशिक्षण है; सत्य जीवन के नियंत्रण में रखने का मूल उद्देश्य चरित्र-निर्माण है।

संक्षेप

इस Verse में प्रेरित पवित्र जीवन की निर्माण-पद्धति बताता है: एक दृढ़ नींव जो आनेवाले जीवन के लिये हो, ताकि सत्य-जीवन को हमारे अंदर और हमारे व्यवहार में प्रभुत्व मिले। यह हमारे विश्वास, धैर्य, और कर्मों के संयोजन से संभव होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 तीमुथियुस 6:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले*, जिसके लिये तू बुलाया गया, और बहुत गवाहों के सामने अच्छा अंगीकार किया था।

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“अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहाँ कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर सेंध लगाते और चुराते हैं।

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तो भी परमेश्‍वर की पक्की नींव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है: “प्रभु अपनों को पहचानता है,” और “जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।” (नहू. 1:7)

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