Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



1 तीमुथियुस 6:14 — संदर्भ और तात्पर्य
यह आयत पवित्रपालक पतरस द्वारा प्रेरित सूचनाओं के बीच एक रवायती निर्देश है: जब तक हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने की वह घड़ी न आ जाए, तब इस आज्ञा को निष्कलंक और निर्दोष बनाए रखना। इसे 1 तीमुथियुस की पिटारी में प्रकाशित अक्षरों के साथ एक गतिशील प्रेरणा के रूप में पढ़ना चाहिए, जिसे पौलुस ने युवा तीमुथियुस को दी थी ताकि वह विश्वास के मार्ग पर अचल रहे और समुदाय के बीच ईमानदार जीवन जी सके।
इस पाठ से परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या स्पष्ट होता है
यह आयत विश्वास-जीवन की सततता पर जोर देती है। प्रभु यीशु मसीह के गौरवपूर्ण प्रगट के समय तक, ईमानदार जीवन का सामर्थ्य वही है जो आज्ञा के निष्कलंक रहने की मांग करता है। इस टिप्पणी में यह सिद्धांत उभरकर आता है कि ईश्वर पवित्रता और सत्य के साथ चलते रहने की अनुग्रह देता है और हमें अपनी योजना में स्थिर रहने के लिए प्रेरित करता है।
शब्दों और छवियों की स्पष्टता
अन्य संबंधित आयतें
यहाँ कुछ आयतें जो इस तथ्य को रेखांकित करती हैं कि चुनौतीपूर्ण समय में विश्वास के मार्ग पर स्थिर रहना आवश्यक है:
पूर्ववर्ती पवित्र-पत्री दृष्टिकोण से स्पष्टियाँ
पवित्रशास्त्री कथनों में यह देखा गया है कि परमेश्वर अपने बच्चों को पवित्र रहकर दुनिया में वाणी और आचरण से मिसाल कायम करने के लिए बुलाते हैं। इसे मॉरल-नियतियों के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास के जीवन की निरंतरता के रूप में पढ़ना चाहिए।
आधुनिक अनुपालन के लिए व्यावहारिक मार्ग
आज के पथिक के लिए यह आयत दिशा-सूचक है कि अपने आचरण में निष्कलंकता बनाये रखना कैसे संभव है:
संक्षिप्त एकीकृत निष्कर्ष
इस आयत का संदेश यह है कि हम प्रभु के प्रगट तक अपनी आचार-व्यवस्था में निष्कलंक और निर्दोष बने रहें—यानी जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वर की महिमा के अनुरूप रहने की सतत कोशिश करें। यह न सिर्फ व्यक्तिगत पवित्रता की मांग है, बल्कि समुदाय में तीन-स्तरीय विश्वसनीयता और साहचर्य का निर्माण भी है।
मैथ्यू हेनरी, अॅलबर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के चर्चित विचार
यद्यपि यह संकलन सुदूर-जन-समाचार से प्रेरित है, फिर भी इन पवित्र टिप्पणीकारों के कुछ सारगर्भित बिंदु प्रवेश करते हैं:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, हमारे जीवन의 पवित्रता उन प्रत्यक्ष उपकारों से मिलती है जो विश्वास के फल के रूप में दिखाई देती है।
एलबर्ट बर्न्स बताते हैं कि यह आयत जिम्मेदारी के साथ आचरण की खोज को दर्शाती है — कि चरित्र की ठोसता से ही ईश्वर की सेवा संभव होती है।
एडम क्लार्क पूरक कथन में कहते हैं कि संसार की टोह लेने वाले समय में निर्दोष रहने का प्रयत्न आत्म-नियंत्रण एवं दृढ़ विश्वास की परीक्षा है।
इन में से स्पष्ट शब्द-उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो वे नीचे उद्धृत किए जाएंगे: “...निष्कलंक और निर्दोष रख” आदि छोटे उद्धरण दिए गए हैं, परन्तु पूर्ण पाठ के उद्धरण यहाँ नहीं दिए जाते।
cross-reference: 2 कुरिन्थians 4:2; हब 12:14; तीतुस 2:7—इनमें आचरण की पवित्रता और औचित्य की आवश्यकता स्पष्ट होती है।